मुंबई में हमारा परिवार इकाई द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर सभागार में धुली वंदन फूलों की होली का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें डॉ. सुरेंद्र भाईसाहब सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
धुली वंदन फूलों की होली मुंबई: संस्कृति, प्रेम और राष्ट्रभावना का अनोखा उत्सव
धुली वंदन फूलों की होली मुंबई में इस वर्ष एक विशेष और प्रेरणादायक रूप में मनाई गई। होली का पर्व भारत की सांस्कृतिक परंपरा, भाईचारे और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर “हमारा परिवार” मुंबई इकाई द्वारा एक भव्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें फूलों और चंदन के साथ धुली वंदन मनाकर भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया गया।
मुंबई के दादी सेठ अग्यारी लेन स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया और इसे यादगार बना दिया।
धुली वंदन फूलों की होली मुंबई – भव्य आयोजन
धुली वंदन फूलों की होली मुंबई कार्यक्रम का आयोजन “हमारा परिवार” की मुंबई इकाई के प्रमुख सुर्या जैन के नेतृत्व में किया गया। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से दिल्ली से पधारे हमारा परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र भाईसाहब की पावन उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित हुए और सभी ने मिलकर प्रेम, भाईचारे और संस्कृति का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ और दीप प्रज्ज्वलन
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।
दीप प्रज्ज्वलन में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
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डॉ. सुरेंद्र भाईसाहब
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मासमा अध्यक्ष चंदन भंसाली
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हिरालाल मेहता
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सुरेश लोढ़ा
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ज्योति शर्मा
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मंगलचंद सेठ
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सुर्या जैन
इस दौरान मंच संचालक मंगलचंद सेठ ने अपने शायराना अंदाज में सभी अतिथियों को व्यासपीठ पर आमंत्रित किया, जिससे कार्यक्रम का माहौल बेहद उत्साहपूर्ण बन गया।
राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक संदेश
अपने संबोधन में डॉ. सुरेंद्र भाईसाहब ने होली के पावन पर्व का महत्व समझाते हुए कहा कि यह त्योहार केवल रंगों का उत्सव नहीं बल्कि प्रेम, एकता और समाज को जोड़ने का पर्व है।
उन्होंने उपस्थित लोगों को “हमारा परिवार” संगठन से जुड़ने का आह्वान भी किया और समाज सेवा के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को राम दल और श्याम दल में विभाजित कर ज्ञानवर्धक खेल आयोजित किया गया। इस खेल के माध्यम से राष्ट्र शक्ति, देशभक्ति और सामाजिक एकता का संदेश दिया गया।
फूलों की होली और आत्मीय मिलन
इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि धुली वंदन फूलों की होली मुंबई में गुलाल की जगह फूलों और चंदन से होली खेली गई।
पुरुषों ने पुरुषों से और बहनों ने बहनों से गले मिलकर एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। इसके बाद सभी ने एक-दूसरे पर फूलों की वर्षा की और मिठाई खिलाकर मुंह मीठा करवाया।
इस दौरान होली के विशेष गीत भी गाए गए जिससे पूरे सभागार में आनंद और उत्साह का माहौल बन गया।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में देश-विदेश से कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
मुख्य रूप से उपस्थित रहे:
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अतुल बुबना
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हरियाणा झींद के पूर्व मेयर सुनील शर्मा
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निरज शर्मा
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लंदन से जुही शर्मा
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बाबुलाल बोहरा
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मुकेश बोकड़िया
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नरेश जैन
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नारायण सिंह राव
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रतन कोठारी
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शिल्पा जैन
इन सभी अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक विशेष बना दिया।
आयोजन की विशेषताएं
इस कार्यक्रम की कई विशेषताएं रही:
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फूलों और चंदन से धुली वंदन मनाना
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राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकता का संदेश
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ज्ञानवर्धक खेलों का आयोजन
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समाज के लोगों का आत्मीय मिलन
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सांस्कृतिक गीत और पारंपरिक उत्सव
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों का समूह छायाचित्र लिया गया, जो इस यादगार आयोजन की स्मृति बन गया।
आयोजक ने व्यक्त किया आभार
कार्यक्रम के आयोजक सुर्या जैन ने सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि कम समय की सूचना के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि समाज में एकता और संस्कृति के प्रति गहरा लगाव है।उन्होंने आशा व्यक्त की कि जिस प्रकार सभी ने अब तक सहयोग दिया है, भविष्य में भी इसी तरह साथ मिलता रहेगा।
निष्कर्ष
धुली वंदन फूलों की होली मुंबई केवल एक त्योहार नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक एकता और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत उदाहरण बन गई।ऐसे कार्यक्रम समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित कराने का कार्य करते हैं। मुंबई में आयोजित यह उत्सव आने वाले वर्षों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।



