24 घंटे में दरक गई 8 लाख की सड़क, ठेकेदार को नोटिस
Jabalpur : मध्य प्रदेश के जबलपुर से निर्माण कार्य में लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां गुजराती कॉलोनी के पास लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा बनाई गई नई कंक्रीट सड़क 24 घंटे भी नहीं टिक पाई। सड़क में दरारें आने के बाद विभाग ने खुद जेसीबी से उसे तुड़वा दिया और संबंधित ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
80 मीटर सड़क पर खर्च हुए 8 लाख रुपये
मामला जबलपुर के गढ़ा इलाके का है, जहां गुजराती कॉलोनी के पास करीब 80 मीटर लंबी सीमेंट कंक्रीट सड़क बनाई गई थी। इस निर्माण पर लगभग 8 लाख रुपये खर्च किए गए थे। सड़क का निर्माण हाल ही में पूरा हुआ था, लेकिन अगले ही दिन उसमें दरारें दिखाई देने लगीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे इंतजार के बाद क्षेत्र में सड़क निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन गुणवत्ता का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा गया।
24 घंटे में ही पड़ गईं दरारें
निर्माण के 24 घंटे के भीतर ही सड़क के एक हिस्से में दरारें उभर आईं। जब विभागीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो उन्हें निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही और घटिया सामग्री के उपयोग का अंदेशा हुआ।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि कंक्रीट ठीक से जमी ही नहीं थी। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार सड़क निर्माण के दौरान वायब्रेटर मशीन का उपयोग नहीं किया गया, जिससे कंक्रीट की परत ठीक से सघन नहीं हो सकी।
जेसीबी से तोड़ी गई नई सड़क
गुणवत्ता में कमी पाए जाने के बाद विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जेसीबी बुलाकर नई बनी सड़क को तुड़वा दिया। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि दोबारा सही तरीके से निर्माण कराया जा सके।
इंजीनियरों की शुरुआती रिपोर्ट में काम को बेहद निम्न स्तर का बताया गया है। इसके बाद संबंधित ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और दोबारा निर्माण के निर्देश दिए गए हैं।
ठेकेदार कंपनी पर सवाल
जानकारी के मुताबिक 80 मीटर लंबी इस सड़क का ठेका रीवा की आराध्य कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया था। आरोप है कि कंपनी ने बिना वायब्रेटर चलाए सड़क की ढलाई कर दी, जो तकनीकी मानकों का उल्लंघन है।
अब विभाग की ओर से कंपनी से जवाब मांगा गया है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई।
मंत्री के विधानसभा क्षेत्र का मामला
दिलचस्प बात यह है कि यह इलाका मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की विधानसभा क्षेत्र में आता है। ऐसे में इस मामले ने राजनीतिक हलकों में भी चर्चा छेड़ दी है।
विपक्ष और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब मंत्री के क्षेत्र में ही निर्माण की यह स्थिति है, तो अन्य क्षेत्रों में क्या हाल होगा।
अन्य सड़कों पर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि क्षेत्र में बन रही अन्य सड़कों में भी कहीं इसी तरह की घटिया सामग्री का उपयोग तो नहीं किया गया। यदि ऐसा है, तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी है बल्कि जनता की सुरक्षा से भी खिलवाड़ है।
विभाग की सफाई
लोक निर्माण विभाग का कहना है कि मामले में तुरंत संज्ञान लिया गया और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार सड़क को दोबारा गुणवत्ता मानकों के अनुसार बनाया जाएगा और भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी।
निष्कर्ष
जबलपुर में 8 लाख रुपये की लागत से बनी सड़क का 24 घंटे में ही दरक जाना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि विभाग ने तुरंत कार्रवाई कर सड़क को तुड़वाकर दोबारा निर्माण के निर्देश दिए हैं, लेकिन यह घटना सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर करती है।
अब देखना होगा कि ठेकेदार पर क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसे मामलों पर सख्त निगरानी सुनिश्चित की जाती है।
