नई आबकारी नीति 2026 के तहत 3500 शराब दुकानों के ठेके तीन चरणों में दिए जाएंगे। जानें ई-टेंडर प्रक्रिया, रिजर्व प्राइस, समयसीमा और नियमों में बड़ा बदलाव।
नई आबकारी नीति 2026: 3500 शराब दुकानों के ठेके 3 चरणों में, बड़ा बदलाव लागू
नई आबकारी नीति क्या है?
नई आबकारी नीति 2026 के तहत राज्य सरकार ने शराब दुकानों की व्यवस्था को पूरी तरह से ई-टेंडर आधारित कर दिया है। अब दुकानों का आवंटन 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक के लिए किया जाएगा।इस नीति का संचालन मध्य प्रदेश आबकारी विभाग द्वारा किया जा रहा है।
3500 शराब दुकानों का आवंटन कैसे होगा?
इस वर्ष लगभग 3500 दुकानों के ठेके तीन चरणों में दिए जाएंगे:
- पहला चरण: 27 फरवरी – 1 मार्च
- दूसरा चरण: 3 – 5 मार्च
- तीसरा चरण: 6 – 7 मार्च
2 मार्च को दोपहर 2 बजे पहले चरण के ई-टेंडर खोले जाएंगे और उसी दिन शाम तक आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
ई-टेंडर प्रक्रिया कैसे काम करेगी?
एमपी नई आबकारी नीति 2026 में पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी:
- टेंडर डाउनलोड
- ऑफर सबमिशन
- ऑनलाइन बोली
- स्वचालित चयन
जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी।
रिजर्व प्राइस में 20% बढ़ोतरी
इस बार सरकार ने रिजर्व प्राइस को पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत बढ़ा दिया है।
सरकार का मानना है कि:
- इससे राज्य का राजस्व बढ़ेगा
- प्रतिस्पर्धी बोली लगेगी
- बाजार मूल्य के अनुरूप लाइसेंस जारी होंगे
कंपोजिट दुकान व्यवस्था क्या है?
नई व्यवस्था के अनुसार:
- वाइन शॉप और एयरपोर्ट काउंटर को छोड़कर
- बाकी सभी दुकानें कंपोजिट होंगी
- यानी एक ही दुकान से देशी और विदेशी दोनों शराब की बिक्री होगी
साथ ही, किसी भी दुकान पर बैठकर शराब पीने की अनुमति नहीं होगी।
जिला स्तर पर निगरानी
जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला निष्पादन समिति गठित की गई है। यह समिति:
- ई-टेंडर प्रक्रिया की निगरानी करेगी
- पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी
- शिकायतों का समाधान करेगी
भोपाल में प्रशासनिक निगरानी को लेकर पहले भी सख्ती देखी गई है।भोपाल प्रशासन इस नीति को मॉडल के रूप में लागू कर रहा है।
सरकार का उद्देश्य
एमपी नई आबकारी नीति 2026 के पीछे सरकार के मुख्य उद्देश्य:
- पारदर्शिता
- डिजिटल प्रक्रिया
- राजस्व वृद्धि
- अवैध शराब पर नियंत्रण
- लाइसेंसिंग सिस्टम में सुधार
राज्य की आर्थिक नीतियों में सुधार की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
राजस्व पर संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार:
- 20% रिजर्व प्राइस वृद्धि से हजारों करोड़ का अतिरिक्त राजस्व
- प्रतिस्पर्धी बोली से लाइसेंस का वास्तविक बाजार मूल्य
- अवैध कारोबार पर अंकुश
राजस्व से राज्य की विकास योजनाओं को मजबूती मिलेगी, खासकर शहरी क्षेत्रों जैसे इंदौर और ग्वालियर में।
जनता और व्यापारियों की प्रतिक्रिया
व्यापारी वर्ग का मानना है कि:
- रिजर्व प्राइस बढ़ने से लागत बढ़ेगी
- प्रतिस्पर्धा कड़ी होगी
वहीं सरकार का दावा है कि:
- व्यवस्था पारदर्शी बनेगी
- मनमानी बंद होगी
क्या बदल जाएगा?
नई नीति लागू होने के बाद: शराब दुकानों पर बैठकर पीना बंद
कंपोजिट दुकान मॉडल
पूर्ण डिजिटल टेंडर
जिला निगरानी
बढ़ा हुआ रिजर्व प्राइस
निष्कर्ष
एमपी नई आबकारी नीति 2026 राज्य में शराब वितरण व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। 3500 दुकानों के तीन चरणों में होने वाले आवंटन से प्रशासनिक सख्ती और राजस्व वृद्धि दोनों की उम्मीद है।अब देखना होगा कि यह नीति जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है।
