MP में होली का रंगीन उत्सव: भोपाल में ऐतिहासिक चल समारोह और पूरे प्रदेश में विशेष आयोजन
MP। इस वर्ष होली का त्योहार 4 मार्च, बुधवार को पूरे उत्साह, धूमधाम और रंग-बिरंगे कार्यक्रमों के साथ मनाया जाएगा। राजधानी भोपाल में हिंदू उत्सव समिति के नेतृत्व में ऐतिहासिक चल समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जो शहर के दयानंद चौक से शुरू होकर जनकपुरी तक जाएगा। इस जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर पारंपरिक संगीत, झांकियों और रंगों का आनंद लेंगे।
MP भोपाल में ऐतिहासिक चल समारोह
MP भोपाल में सुबह 10 बजे दयानंद चौक से शुरू होने वाला यह चल समारोह शहर की विभिन्न महत्वपूर्ण मार्गों से होकर गुजरेगा। जुलूस में घोड़ा निक्कास, मंगलवारा जैन मंदिर, इतवारा, इलेक्ट्रॉनिक मार्केट, चौकी चौक, सावरकर चौक, लखेरापुरा, भवानी चौक और सिंधी मार्केट से होते हुए जनकपुरी में समाप्त होगा। पूरे रास्ते में पारंपरिक संगीत, ढोल-ताशों की गूंज और रंग-बिरंगे झांकियों से माहौल उत्सवमय बना रहेगा।
हिंदू उत्सव समिति ने बताया कि इस बार चल समारोह में रंगों से भरे टैंकर पूरे मार्ग पर घूमेंगे, जिससे लोग आपस में रंग डालकर होली की खुशियों को साझा कर सकेंगे। जुलूस में डीजे, पारंपरिक ढोल-ताशे, डुल-डुल घोड़ी और सजी हुई बग्घियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
चल समारोह का सबसे खास दृश्य पीर गेट क्षेत्र में देखने को मिलेगा। जैसे ही जुलूस पीर गेट पहुंचेगा, टैंकरों से रंगों की बौछार शुरू हो जाएगी। हजारों लोग एक जगह इकट्ठा होकर रंगों में सराबोर होंगे और यह दृश्य शहर में भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बन जाएगा।
चंद्र ग्रहण के कारण तिथि में बदलाव
इस वर्ष 3 मार्च को पड़ने वाले चंद्र ग्रहण के कारण चल समारोह की तिथि में बदलाव किया गया। धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का सम्मान करते हुए समिति ने समारोह को 4 मार्च को आयोजित करने का निर्णय लिया। इससे सुनिश्चित होगा कि आयोजन सुरक्षित और धार्मिक दृष्टि से उपयुक्त रूप से संपन्न हो।
MP के अन्य शहरों में विशेष आयोजन
भोपाल के अलावा प्रदेश के कई अन्य शहरों में भी होली को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं।
- इंदौर: इंदौर में कई बड़े होटलों में होली के विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी अपने निवास पर कार्यकर्ताओं के साथ होली मनाएंगे।
- उज्जैन: उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे स्थित बड़ा उदासीन अखाड़ा में संतों की पारंपरिक होली खेली जाएगी। पंच परमेश्वर साधु-संत सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक होली उत्सव में भाग लेंगे। श्रद्धालुओं के लिए ठंडाई, भांग और भजियों की विशेष व्यवस्था की गई है।
- ग्वालियर: ग्वालियर में पड़वा की शाम पारंपरिक मूर्ख सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जो महाराजा बाड़ा स्थित विक्टोरिया मार्केट के सामने होगा।
- जबलपुर: जबलपुर में लम्हेटा घाट स्थित इस्कॉन मंदिर में शाम 5 बजे से भक्तों के साथ होली मनाई जाएगी।
- इंदौर केंद्रीय जेल: यहां भी सुबह 10:30 बजे होली उत्सव का आयोजन रखा गया है, जिसमें बंदियों और अधिकारियों के लिए रंग-बिरंगे कार्यक्रम आयोजित होंगे।
उत्सव में सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश
इस बार के होली उत्सव में न केवल रंग और संगीत का आनंद होगा, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश भी देखने को मिलेगा। चल समारोह और पारंपरिक होली कार्यक्रमों के माध्यम से भाईचारे, सामूहिक सौहार्द और धार्मिक सम्मान का संदेश शहर और प्रदेश में फैलेगा।
समिति के प्रतिनिधियों का कहना है कि झांकियों और डीजे के साथ पारंपरिक ढोल-ताशों की गूंज से उत्सव का माहौल और भी जीवंत हो जाएगा। डुल-डुल घोड़ी और सजावट वाले बग्घियों से होली की शोभा बढ़ेगी और लोगों में त्योहार की उमंग और बढ़ जाएगी।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष तैयारी
हिंदू उत्सव समिति ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि होली के दौरान बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाए। बच्चों के लिए सुरक्षित खेलने की जगह और बुजुर्गों के लिए आरामदायक और सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किए गए हैं। इस वर्ष भी रंगों के टैंकर और झांकियों के मार्ग में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है ताकि कोई दुर्घटना या असुविधा न हो।
होली का पारंपरिक महत्व
होली का त्योहार केवल रंगों और मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक मेल-जोल, भाईचारे और एकता का प्रतीक भी है। इस बार का आयोजन चंद्र ग्रहण के कारण कुछ दिन पीछे खिसका, लेकिन इसका महत्व और उत्साह कम नहीं हुआ। लोग पारंपरिक संगीत, रंग-बिरंगी झांकियों और सामूहिक आनंद के साथ त्योहार मनाएंगे।
निष्कर्ष
MP में होली का पर्व इस बार रंग, उत्साह और सांस्कृतिक धरोहर के संगम के रूप में मनाया जा रहा है। भोपाल का ऐतिहासिक चल समारोह, उज्जैन में संतों की पारंपरिक होली, ग्वालियर और जबलपुर में सांस्कृतिक आयोजन और इंदौर में होटलों तथा निजी कार्यक्रमों के माध्यम से होली के त्योहार का जश्न पूरे प्रदेश में देखा जाएगा।
इस बार होली का त्योहार केवल रंगों का उत्सव नहीं बल्कि भाईचारे, सांस्कृतिक सौहार्द और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनकर मध्यप्रदेश के लोगों के लिए यादगार रहेगा।
