Indore : SMA टाइप‑2 से ग्रसित 3 साल 2 महीने की अनिका शर्मा का इलाज अंतिम चरण में
अनिका का वजन इलाज के लिए निर्णायक बाधा
SMA टाइप‑2 बीमारी से ग्रसित 3 साल 2 महीने की मासूम अनिका शर्मा के लिए अब केवल आखिरी मौका बचा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर अनिका का वजन 13.5 किलो हो जाता है तो उसे जरूरी महंगी दवा लगाना मुश्किल हो जाएगा। वर्तमान में उसका वजन केवल 10.5 किलो है और इसी वजह से माता‑पिता ने उसे डाइट पर रखा है। पिछले तीन महीनों से अनिका को सामान्य भोजन नहीं दिया जा रहा ताकि उसका वजन 13.5 किलो से ऊपर न बढ़े।
खास डाइट और दिनचर्या
माँ सरिता शर्मा ने बताया कि अनिका को दिनभर विशेष प्रकार का आहार दिया जाता है। सुबह उठते ही दवा देने से पहले पपीता खिलाया जाता है। इसके बाद भुने मखाने, बादाम, अखरोट और थोड़ी खांड से तैयार पाउडर को दूध में मिलाकर हलवा बनाया जाता है। दिन में चुनिंदा फल और जूस दिए जाते हैं। शाम को चाय‑बिस्किट और रात में वही हलवा दिया जाता है। रोटी, चावल, दाल‑सब्जी जैसी चीज़ें नहीं दी जातीं, ताकि वजन नियंत्रण में रहे।
माता‑पिता का संघर्ष और बलिदान
अनिका के माता‑पिता इस समय हर संभव प्रयास कर रहे हैं। माँ ने बताया कि उन्होंने अपनी चप्पल पहनना भी छोड़ दिया है ताकि हर संसाधन और ऊर्जा अपने बच्चे के लिए बचा सकें। अनिका अपने आप से उठ‑बैठ नहीं सकती और सहारे के बिना चल नहीं सकती। सांस लेने में भी उसे दिक्कत होती है, खासकर बाहर जाने पर। इस वजह से कई बार वह क्राउड फंडिंग कार्यक्रमों में भी नहीं जा पाती।
क्राउड फंडिंग और आर्थिक चुनौती
अनिका के इलाज के लिए आवश्यक इंजेक्शन की कीमत लगभग 9 करोड़ रुपये है। इस समय परिवार ने क्राउड फंडिंग, दान और सरकारी सहयोग से 5 करोड़ 60 लाख रुपये जुटा लिए हैं। दिल्ली AIIMS से 50 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं और भाजपा नेता जे.पी. नड्डा के माध्यम से भी सहयोग मिला है। अभी 3 करोड़ 40 लाख रुपये और चाहिए।
Indore स्थान‑स्थान पर अभियान
पिता प्रवीण शर्मा ने बताया कि वे नवंबर महीने से लगातार शहरों और कस्बों में जाकर क्राउड फंडिंग अभियान चला रहे हैं। इंदौर, रतलाम, बदनावर, बड़नगर में कैंप लगाए गए हैं। अब खंडवा और उज्जैन में भी अभियान चलाने की तैयारी है। जहाँ‑जहाँ संभव हुआ, उन्होंने लोगों से सहयोग की अपील की।
अनिका की बीमारी और चुनौतियां
SMA टाइप‑2 एक दुर्लभ न्यूरोमस्कुलर बीमारी है जिसमें नसें कमजोर होकर मांसपेशियों को प्रभावित करती हैं। अनिका खुद से उठ‑बैठ नहीं सकती, सहारे के बिना चल नहीं सकती और सांस लेने में भी परेशानी होती है। माता‑पिता घर में ही विशेष मशीन के माध्यम से उसका वजन और स्वास्थ्य लगातार मॉनिटर करते रहते हैं।
बच्ची की मानसिक और भावनात्मक स्थिति
रोज़ाना सीमित भोजन करने के कारण अनिका कई बार भूखी रहती है। वह वही चीज़ चाहती है जो उसे दिया नहीं जा सकता और रोने लगती है। माता‑पिता उसे समझाने की कोशिश करते हैं, लेकिन स्वाभाविक रूप से बच्ची परेशान रहती है। यह परिवार केवल आर्थिक संघर्ष ही नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक कठिनाइयों का भी सामना कर रहा है।
आखिरी गुहार: जनता से सहयोग
माता‑पिता की अपील है कि जनता थोड़े और सहयोग करें ताकि अनिका का इलाज समय पर हो सके। अगर बाकी 3 करोड़ 40 लाख रुपये जुटाए जा सकते हैं तो बच्ची को महंगी दवा—9 करोड़ रुपये की इंजेक्शन—लगाई जा सकेगी। यही अनिका के जीवन की आखिरी उम्मीद है।
निष्कर्ष
अनिका के माता‑पिता दिन‑रात संघर्ष कर रहे हैं। उनकी दृढ़ता और जनता के सहयोग से ही अब बच्ची का जीवन बच सकता है। अनिका के इलाज की समयसीमा और वजन पर आधारित आवश्यकताएं इसे और भी चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।
