Ujjain Mahakal Temple: होली पर रंग-गुलाल पूरी तरह प्रतिबंधित, मंदिर प्रशासन ने जारी किए सख्त नियम
Ujjain , मध्य प्रदेश, 28 फरवरी 2026: मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर और महाकाल लोक में 2 और 3 मार्च, 2026 को होने वाले होली उत्सव के दौरान रंग और गुलाल का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। मंदिर प्रशासन ने परंपरा और धार्मिक गरिमा बनाए रखने के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं।
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गर्भगृह, नंदी मंडप, गणेश मंडप, कार्तिकेय मंडप सहित पूरे मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार का रंग, गुलाल या रंग फैलाने वाले यंत्र ले जाना या उनका उपयोग करना सख्त मना है। यह नियम केवल भक्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि पुजारी, पुरोहित, प्रशासनिक कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी, सफाई कर्मचारी और आउटसोर्स स्टाफ सभी पर लागू होगा। किसी को भी रंग लेकर मंदिर परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी, और एक-दूसरे पर रंग लगाने पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
सुरक्षा और निगरानी के कड़े इंतजाम
मंदिर प्रशासन ने होली के दौरान सभी प्रवेश द्वारों पर सघन सुरक्षा व्यवस्था की है। भक्तों की जांच के लिए सिक्योरिटी और निरीक्षक तैनात रहेंगे। इसके अतिरिक्त, CCTV कैमरों के माध्यम से पूरे मंदिर परिसर और गेटों पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी।
मंदिर में काम करने वाले कर्मचारियों और सेवकों का सामान भी केवल प्रवेश से पहले चेक किया जाएगा, ताकि कोई भी रंगीन पाउडर या उपकरण मंदिर परिसर में न लाया जा सके। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा नियमों का पालन सभी कर्मचारियों, पुजारियों और सेवकों के लिए अनिवार्य होगा।
हर्बल गुलाल का प्रयोग
परंपरा के अनुसार, भगवान महाकाल की त्रिकाल आरती के दौरान हर आरती में केवल एक किलो हर्बल गुलाल का सांकेतिक प्रयोग किया जाएगा। यह हर्बल गुलाल मंदिर की भंडार शाखा द्वारा भस्म आरती पुजारी, शयन आरती पुजारी और सरकारी पुजारी को प्रदान किया जाएगा।
मंदिर प्रशासन ने भक्तों से अपील की है कि वे मंदिर और महाकाल समाज की गरिमा बनाए रखते हुए, खुशी और सौहार्द के माहौल में होली का उत्सव मनाएं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धार्मिक परंपराओं का उल्लंघन न हो और भक्तिमय वातावरण बना रहे।
उल्लंघन पर कार्रवाई
मंदिर प्रशासन ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें भक्तों के साथ-साथ सभी कर्मचारियों और स्टाफ को भी शामिल किया जाएगा। यह कदम मंदिर परिसर में सुरक्षा और धार्मिक गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
मंदिर परिसर में नियमों का महत्व
उज्जैन महाकाल मंदिर में रंग और गुलाल का प्रतिबंध केवल भौतिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है। इसका महत्व धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि धार्मिक स्थलों पर अनुशासन और नियमों का पालन करने से न केवल धार्मिक अनुशासन बनाए रहता है बल्कि भक्तों के लिए सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण भी सुनिश्चित होता है।
मंदिर में रंगों का प्रतिबंध रखने से भक्त केवल भक्ति और श्रद्धा के माध्यम से होली का अनुभव करेंगे। इस साल होली पर रंग और गुलाल का प्रयोग रोकने का उद्देश्य धार्मिक गरिमा, भक्तिमय वातावरण और मंदिर की पवित्रता बनाए रखना है।
भक्तों और समाज के लिए संदेश
मंदिर प्रशासन ने जोर देकर कहा कि होली का उत्सव खुशी, उल्लास और भाईचारे का प्रतीक है, लेकिन धार्मिक स्थल पर रंगों का प्रयोग प्रतिबंधित रहना चाहिए। भक्तों से अपील की गई है कि वे शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में होली मनाएं।
साथ ही प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि परंपरा का पालन और नियमों का सम्मान मंदिर और समाज दोनों के लिए लाभकारी होगा। उल्लंघन करने पर नियमों के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
इस तरह, उज्जैन के महाकाल मंदिर में होली का पर्व भक्तिमय, शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से मनाया जाएगा। इस बार केवल हर्बल गुलाल का सीमित प्रयोग होगा, और सभी सुरक्षा और अनुशासन संबंधी निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। यह कदम न केवल मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए है, बल्कि भक्तों और समाज के लिए सुरक्षा और अनुशासन का संदेश भी है।
