Indore Contaminated Water Tragedy: भागीरथपुरा में दूषित पानी से एक और मौत, बेटी ने जताया आक्रोश
Indore के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की वजह से अब तक हो रही मौतों का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा। हाल ही में इस इलाके में रहने वाले 58 वर्षीय रामनरेश यादव की मृत्यु हो गई। उनके परिवार का आरोप है कि उनके पिता की मौत दूषित पानी पीने की वजह से हुई। वहीं, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मरीज लिवर सिरोसिस से पीड़ित थे और उनकी मौत इसी कारण हुई। इस घटना के बाद भागीरथपुरा में पानी की समस्या और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
दूषित जलकांड की बढ़ती मृत्युएँ
भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण अब तक 36 लोगों की मौत हो चुकी है। रामनरेश यादव की मौत को इस आंकड़े में जोड़ने पर यह संख्या और बढ़ गई। परिवार ने आरोप लगाया है कि सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं थे और समय पर इलाज न मिलने के कारण उनकी जान गई। रामनरेश की बेटियां प्रिया और प्रेरणा ने बताया कि उनके पिता बैंक में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करते थे, जबकि मां गीता हॉस्टल में खाना बनाने का काम करती हैं।
पहले दिखाया गया था स्वास्थ्य कैंप में
परिवार के अनुसार, 1 जनवरी को रामनरेश यादव को उल्टी और दस्त की शिकायत हुई। इसके बाद उन्हें स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित किए गए कैंप में दिखाया गया। वहां दवा लेने के बावजूद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद परिवार ने उन्हें प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान रामनरेश के पैरों में बार-बार सूजन होती रही, जो समय के साथ बढ़ती गई।
अस्पताल में आईसीयू में उपचार
रामनरेश को 15 दिन पहले प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां उनका आईसीयू में इलाज चला। इलाज के दौरान उनकी लिवर और किडनी में संक्रमण हो गया, जिससे शरीर में पानी भरने लगा। इसके साथ ही सांस लेने में भी कठिनाई होने लगी। मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को उन्होंने अंतिम सांस ली। परिवार का मानना है कि यदि पहले से पर्याप्त कदम उठाए गए होते, तो उनकी जान बच सकती थी।
स्वास्थ्य विभाग का पक्ष
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया कि रामनरेश यादव लिवर सिरोसिस से पीड़ित थे। विभाग के अनुसार, उनका पूरा शरीर पानी से भर गया था और सांस लेने में तकलीफ भी थी। अस्पताल प्रबंधन ने भी पुष्टि की कि उनकी मृत्यु लिवर सिरोसिस और संबंधित जटिलताओं के कारण हुई।
स्वास्थ्य विभाग का यह बयान परिवार और इलाके के लोगों के गुस्से को कम नहीं कर सका। उनका मानना है कि दूषित पानी की वजह से इलाके में लोग लगातार बीमार हो रहे हैं, और प्रशासन ने पर्याप्त सावधानी नहीं बरती।
दूषित पानी की समस्या
Indore भागीरथपुरा इलाके में पिछले कई महीनों से जल प्रदूषण की समस्या है। पीने और उपयोग के पानी में गंदगी, मिट्टी और अवशेष पाए जा रहे हैं। कई स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले महीने भी कई लोगों को उल्टी-दस्त और बुखार की शिकायत हुई थी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाए गए कैंप और दवा वितरण के बावजूद लोगों की तबीयत में सुधार नहीं हुआ।
परिवार की प्रतिक्रिया
रामनरेश यादव की बेटियों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके पिता की मौत सीधे तौर पर दूषित पानी पीने की वजह से हुई। उन्होंने कहा कि परिवार ने कई बार अधिकारियों से समस्या का समाधान कराने की कोशिश की, लेकिन पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। बेटी प्रेरणा ने कहा, “गंदा पानी पीने से हमारे पिता की जान चली गई। हमें न्याय चाहिए और प्रशासन को इस मुद्दे पर गंभीरता दिखानी चाहिए।”
इलाके में लोगों की चिंता
Indore भागीरथपुरा के लोग लगातार स्वास्थ्य और जल आपूर्ति को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि दूषित पानी के कारण इलाके में बच्चे और बुजुर्ग विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। कई लोगों ने निजी जल शुद्धिकरण उपकरण खरीदे हैं, लेकिन सभी के लिए यह विकल्प उपलब्ध नहीं है।
प्रशासन की भूमिका
हालांकि प्रशासन ने इलाके में स्वास्थ्य कैंप लगाए और कुछ राहत कार्य किए, लेकिन स्थानीय लोग मानते हैं कि पर्याप्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा है कि जांच जारी है और प्रभावित परिवारों को मदद दी जाएगी, लेकिन जमीन पर राहत कार्य धीमी गति से हो रहे हैं।
निष्कर्ष
Indore भागीरथपुरा दूषित जलकांड ने Indore में जल सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। 36 मौतों की संख्या दर्शाती है कि समस्या कितनी गंभीर है। परिवारों का आरोप है कि प्रशासन ने समय पर कदम नहीं उठाए, जबकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मौत लिवर सिरोसिस जैसी बीमारी के कारण हुई।
इस घटना से स्पष्ट है कि जल प्रदूषण और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है। नागरिक और प्रशासन दोनों को मिलकर उपाय करने होंगे ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके। इस दुखद घटना ने इलाके में सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है।
