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पूर्व समाज अध्यक्ष Satyanarayan सलाडिया का नेत्रदान: शोक की घड़ी में मानवता की मिसाल

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Published On: 5 March 2026
Satyanarayan
— “पूर्व समाज अध्यक्ष सत्यनारायण सलाडिया का नेत्रदान: शोक के क्षण में मानवता और सेवा का अद्वितीय उदाहरण”

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पूर्व समाज अध्यक्ष Satyanarayan सलाडिया का नेत्रदान: शोक की घड़ी में मानवता की मिसाल

नगर के राठौड़ समाज के पूर्व अध्यक्ष, श्री Satyanarayan सलाडिया (85 वर्ष) का आकस्मिक देवलोकगमन पूरे समाज और परिवार के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके निधन से नगर में शोक की लहर दौड़ गई। इस दुखद अवसर पर उनके परिवार ने मानवता और सेवा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

श्री Satyanarayan सलाडिया का जीवन समाज सेवा और परोपकार के आदर्शों से भरा हुआ था। उनके निधन के तुरंत बाद उनके पुत्र ओमप्रकाश सलाडिया, अजय सलाडिया और राजेश सलाडिया सहित समस्त परिवारजनों ने शोक के इस क्षण में नेत्रदान का महान निर्णय लिया। यह कदम केवल एक परिवार का नहीं बल्कि पूरे नगर के लिए एक प्रेरणादायक संदेश बन गया।

नेत्रदान की प्रक्रिया और योगदान

4 फरवरी की देर रात, महेन्द्र राठौर के माध्यम से सूचना मिलते ही नेत्रदान की प्रक्रिया तुरंत प्रारंभ की गई। नेत्रदान की यह पहल नगर में जैन सोशल ग्रुप नागदा के नेत्रदान प्रभारी ब्रजेश बोहरा के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इस प्रक्रिया के माध्यम से दो जरूरतमंद नेत्रहीन व्यक्तियों को जीवन में पुनः प्रकाश पाने की संभावना मिली।

इस पावन कार्य से नगर में समाज के लोगों के बीच सेवा और परोपकार की भावना को और अधिक बल मिला। जैन सोशल ग्रुप नागदा द्वारा यह नेत्रदान नगर में 57वें सफल नेत्रदान के रूप में दर्ज किया गया। वहीं, गीता भवन न्यास समिति बड़नगर के नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी.एल. ददरवाल और उनकी टीम के सहयोग से यह 942वाँ नेत्रदान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

जैन सोशल ग्रुप नागदा के अध्यक्ष धर्मेन्द्र बम और डॉ. ददरवाल ने दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि,

नेत्रदान महादान है, जो मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में उजाला भर देता है।”

यह संदेश नगरवासियों के बीच इस तथ्य को रेखांकित करता है कि मृत्यु के बाद भी कोई अपने कार्यों के माध्यम से दूसरों के जीवन में प्रकाश और आशा भर सकता है।

परिवार का पुण्य संकल्प

सलाडिया परिवार ने केवल नेत्रदान ही नहीं किया, बल्कि समाज के लिए अपनी प्रतिबद्धता और समर्थन भी प्रदर्शित किया। परिवार ने तीन हजार रूपये की राशि गीता भवन न्यास समिति बड़नगर को प्रदान की, जो उनके निःशुल्क संचालित प्रकल्पों और अन्य सेवा कार्यों में उपयोग की जाएगी।

यह योगदान यह दर्शाता है कि परिवार ने अपने दुख के क्षण में भी सेवा और मानवता के मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके इस कदम ने यह संदेश दिया कि शोक के समय में भी समाज की भलाई के लिए सोचना और कार्य करना संभव है।

नगर में प्रतिक्रिया और सामाजिक सराहना

श्री Satyanarayan सलाडिया के नेत्रदान की सूचना नगर में फैलते ही लोगों ने इस कदम की व्यापक सराहना की। नगर के नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इसे मानवता और समाज सेवा का आदर्श उदाहरण करार दिया।

  • कई लोग इसे दूसरों के लिए प्रेरणा मानते हुए अपने परिवार और समाज के बीच सेवा भाव जागृत करने का संकल्प ले रहे हैं।
  • वरिष्ठ नागरिक और युवा दोनों ने इस कदम को मृत्यु के पश्चात भी जीवन में योगदान देने का सर्वोत्तम मार्ग बताया।

नगर में स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में यह कदम अन्य लोगों को भी प्रेरित करेगा कि वे ऐसे अवसरों पर मानवता की सेवा के लिए आगे आएं।

नेत्रदान: एक जीवन बदलने वाला कार्य

नेत्रदान न केवल एक शारीरिक अंग का दान है, बल्कि यह किसी के जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला सबसे बड़ा दान माना जाता है। Satyanarayan सलाडिया के इस कदम से दो व्यक्ति न केवल देखने की क्षमता प्राप्त करेंगे, बल्कि उनके जीवन में आशा और स्वतंत्रता की नई किरण भी आएगी।

इससे यह स्पष्ट होता है कि जीवन में किए गए नेक कार्य मृत्यु के बाद भी समाज में स्थायी प्रभाव छोड़ सकते हैं। उनके परिवार द्वारा लिया गया यह निर्णय इस बात का प्रमाण है कि मानवता और सेवा का कार्य किसी भी स्थिति में प्राथमिकता होनी चाहिए।

संगठन और प्रभारी की भूमिका

इस कार्य को संभव बनाने में जैन सोशल ग्रुप नागदा और गीता भवन न्यास समिति बड़नगर की टीमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने समय पर नेत्रदान की प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न किया और यह सुनिश्चित किया कि यह पुण्य कार्य सही तरीके से पूरा हो।

ब्रजेश बोहरा और डॉ. जी.एल. ददरवाल ने परिवार को मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करते हुए इस कार्य को नगरवासियों के लिए एक प्रेरणास्पद घटना में बदल दिया।

निष्कर्ष

श्री Satyanarayan सलाडिया का यह कदम न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे नगर और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। शोक के समय में सेवा और मानवता का यह अद्वितीय उदाहरण यह दर्शाता है कि सच्ची महानता केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में उजाला भरने के प्रयास में निहित होती है।

सलाडिया परिवार का यह पावन संकल्प और जैन सोशल ग्रुप तथा गीता भवन न्यास समिति की सेवाभावना समाज में सेवा, मानवता और प्रेरणा के नए मानक स्थापित करती है।

 

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