झकनावदा भगोरिया हाट में BJP और कांग्रेस ने निकाली गैर, मांदल की थाप पर झूम उठा अंचल
झकनावदा – मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल में हर वर्ष मनाया जाने वाला प्रसिद्ध भगोरिया पर्व इस बार झकनावदा हाट में धूमधाम से मनाया गया। पर्व का उत्साह पूरे बाजार में देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-मांदल की गूंज और लोकनृत्य के साथ-साथ राजनीतिक दलों ने भी इस बार अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) दोनों दलों ने विशाल गैर निकालकर जन समर्थन का प्रदर्शन किया।
भगोरिया पर्व में केवल पारंपरिक और धार्मिक महत्व नहीं है, बल्कि यह आदिवासी संस्कृति, प्रेम और सामाजिक समरसता का प्रतीक भी माना जाता है। इस वर्ष का आयोजन इस बात का प्रमाण रहा कि युवाओं में लोक संस्कृति के प्रति जागरूकता और उत्साह दिन-ब-दिन बढ़ रहा है।
BJP की विशाल गैर और उत्साह
भाजपा मंडल अध्यक्ष जितेन्द्र राठौड़ के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने भगोरिया हाट में पारंपरिक गैर निकाली। ढोल-मांदल की थाप पर कार्यकर्ता और ग्रामीण जमकर थिरके। साफा और पारंपरिक परिधानों में युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।
गैर पूरे हाट बाजार से होकर मुख्य मार्गों तक गई, और लोगों ने उत्साह के साथ इसे देखा। अज्जा मोर्चा के प्रदेश कार्य समिति सदस्य अजमेरसिंह भूरिया मांदल बजाते हुए जुलूस के आगे-आगे चल रहे थे। मंडल अध्यक्ष जितेन्द्र राठौड़, जिला पंचायत सदस्य अन्नू भूरिया, जनपद उपाध्यक्ष देवकुंवर पड़ियार, कालूसिंह चौहान, बाथू वास्केल आदि ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ नृत्य करते हुए जुलूस को आगे बढ़ाया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और ग्रामीणजन उपस्थित रहे। कार्यकर्ताओं ने न सिर्फ स्थानीय बल्कि आसपास के गांवों से आए लोगों को भी अपने साथ जोड़कर उत्सव को और भव्य बनाया।
कांग्रेस की गैर में उमड़ा जनसैलाब
वहीं वालसिंह मेड़ा (पूर्व विधायक) के नेतृत्व में कांग्रेस की ओर से भी भव्य गैर निकाली गई। बड़ी संख्या में आदिवासी समाजजन पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और मांदल की थाप पर युवाओं ने गोल घेरा बनाकर नृत्य किया।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे जन समर्थन का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह पारंपरिक आयोजन राजनीतिक संवाद और सामाजिक सहभागिता का भी माध्यम बन गया है। जुलूस के दौरान हाथों में पारंपरिक झंडे और तख्तियां दिखती थीं, जिन पर सामाजिक संदेश और आदिवासी सांस्कृतिक प्रतीक अंकित थे।

बालकों और युवाओं का उत्साह
इस पर्व में नन्हे बच्चों ने भी भाग लिया और क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद जैसे प्रतीकात्मक पात्रों का किरदार निभाया। बच्चों ने रंग-बिरंगे परिधान पहनकर अपने माता-पिता और समाज के बुजुर्गों के साथ मिलकर लोक नृत्य किया। युवाओं ने आधुनिक और पारंपरिक संगीत का मिश्रण करते हुए नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे पूरे हाट में उत्साह का वातावरण बना रहा।
मासिक कार्यक्रम और जुलूस के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि संस्कृति केवल संरक्षण की वस्तु नहीं है, बल्कि युवाओं में उत्साह और देशभक्ति की भावना जगाने का जरिया भी है।
लोक संस्कृति और परंपरा का संगम
भगोरिया हाट में झूले-चकरी, पारंपरिक आभूषण, रंग-बिरंगी पिचकारियां और ग्रामीण उत्पादों की दुकानों पर दिनभर भीड़ रही। युवा वर्ग ने पारंपरिक तरीके से गुलाल लगाकर एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं।
स्थानीय दुकानदारों और हस्तशिल्प कलाकारों ने भी इस अवसर का भरपूर लाभ उठाया। पूरे हाट में आदिवासी लोक संस्कृति, नृत्य और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। लोग अपने परिवार के साथ हाट आए और बच्चों ने पारंपरिक खेलों में हिस्सा लिया।
प्रशासन की सतर्कता
भगोरिया हाट में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति को देखते हुए पुलिस और स्थानीय प्रशासन भी सतर्क नजर आए। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। यातायात और भीड़-भाड़ के प्रबंधन के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया था।
इस प्रकार प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि पर्व का आनंद सभी लोग सुरक्षित रूप से ले सकें।
राजनीतिक रंग और सामाजिक एकता
इस वर्ष के भगोरिया हाट में राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी ने उत्सव में एक नया आयाम जोड़ा। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ पारंपरिक नृत्य और संगीत के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
हालांकि, मुख्य आकर्षण मांदल की थाप और लोक उल्लास ही रही। राजनीतिक गतिविधियों के बीच भी जनता ने लोक संस्कृति और परंपरा को सर्वोपरि रखा। इस पर्व ने यह संदेश दिया कि सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव राजनीतिक मतभेदों से परे एकता और भाईचारे को बढ़ावा दे सकते हैं।

पर्व का संदेश
भगोरिया पर्व केवल एक मेला नहीं है, बल्कि यह आदिवासी संस्कृति, प्रेम, और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। झकनावदा हाट में मनाए गए इस वर्ष के पर्व ने युवाओं में राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक जागरूकता और लोक परंपरा के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत किया।
युवाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की सहभागिता ने यह साबित कर दिया कि सांस्कृतिक उत्सव केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा और समाजिक संदेश का माध्यम भी हैं।
इस आयोजन में नगरवासियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और बच्चों को बिस्किट पैकेट वितरित किए गए। इससे बच्चों में लोक उत्सव के प्रति आकर्षण और प्रेम बढ़ा।
निष्कर्ष
झकनावदा भगोरिया हाट में आयोजित इस भव्य गैर और पर्व ने दिखाया कि लोक संस्कृति, युवा ऊर्जा और राजनीतिक सहभागिता का संगम कैसे समाज में भाईचारे और सामाजिक एकता को मजबूत करता है।
इस साल के भगोरिया हाट ने यह भी संदेश दिया कि आधुनिक जीवन और राजनीतिक गतिविधियों के बीच भी पारंपरिक उत्सवों का महत्व कम नहीं हुआ है। युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने मिलकर पर्व को सफल बनाया और आदिवासी संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन किया।
यह आयोजन आने वाले वर्षों में भी युवाओं में उत्साह और राष्ट्रीय चेतना जगाने का माध्यम बनेगा।
