इंदौर–उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बना रहेगा ग्राउंडेड, CM मोहन यादव ने किसानों की मांगों पर लिया बड़ा फैसला
भोपाल। इंदौर और उज्जैन के बीच प्रस्तावित ग्रीनफील्ड कॉरिडोर परियोजना को लेकर किसानों द्वारा किया गया जोरदार विरोध और मांगों के चलते CM डॉ. मोहन यादव ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला लिया है। ग्रीनफील्ड फोर-लेन सड़क को अब एलिवेटेड (ऊँचे स्तर पर नहीं) बल्कि ग्राउंडेड (जमीनी स्तर पर) ही बनाया जाएगा। इससे प्रभावित किसानों की मुख्य मांग पूरी होती है और स्थानीय लोगों के চলने‑फिरने तथा कृषि भूमि पर दिए जाने वाले मुआवजे को लेकर चल रहे विरोध‑प्रदर्शन को शांत करने में भी मदद मिलेगी।
CM यादव ने यह स्पष्ट किया कि सड़क परियोजना के निर्माण के दौरान किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा जाएगा और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा भी दिया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब उज्जैन व इंदौर के लगभग 90 गांवों के किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ विरोध प्रदर्शन किया था, जिससे प्रशासन और सरकार पर गंभीर दबाव बन गया था।
किसानों की मुख्य चिंताएँ और मांगें
बुधवार को बड़ी संख्या में किसान उज्जैन में इकट्ठे हुए और उन्होंने ट्रैक्टरों के साथ ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के विरोध में अपनी बात रखी। किसानों का कहना था कि प्रस्तावित सड़क एलिवेटेड (ऊँची) रूप में बनने से उनके कृषि भूमि को खतरा होगा और पारंपरिक कृषि कार्यों में बाधा उत्पन्न होगी। किसानों ने दो प्रमुख मांगें रखीं:
- ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को सामान्य हाईवे / ग्राउंडेड लेवल पर बनाया जाए, न कि ऊँचाई पर।
- प्रभावित किसानों को बाजार मूल्य के अनुरूप उचित मुआवजा दिया जाए।
किसानों का यह भी तर्क था कि यदि सड़क ऊँची बनती है, तो यह उनकी भूमि को सीधे प्रभावित करेगी और वर्षा व सिंचाई जैसी आवश्यक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी भी दी थी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे अनिश्चितकालीन धरने और आंदोलन पर उतरेंगे।
सरकारी प्रतिक्रिया और मुख्यमंत्री से किसानों की बैठक
उज्जैन में किसानों के विरोध के बाद प्रशासनिक स्तर पर तुरंत प्रतिक्रिया दी गई। जिला कलेक्टर ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को शासन स्तर तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद किसानों के प्रतिनिधि समूह ने शाम को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की और अपनी चिंताओं तथा मांगों को प्रत्यक्ष रूप से मुख्यमंत्री के सामने रखा।
CM ने किसानों की बात को गंभीरता से सुना और विस्तृत विचार‑विमर्श के बाद यह निर्णय लिया कि इंदौर–उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को जमीनी स्तर (ग्राउंडेड) पर ही बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसानों के हितों और सार्वजनिक भलाई को ध्यान में रखकर लिया गया है।
परियोजना की वर्तमान स्थिति और महत्व
CM डॉ. मोहन यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPSVN) द्वारा इस परियोजना की लागत लगभग 2935.15 करोड़ रुपये आंकी गई है और इसका निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। यह फोर‑लेन सड़क दो प्रमुख शहर इंदौर और उज्जैन को जोड़ते हुए कई ग्रामीण और शहरी इलाकों के लिए जीवन‑पयोगी साबित होगी।
CM ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। सड़क निर्माण के साथ ही इंदौर–उज्जैन के मध्य दो मुख्य स्थानों पर वेस्टर्न रिंग रोड और उज्जैन‑बादनावर मार्ग क्रॉसिंग पर बड़े जंक्शनों का निर्माण भी किया जाएगा। इससे परिवहन सुविधाओं में सुधार होगा और आने‑जाने वाली आवाजाही अधिक सुरक्षित व सहज बनेगी।
CM ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना की गति नहीं रुकेगी और सभी आवश्यक प्रक्रियाएँ समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएँगी।
विकास, सुरक्षा और स्थानीय लोगों को लाभ
CM ने यह भी कहा कि पुराने इंदौर‑उज्जैन मार्ग से आवागमन के दौरान दुर्घटनाओं की संख्या काफी अधिक थी। यह मुख्यतः छोटे मार्ग और लगातार बढ़ती वाहन संख्या के कारण होता था जिससे दुर्घटनाएँ बढ़ जाती थीं। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनने के बाद इन दुर्घटनाओं की श्रृंखला में कमी आएगी और सुरक्षा बेहतर होगी।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल तेज़ और सुरक्षित आवागमन को बढ़ावा देगी बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों को भी गति देगी, साथ ही आगामी सिंहस्थ सम्मेलन (महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन) के दृष्टिगत भी यह मार्ग आम जनता को सुविधा प्रदान करेगा।
किसानों की प्रतिक्रिया और आगे की उम्मीदें
किसानों का कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा लिया गया यह निर्णय उनके हितों की रक्षा करता है तथा सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि मुआवजे और सड़क निर्माण के दौरान उनके कृषि कार्यों व भूमि के उचित संरक्षण से संबंधित आश्वासन मिलने से वे अब आंदोलन की स्थिति से हट गए हैं।
CM ने किसानों से भी सहयोग की अपील की है ताकि यह परियोजना समय पर और बिना किसी बड़े व्यवधान के पूरी हो सके।
