—Advertisement—

Kailash Vijayvargiya ने दिया गलत जवाब, खुलासे के बाद प्रशासन ने किया सख्त कदम

Author Picture
Published On: 3 March 2026
Kailash Vijayvargiya’s Wrong Answer Sparks Strict Administrative Action
— Kailash Vijayvargiya’s Wrong Answer Sparks Strict Administrative Action

—Advertisement—

Kailash Vijayvargiya ने विधानसभा में दिया गलत जवाब, खुलासे के बाद अधीक्षक और लिपिक बर्खास्त

इंदौर। मध्यप्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद उठ खड़ा हुआ है। भाजपा के नगरीय प्रशासन मंत्री Kailash Vijayvargiya ने विधानसभा में विधायक महेंद्र हार्डिया के सवाल के जवाब में इंदौर नगर निगम के कर्मचारियों और पदों की स्थिति को लेकर गलत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नगर निगम में एक भी सफाई संरक्षक कार्यरत नहीं है।

यह जवाब पत्रिका द्वारा 26 फरवरी को किए गए खुलासे के बाद विवाद में बदल गया। खुलासे के अनुसार, मंत्री के उत्तर के लिए तैयार की गई जानकारी कार्यालय अधीक्षक और क्लर्क के माध्यम से प्रेषित की गई थी। मामले ने तूल पकड़ा और नगर निगम के स्थापना शाखा कार्यालय अधीक्षक हरीश श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया, वहीं लिपिक अतुल वाजपेयी (विनियमित कर्मचारी) की सेवा समाप्त कर दी गई।

विधायक के सवाल और मंत्री का जवाब

भाजपा विधायक महेंद्र हार्डिया ने विधानसभा में नगर निगम से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए थे। इनमें प्रमुख थे:

  1. निगम में स्वीकृत पदों, कार्यरत पदों और रिक्त पदों की वास्तविक जानकारी।
  2. क्या कर्मचारियों की कमी के कारण एक ही अधिकारी को कई जगह का प्रभार दिया गया है।

इस सवाल के जवाब में कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि निगम में पदों की कमी है और सीमा विस्तार के चलते अधिकारियों को एक से अधिक प्रभार सौंपे गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निगम में सफाई संरक्षक नहीं हैं।

हालांकि, बाद में यह खुलासा हुआ कि मंत्री का यह उत्तर सही तथ्य पर आधारित नहीं था। निगम के वास्तविक आंकड़ों के अनुसार:

  • नगर निगम में कुल 6312 पद हैं, जिनमें केवल 1493 भरे हुए हैं और 4819 रिक्त हैं।
  • सफाई संरक्षक के कुल 3900 पद हैं, जिनमें अधिकांश रिक्त हैं, लेकिन निगम में 1200 से ज्यादा सफाई संरक्षक कार्यरत हैं।
  • इसके अलावा, 2400 से ज्यादा विनियमित सफाई संरक्षक सफाई कार्य संभाल रहे हैं।

इससे स्पष्ट हुआ कि मंत्री द्वारा दी गई जानकारी वास्तविक स्थिति के विपरीत थी।

खुलासे के बाद कार्रवाई

पत्रिका के खुलासे के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। अपर आयुक्त ने आदेश जारी किया कि गलत जानकारी तैयार करने और भेजने के लिए जिम्मेदार कार्यालय अधीक्षक हरीश श्रीवास्तव को निलंबित किया जाए। साथ ही, क्लर्क अतुल वाजपेयी को हाजिरी मुक्त करते हुए पारिश्रमिक भुगतान पर तत्काल रोक लगा दी गई।

अपर आयुक्त के आदेश में लिखा गया है कि:
“विधायक द्वारा पूछे सवाल का जवाब संचालनालय को भेजा गया था, जो त्रुटिपूर्ण पाया गया। कार्यालय अधीक्षक और क्लर्क ने महत्वपूर्ण मामले में रुचि नहीं दिखाई, इसलिए निलंबन और सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाती है।”

इस आदेश का उद्देश्य स्पष्ट है कि महत्वपूर्ण प्रशासनिक मामलों में सटीक जानकारी देना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नगर निगम में पदों की स्थिति

नगर निगम में पदों की असंतुलित स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।

  • कुल पद: 6312
  • भरे हुए पद: 1493
  • रिक्त पद: 4819
  • सफाई संरक्षक पद: 3900 (अधिकांश रिक्त)
  • कार्यरत सफाई संरक्षक: 1200+
  • विनियमित सफाई संरक्षक: 2400+

यह आंकड़ा बताता है कि नगर निगम में पदों की कमी और कर्मचारियों की असंतुलित तैनाती वास्तविक समस्या है।

छोटे और मंझोले अधिकारी प्रभावित

इस मामले में सबसे ज्यादा असर छोटे और मंझोले अधिकारियों पर पड़ा। अधीक्षक और क्लर्क जैसे कर्मचारी जो उत्तर तैयार करने में शामिल थे, उन्हें तुरंत निलंबित और सेवा समाप्ति का सामना करना पड़ा।

कार्यालय में कहा गया कि निलंबित और हाजिरी मुक्त किए गए कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण कार्यों में रुचि नहीं दिखाई, जिससे गलत जानकारी तैयार हो गई।

राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव

यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि विधानसभा में दिए गए उत्तरों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि:

  1. अधिकारियों को विधानसभा के सवालों का उत्तर तैयार करते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।
  2. मंत्री और अधिकारी दोनों को वास्तविक आंकड़ों के आधार पर जानकारी देनी चाहिए।
  3. इस तरह की त्रुटियां प्रशासनिक विश्वास और जनता की अपेक्षाओं को प्रभावित करती हैं।

निष्कर्ष

भोपाल और इंदौर नगर निगम के मामलों में यह घटना एक चेतावनी के रूप में सामने आई है। मंत्री Kailash Vijayvargiya का गलत जवाब और उसके पीछे की लापरवाही ने प्रशासनिक तंत्र की कमजोरी को उजागर किया।

  • पत्रिका के खुलासे के बाद कार्रवाई से यह संदेश गया कि गलत जानकारी देने पर कोई भी अधिकारी बेकसूर नहीं है।
  • निलंबन और सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई से स्पष्ट हुआ कि प्रशासन सटीक और जिम्मेदार जानकारी की मांग करता है।
  • भविष्य में ऐसे मामलों में सटीक डेटा और तथ्यात्मक उत्तर देने पर जोर दिया जाएगा।

नगर निगम में पदों की कमी और कर्मचारियों की असंतुलित तैनाती अब भी चुनौती बनी हुई है। प्रशासन और नेताओं को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि सही जानकारी और पारदर्शी प्रशासन जनता तक पहुंचे और किसी भी गलतफहमी से बचा जा सके।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp