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Indore में AAAS 12वीं राष्ट्रीय होम्योपैथी कॉन्फ्रेंस–2026: डॉ. अर्पित चोपड़ा जैन का प्रभावशाली उद्बोधन

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Published On: 2 March 2026
Indore

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Indore में ‘AAAS 12वीं राष्ट्रीय होम्योपैथी कॉन्फ्रेंस–2026’ में डॉ. अर्पित चोपड़ा जैन का प्रभावशाली योगदान

Indore के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में हाल ही में आयोजित ‘AAAS 12वीं राष्ट्रीय होम्योपैथी कॉन्फ्रेंस–2026’ में देशभर से आए होम्योपैथी विशेषज्ञों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं ने एकत्र होकर इस क्षेत्र में हो रहे नवाचारों और वैज्ञानिक प्रगतियों पर चर्चा की। इस सम्मेलन में प्रमुख आकर्षण रहा प्रख्यात होम्योपैथ चिकित्सक Arpit Chopra Jain का प्रभावी और विचारोत्तेजक उद्बोधन।

डॉ. जैन ने अपने संबोधन में कहा कि होम्योपैथी केवल एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति नहीं है, बल्कि यह भविष्य की स्वास्थ्य पहचान के रूप में उभर रही है। उन्होंने विशेष रूप से कैंसर, ऑटोइम्यून रोगों, रक्त संबंधी विकारों और अन्य गंभीर तथा जटिल रोगों में होम्योपैथी की भूमिका पर अपने शोध और अनुभव साझा किए। उनके अनुसार, होम्योपैथी का समग्र या होलिस्टिक दृष्टिकोण शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त करता है और बिना किसी दुष्प्रभाव के रोगियों को उपचार प्रदान करता है।

होम्योपैथी में कैंसर और गंभीर रोगों की भूमिका

डॉ. जैन ने अपने शोध और क्लिनिकल अनुभव के आधार पर बताया कि कैसे होम्योपैथी गंभीर रोगों में सहायक और प्रभावी साबित हो सकती है। उन्होंने विभिन्न प्री और पोस्ट ट्रीटमेंट रिपोर्ट्स, केस स्टडीज और शोध-आधारित आंकड़ों का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया कि होम्योपैथिक उपचार न केवल रोगियों की जीवन गुणवत्ता में सुधार करता है, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर शरीर को दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जब आधुनिक चिकित्सा के दुष्प्रभावों और महंगे उपचारों के कारण रोगियों और उनके परिवारों में चिंता बढ़ रही है, तब होम्योपैथी एक सुरक्षित, किफायती और प्रभावी विकल्प के रूप में उभरकर सामने आ रही है। उनका मानना है कि होम्योपैथी न केवल रोगों के इलाज में मदद करती है, बल्कि रोगियों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी संतुलित करती है।

सम्मेलन में विज्ञान और अनुभव का संगम

डॉ. जैन ने अपने प्रस्तुति में होम्योपैथी के साक्ष्य-आधारित (Evidence-Based) परिणामों और आधुनिक तकनीक के साथ इसके समन्वय पर भी जोर दिया। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से यह दिखाया कि कैसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण और क्लिनिकल अनुभव का सम्मिलन होम्योपैथी को वैश्विक स्तर पर मान्यता और प्रतिष्ठा दिला सकता है।

सम्मेलन में उपस्थित विशेषज्ञों ने डॉ. जैन की प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे होम्योपैथी के वैज्ञानिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना था कि ऐसे सम्मेलन और शोध कार्य होम्योपैथी के वैश्विक मानक और अनुसंधान पर आधारित विकास को सुनिश्चित करने में सहायक हैं।

प्रमुख उपस्थित व्यक्ति और कार्यक्रम का आयोजन

इस सम्मेलन का आयोजन डॉ. A. K. Dwivedi (अध्यक्ष, आयोजन समिति) और डॉ. Vikas Singhal (कॉन्फ्रेंस सेक्रेटरी) की देखरेख में संपन्न हुआ। साथ ही Central Council for Research in Homoeopathy (CCRH) के क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान, सिलीगुड़ी के यूनिट हेड डॉ. Ranjit Soni भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने डॉ. जैन के शोध और उनके प्रस्तुत अनुभवों की उच्च स्तरीय सराहना की।

डॉ. जैन के प्रयासों को देखते हुए यह स्पष्ट हुआ कि होम्योपैथी को केवल भारत में ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृष्टि से मान्यता दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।

डॉ. अर्पित चोपड़ा जैन की प्रतिष्ठा और वैश्विक योगदान

डॉ. जैन लगातार होम्योपैथी को वैश्विक स्वास्थ्य मंच पर स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं। वे BRICS के आधिकारिक होम्योपैथी प्रतिनिधि हैं और HAMI Indore Sansthan के वाइस प्रेसिडेंट भी हैं। उन्हें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है और उन्होंने University of Oxford, लंदन में भी अपने शोध और अनुभव साझा किए हैं।

डॉ. जैन की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत सम्मान की पुष्टि करती है, बल्कि यह होम्योपैथिक चिकित्सा क्षेत्र की वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय मान्यता को भी दर्शाती है। उनके प्रयास यह सुनिश्चित करते हैं कि भारत और विश्व के रोगी होम्योपैथी के सुरक्षित और प्रभावी उपचार से लाभान्वित हों।

सम्मेलन में उठाए गए विचार और भविष्य की दिशा

सम्मेलन में उपस्थित विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि होम्योपैथी को वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर ही इसे वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि साक्ष्य-आधारित अध्ययन और इंटरनेशनल कोलैबोरेशन से होम्योपैथी के वैज्ञानिक आधार और स्वीकार्यता को और मजबूत किया जा सकता है।

डॉ. जैन ने अपने उद्बोधन के अंत में विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में होम्योपैथी भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूत जीवन रेखा बनकर उभरेगी और गंभीर रोगों के उपचार में नई आशा का संचार करेगी। उनका कहना था कि होम्योपैथी का भविष्य सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, जीवन गुणवत्ता सुधारने और स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

होम्योपैथी का भविष्य और सामाजिक प्रभाव

डॉ. जैन के अनुसार, आज का समाज ऐसे चिकित्सा विकल्प की तलाश में है जो सुरक्षित, प्रभावी, सस्ती और सुलभ हो। होम्योपैथी इस आवश्यकता को पूरा करती है और यह धीरे-धीरे एक वैश्विक स्वास्थ्य समाधान के रूप में उभर रही है। कैंसर, ऑटोइम्यून रोग, हार्ट डिसीज और क्रॉनिक बीमारियों के क्षेत्र में होम्योपैथिक उपचार के सकारात्मक परिणाम इसके वैज्ञानिक आधार को मजबूत करते हैं।

इस प्रकार, सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि आधुनिक शोध और क्लिनिकल अनुभव का मेल होम्योपैथी को भविष्य में चिकित्सा जगत में स्थायी और प्रभावशाली विकल्प के रूप में स्थापित करेगा।

निष्कर्ष

इंदौर में आयोजित ‘AAAS 12वीं राष्ट्रीय होम्योपैथी कॉन्फ्रेंस–2026’ ने न केवल विशेषज्ञों को संवाद और अनुभव साझा करने का मंच प्रदान किया, बल्कि यह दिखाया कि होम्योपैथी में वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और समग्र दृष्टिकोण के जरिए किस प्रकार गंभीर रोगों में प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है।

डॉ. अर्पित चोपड़ा जैन की प्रस्तुति ने यह स्पष्ट किया कि होम्योपैथी अब केवल वैकल्पिक चिकित्सा नहीं रही, बल्कि यह भारत और विश्व के स्वास्थ्य परिदृश्य में एक सुरक्षित, सशक्त और प्रभावशाली विकल्प के रूप में उभर रही है। उनके प्रयास और अनुभव आने वाले समय में होम्योपैथी को वैज्ञानिक, सामाजिक और वैश्विक दृष्टि से नई पहचान दिलाएंगे।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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