जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान: 3 श्राविकाओं को शील्ड से सम्मानित किया जाएगा
सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) – जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान एक ऐसा प्रतिष्ठित और व्यापक पहल है, जिसने न केवल जैन धर्म के अनुयायियों में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाई है, बल्कि माँ जिनवाणी की सेवा और संरक्षण को भी अत्यंत संगठित रूप दिया है। इस अभियान के माध्यम से देश और विदेश के विभिन्न दिग० जिनालयों, तीर्थ क्षेत्रों और अतिशय क्षेत्रों में माँ जिनवाणी की सुरक्षा, सज्जा और व्यवस्थित रखरखाव के कार्य बड़े पैमाने पर किए जा रहे हैं।
इस अभियान में अब तक 4000 से अधिक सयोजिकाओं और संयोजकों को सम्मिलित किया जा चुका है। ये सभी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, जहाँ वे मंदिरों, तीर्थ क्षेत्रों और अतिशय क्षेत्रों में माँ जिनवाणी की सुशोभित और सुरक्षित स्थिति सुनिश्चित कर रहे हैं। उनका योगदान केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि यह समाज में नैतिक मूल्यों, सेवा भाव और आत्मीयता को बढ़ावा देने वाला कार्य भी है।
अभियान का उद्देश्य और महत्व
जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान का मुख्य उद्देश्य माँ जिनवाणी की सेवा और संरक्षण को एक संगठित रूप में लाना है। यह अभियान न केवल जैन अनुयायियों को सक्रिय बनाता है, बल्कि समाज के सभी वर्गों में सेवा भाव और धार्मिक अनुशासन की भावना भी फैलाता है।
अभियान का एक प्रमुख लक्ष्य यह है कि प्रत्येक दिग० जिनालय, तीर्थ क्षेत्र या अतिशय क्षेत्र में माँ जिनवाणी सुरक्षित, व्यवस्थित और सुसज्जित रहे। इसके लिए सयोजिकाएं और संयोजक अपनी व्यक्तिगत क्षमता और समय का समर्पण कर पुण्य अर्जित करते हैं। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों की स्थापना में भी योगदान देता है।
अभियान का विस्तार
जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान ने वर्तमान में 288 श्री दिग० जैन सिद्ध क्षेत्र, तीर्थ क्षेत्र और अतिशय क्षेत्र तथा 24 प्रदेशों के दिग० जिनालयों को शामिल किया है। वर्ष 2025 में इस अभियान में 439 नई संयोजिकाएं मनोनीत की गईं, जिनमें विभिन्न क्षेत्रों की श्राविकाओं और संयोजिकाओं ने सक्रिय भागीदारी दी।
इन संयोजिकाओं ने न केवल अपने दिग० जिनालयों में माँ जिनवाणी की सुरक्षा और सज्जा सुनिश्चित की, बल्कि नए संयोजिकाओं को जोड़कर अभियान का विस्तार भी किया। यह दर्शाता है कि अभियान न केवल स्थिर है, बल्कि निरंतर विकासशील और प्रेरक है।
विजेता संयोजिकाएं
वर्ष 2025 में सबसे अधिक संयोजिकाएं बनाने वाली प्रथम विजेता म. प्र. की क्षेत्रीय संयोजिका श्रीमती संगीता सिंघई, सिहोरा, जबलपुर रही। उन्होंने कुल 79 संयोजिकाओं को अभियान में जोड़कर माँ जिनवाणी की सेवा में उत्कृष्ट योगदान दिया। उनकी सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व क्षमता ने अन्य संयोजिकाओं को प्रेरित किया।

द्वितीय विजेता म. प्र. दमोह की मुख्य संयोजिका श्रीमती मीना जैन सेठ, पटेरा रही। उन्होंने 59 संयोजिकाओं के समन्वय का कार्य किया और उन्हें अभियान से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तृतीय विजेता म. प्र. छतरपुर की मुख्य संयोजिका श्रीमती शोभा जैन रही, जिन्होंने 47 संयोजिकाओं को अभियान में शामिल किया। इन तीनों संयोजिकाओं के योगदान से यह अभियान न केवल मजबूत हुआ, बल्कि व्यापक स्तर पर माँ जिनवाणी की सेवा का संदेश फैलाने में भी मदद मिली।

सम्मान समारोह और पुरस्कार
इन तीनों विजेताओं को “श्रुत पंचमी” पर्व पर आयोजित अखिल भारतीय जिनवाणी सज्जा प्रतियोगिता में सम्मानित किया जाएगा। इस प्रतियोगिता में कुल 15 विजेता बहनों को भी पुरस्कार और शील्ड प्रदान किया जाएगा।
सम्मान समारोह का आयोजन भूषण स्वरूप मुकेश कुमार जैन चैरिटेबल ट्रस्ट, मेरठ के सौजन्य से किया जाएगा। इस अवसर पर विजेताओं को शील्ड प्रदान कर उनके अतुलनीय योगदान की सराहना की जाएगी। साथ ही वर्ष 2025 में अभियान में योगदान देने वाली 102 अन्य संयोजिकाओं को भी उनके सहयोग और सेवा के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।
यह पुरस्कार और सम्मान उन सभी पुण्यात्माओं के लिए हैं जिन्होंने माँ जिनवाणी की सेवा में निरंतर सक्रिय योगदान दिया और इस अभियान को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
अभियान का सामाजिक और धार्मिक महत्व
जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान का महत्व केवल धार्मिक या आध्यात्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह समाज में सेवा भावना, सहयोग, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को भी बढ़ावा देता है। जब संयोजिकाएं और सयोजक माँ जिनवाणी की सेवा में अपने समय और ऊर्जा का समर्पण करते हैं, तो इससे समाज में सेवा भाव की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।
अभियान का यह पहलू इसे विशेष बनाता है। यहाँ न केवल मंदिर और तीर्थ क्षेत्र सुरक्षित और व्यवस्थित रहते हैं, बल्कि लोगों में समाज के प्रति जिम्मेदारी, संगठन क्षमता और नेतृत्व की भावना भी विकसित होती है। यह अभियान युवाओं और महिलाओं को सक्रिय रूप से शामिल करने के लिए प्रेरित करता है और उन्हें अपने धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूक बनाता है।
आगे की दिशा और आह्वान
डा० रेणु जैन, संस्थापिका जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान, ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे माँ जिनवाणी के सेवा कार्य में सहयोग करें। इच्छुक व्यक्ति अभियान में संयोजिका बनकर अथवा बनवाकर अन्य दिग० जिनालयों और क्षेत्रों को अभियान में जोड़ सकते हैं और सातिशय पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
संस्थापिका ने यह भी कहा कि यदि सभी का सहयोग इसी प्रकार बना रहा, तो जल्द ही भारत और विदेश के प्रत्येक दिग० जिनालय में यह अभियान प्रभावी रूप से संचालित होगा। परिणामस्वरूप माँ जिनवाणी हर स्थान पर सुरक्षित, सज्जित और व्यवस्थित दिखाई देंगी। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज और संस्कृति की स्थिरता और प्रसार के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
अभियान की सफलता और प्रभाव
जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान की सफलता यह दर्शाती है कि संगठित प्रयास और सामूहिक सेवा से जैन धर्म की गरिमा, धार्मिक जागरूकता और आध्यात्मिक अनुशासन का व्यापक प्रसार संभव है। यह अभियान केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग, समर्पण और मानवता के मूल्यों को भी प्रोत्साहित करता है।
इस अभियान के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि जब समाज के प्रत्येक स्तर पर श्रद्धालु और संयोजक सक्रिय रूप से योगदान देते हैं, तो कोई भी धार्मिक या आध्यात्मिक पहल असंभव नहीं रहती। अभियान के विस्तार से यह भी पता चलता है कि भारत के बाहर भी जैन धर्म और संस्कृति को फैलाया जा सकता है, और माँ जिनवाणी की सेवा वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित और सम्मानित बन सकती है।

संपर्क विवरण
- संस्था: जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश
- मोबाइल नंबर: 7060164200
इस प्रकार, जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान न केवल माँ जिनवाणी की सेवा और संरक्षण का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में धर्म, संस्कृति और सेवा के मूल्य स्थापित करने वाला एक प्रेरक मंच भी है। यदि हर श्रद्धालु इस अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग करता रहे, तो आने वाले समय में प्रत्येक दिग० जिनालय और तीर्थ क्षेत्र इस अभियान में सम्मिलित होगा, और माँ जिनवाणी की सुरक्षा, सज्जा और व्यवस्थित रूप से स्थापना सुनिश्चित की जाएगी।
