‘3200 करोड़ की ठगी’ के मास्टरमाइंड Lavish Chaudhary को भारत लाने की तैयारी तेज, STF ने अरबी में लिखा दस्तावेज
इंदौर। निवेश के नाम पर देशभर के 12 से ज्यादा राज्यों में 3200 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले संगठित गैंग के मास्टरमाइंड Lavish Chaudhary को भारत लाने की प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ रही है। यूएई में लविश के शरण लेने की पुष्टि के बाद एसटीएफ (स्टेट टैस्क फोर्स) ने प्रत्यर्पण प्रक्रिया को तेज कर दिया है।
एसटीएफ के सूत्रों के मुताबिक, लविश चौधरी के खिलाफ आरोपों की जांच और कार्रवाई के लिए अब तक की सभी सामग्री इंदौर कोर्ट से वेरिफाई करवाई जा चुकी है। इसके बाद आवश्यक दस्तावेज अंग्रेजी और अरबी भाषा में तैयार किए गए हैं ताकि यूएई अधिकारियों से संवाद में कोई बाधा न आए।
Lavish Chaudhary के आरोप और केस की गंभीरता
Lavish Chaudhary पर आरोप है कि उसने निवेश के नाम पर लोगों को ठगी के जाल में फंसाया और 12 से अधिक राज्यों में संगठित तरीके से करोड़ों की ठगी की। यह मामला देशभर में सबसे बड़े निवेश घोटालों में से एक माना जा रहा है।
- लविश ने निवेशकों को प्रलोभन देकर उनके पैसे हड़पे।
- करोड़ों रुपये की ठगी में आम लोग और छोटे व्यापारी शामिल थे।
- एसटीएफ ने इसे एक संगठित अपराध के रूप में ट्रैक किया।
यूएई में उसके शरण लेने की पुष्टि के बाद एसटीएफ ने अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण प्रक्रिया को तुरंत शुरू किया।
कोर्ट वेरिफिकेशन और दस्तावेज तैयार
STF के अनुसार, लविश चौधरी के खिलाफ अब तक की कार्रवाई और आरोपों की वास्तविकता इंदौर कोर्ट में वेरिफाई करवाई गई।
- कोर्ट वेरिफिकेशन के बाद सभी दस्तावेजों का अरबी और अंग्रेजी में अनुवाद कराया गया।
- यह कदम इसलिए जरूरी था क्योंकि लविश यूएई में है और वहां अंग्रेजी व अरबी भाषा का प्रयोग होता है।
- दस्तावेजों में ठगी के आरोप, केस का विवरण और प्रत्यर्पण अनुरोध शामिल हैं।
एसटीएफ का उद्देश्य है कि यूएई से संवाद और प्रत्यर्पण प्रक्रिया में कोई देरी न हो।
फाइल सीआइडी शाखा को भेजी जाएगी
एसटीएफ द्वारा तैयार किए गए लविश चौधरी पर लगे आरोपों की कच्ची फाइल इसी सप्ताह पुलिस मुख्यालय की सीआइडी शाखा को भेजी जाएगी।
- वहां दस्तावेजों की जांच और परीक्षण किया जाएगा।
- इसके बाद फाइल गृह विभाग और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी।
- प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में पहले अदालत में सुनवाई होती है, और फिर औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध पर कार्रवाई की जाती है।
एसटीएफ ने यह भी बताया कि दस्तावेज तैयार होने और भेजे जाने के बाद यूएई से प्रत्यर्पण में देरी की संभावना कम हो जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण की प्रक्रिया
विदेश में अपराधियों को वापस लाने की प्रक्रिया को प्रत्यर्पण कहते हैं। इसमें कई कदम शामिल हैं:
- आरोपी की स्थिति की पुष्टि
- अदालत से वेरिफिकेशन
- विदेशी देश को औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध भेजना
- विदेशी अदालत में सुनवाई
- निर्णय के बाद भारत में प्रत्यर्पण
एसटीएफ ने लविश चौधरी के मामले में इन सभी कदमों को जल्दी से जल्दी पूरा करने का निर्णय लिया है।
लविश चौधरी की शरण और कार्रवाई
सूत्रों का कहना है कि लविश चौधरी ने यूएई में शरण ली हुई है। इस वजह से दस्तावेज अरबी और अंग्रेजी में तैयार किए गए ताकि यूएई अधिकारियों से संवाद में आसानी हो।
एसटीएफ का कहना है कि लविश चौधरी को जल्द से जल्द भारत लाकर कानूनी कार्रवाई के लिए कोर्ट में पेश किया जाएगा।
- लविश के खिलाफ कई राज्यों में ठगी के मामले दर्ज हैं।
- प्रत्यर्पण के बाद सभी आरोपों की जांच और सुनवाई भारतीय अदालत में होगी।
STF की रणनीति और तेज़ कदम
एसटीएफ ने इस मामले में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
- इंदौर कोर्ट से आरोपों की वेरिफिकेशन
- दस्तावेज का अनुवाद (अंग्रेजी और अरबी)
- फाइल को सीआइडी शाखा भेजना
- केंद्रीय गृह मंत्रालय के माध्यम से प्रत्यर्पण अनुरोध
एसटीएफ का उद्देश्य है कि लविश चौधरी को जल्द भारत लाया जाए और पीड़ित निवेशकों को न्याय मिले।
निष्कर्ष
Lavish Chaudhary का मामला निवेशक ठगी और संगठित अपराध के दृष्टिकोण से बेहद गंभीर है। 3200 करोड़ रुपये की ठगी ने देशभर के निवेशकों को प्रभावित किया।
यूएई में उसकी उपस्थिति और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को तेज करने की तैयारी से यह संकेत मिलता है कि भारतीय कानून और सुरक्षा एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपराधियों को नहीं बख्शतीं।
एसटीएफ और संबंधित विभाग सुनिश्चित कर रहे हैं कि लविश चौधरी को जल्द से जल्द भारत लाया जाए और कानूनी कार्रवाई पूरी हो। इस केस से न केवल पीड़ितों को न्याय मिलेगा, बल्कि यह देश में संगठित निवेश घोटालों के खिलाफ कड़ा संदेश भी जाएगा।
