इंदौर में सिंहस्थ 2028 से पहले MR‑12 सड़क निर्माण में बस्ती बनी बड़ी अड़चन, अब तक समाधान नहीं निकला
इंदौर, मास्टर प्लान की अहम सड़कों में से एक MR‑12 का निर्माण इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) द्वारा लंबे समय से किया जा रहा है, लेकिन इसका काम कई चुनौतियों के चलते अब तक बाधित है। खासकर एक बस्ती को हटाने और जमीन अधिग्रहण के मुद्दों ने परियोजना को धीमा कर दिया है। सिंहस्थ 2028 से पहले इस सड़क को चालू करना प्रशासन की प्राथमिकता है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिल पाया है।
MR‑12 का उद्देश्य बायपास से सीधे उज्जैन रोड तक करीब 9 किलोमीटर लंबी सड़क बनाकर शहर में वाहनों की आवाजाही को सरल और तेज बनाना है। साथ ही यह सड़क भारी वाहनों के दबाव को शहर के बीच से हटाकर मुख्य मार्ग तक ले जाने में भी सहायता करेगी, जिससे एमआर‑10 और अन्य मार्गों पर दबाव काफी कम होगा।
परियोजना की स्थितियाँ और बाधाएँ
MR‑12 सड़क बायपास से शुरू होकर अरंडिया गांव, एबी रोड, कैलोद हाला, मांगलिया, भानगढ़ होते हुए भौंरासला स्थित लवकुश चौराहे के पास उज्जैन रोड से जुड़ती है। यह मार्ग मास्टर प्लान 2008 में शामिल किया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर इसे लागू करने में अनेक अवरोध सामने आए हैं।
सबसे बड़ी बाधा वह बस्ती है जो कांकड़ के पास बसी हुई है। इस बस्ती में लगभग दो हजार परिवार रहते हैं, और सड़क निर्माण के लिए इसे हटाना अनिवार्य है। प्रशासन ने प्रधानमंत्री आवास‑2 योजना के तहत यहां रहने वाले लोगों को फ्लैट बनाकर पुनर्वासित करने की योजना बनाई है, लेकिन यहां फ्लैट निर्माण में ही दो साल से अधिक समय गुजर चुका है और अब तक पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में बस्ती को हटाने का कोई अंतिम हल सामने नहीं आ सका है।
आइडीए ने प्रारंभिक रूप से यह प्रस्ताव रखा था कि बस्ती के लोगों को नई जगह पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा, लेकिन निर्माण कार्य की धीमी प्रगति के कारण यह योजना ठहरती जा रही है। अब बड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों को मिलकर ऐसी व्यवस्था निकालनी है जिससे बस्ती को हटाने का वैकल्पिक समाधान निकले और सड़क निर्माण में तेजी लाई जा सके।
सड़क निर्माण की प्रगति और बाकी कार्य
हालांकि कई स्थानों पर सड़क का कुछ हिस्सा तैयार किया जा चुका है—लगभग साढ़े चार किलोमीटर की दूरी तक निर्माण हो चुका है—लेकिन परियोजना अभी अधूरी है। बायपास से भी अभी तक जमीन नहीं मिलने के कारण काम रुका हुआ है।
आईडीए के सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े ने बताया कि कुछ स्थानों पर सड़क का काम प्रगति पर है और जल्द ही अन्य समस्याओं का समाधान निकालने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रेल ओवरब्रिज (आरओबी) और पुल के कार्य भी शुरू कर दिए गए हैं।
रेल ओवरब्रिज और पुल का निर्माण
MR‑12 पर कैलोद हाला रेलवे क्रॉसिंग पर तीन लेन का रेल ओवरब्रिज बनाया जा रहा है। इसका कार्य पीडब्ल्यूडी द्वारा ₹35 करोड़ की लागत से किया जा रहा है। इसके अलावा, आईडीए भी तीन लेन का एक आरओबी बनाएगा, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। आरओबी के निर्माण में अनुमानतः लगभग दो वर्ष का समय लगेगा।
इसी तरह, शकरखेड़ी के पास कान्ह नदी पर भी एक पुल का निर्माण शुरू हो गया है, जिसकी लागत लगभग ₹15 करोड़ अनुमानित है। पुल और आरओबी दोनों के लेआउट में संशोधन के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिल चुकी है। प्रशासन का दावा है कि इन दोनों कार्यों के पूरा होने पर एमआर‑12 के कई हिस्सों में यातायात सुचारू रूप से चल सकेगा।
MR‑12 के लाभ और महत्व
MR‑12 बनने के बाद राजधानी भोपाल, ग्वालियर और दिल्ली जैसे बड़े शहरों से आने वाला यातायात बिना शहर के भीतरी हिस्सों में प्रवेश किए सीधे उज्जैन रोड तक पहुंच सकेगा। इससे शहर के बीचों‑बीच के मार्गों पर होने वाला दबाव भी कम होगा।
फिलहाल भारी वाहनों को MR‑10 मार्ग से होकर देवास नाका और उज्जैन की ओर जाना पड़ता है, जिससे एमआर‑10 पर भी वाहनों का दबाव बढ़ता है। एमआर‑12 बनने के बाद भारी वाहन इसी मार्ग का उपयोग कर सकेंगे, जिससे एमआर‑10 का दबाव कम होगा और ट्रैफिक का प्रवाह भी सुचारू होगा।
यह सड़क न सिर्फ शहर को एक बेहतर कनेक्टिविटी देगी बल्कि शहर के बाहर बनने वाली नई कालोनियों और ग्रामीण इलाकों को भी बेहतर मार्ग सुविधाएं प्रदान करेगी। इसके अलावा बायपास के जर्जर हिस्से पर भी करपेटिंग का काम प्रस्तावित है, जिससे टू व्हीलर तथा अन्य वाहनों की आवाजाही और भी सुरक्षित एवं आरामदायक होगी।
कई बाधाएँ हटाई जा चुकी हैं, पर मुख्य समस्या जस की तस
कुछ क्षेत्रों में बाधक ईंट भट्टों को हटाया जा चुका है और उस हिस्से पर सड़क का निर्माण जारी है। लेकिन बस्ती और जमीन अधिग्रहण के मुद्दों ने अभी भी कई कार्यों को जकड़ रखा है।
डॉ. झाड़े ने कहा है कि रोड ओवरब्रिज और पुल के निर्माण कार्य जल्द पूरा किए जाएंगे और अन्य हिस्सों में भी जल्द ही काम प्रारंभ किया जाएगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि बस्ती हटाने का दीर्घकालिक समाधान निकालने के लिए प्रशासन अभी भी अध्ययन कर रहा है।
निष्कर्ष
MR‑12 परियोजना इंदौर के ट्रैफिक प्रबंधन और शहर के विकास के लिए एक अहम कदम है। सिंहस्थ 2028 जैसे बड़े आयोजन से पहले इसे पूर्ण रूप से चालू करना प्रशासन की प्राथमिकता है, लेकिन बस्ती हटाने और जमीन अधिग्रहण के जटिल मुद्दों ने इसे अब तक बाधित रखा है।
रेल ओवरब्रिज, पुल और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण अवश्य शुरू हो चुका है, परन्तु अगर बस्ती हटाने का स्थायी समाधान जल्द नहीं निकलता है तो इस सड़क के सही समय पर पूरा होने में और विलंब हो सकता है। ऐसे में प्रशासन को बस्ती के पुनर्वास, जमीन अधिग्रहण और स्थानीय लोगों की सहमति जैसे मुद्दों पर त्वरित और व्यावहारिक समाधान निकालने की सख्त आवश्यकता है।
