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UN में यूक्रेन शांति प्रस्ताव पर वोटिंग, भारत समेत 51 देशों ने साधी चुप्पी

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Published On: 25 February 2026
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यूक्रेन शांति प्रस्ताव पर UN में वोटिंग: Bharat समेत 51 देशों ने अपनाया तटस्थ रुख

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में एक बार फिर शांति बहाली को लेकर अहम पहल की गई। 24 फरवरी को यूक्रेन की ओर से “स्थायी शांति” के उद्देश्य से एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिस पर वैश्विक समुदाय की नजरें टिकी थीं। इस प्रस्ताव पर हुई वोटिंग में भारत ने एक बार फिर अपना स्वतंत्र और संतुलित रुख बरकरार रखते हुए मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत के साथ चीन, ब्राजील और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समेत कुल 51 देशों ने खुद को इस मतदान से दूर रखा।

क्या रहा मतदान का परिणाम?

193 सदस्य देशों वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव के पक्ष में 107 देशों ने मतदान किया। वहीं 12 देशों ने प्रस्ताव का विरोध किया। इसके अलावा 51 देशों ने तटस्थ रहते हुए मतदान में भाग नहीं लिया। तटस्थ रहने वाले देशों में भारत के अलावा चीन, ब्राजील, संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका और बहरीन जैसे देश शामिल थे।

यह परिणाम दिखाता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर वैश्विक समुदाय में स्पष्ट विभाजन मौजूद है। जहां एक बड़ा वर्ग यूक्रेन के समर्थन में खुलकर सामने आया, वहीं कई देशों ने संतुलित रुख अपनाना ही उचित समझा।

प्रस्ताव में क्या था खास?

यूक्रेन द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत युद्ध को समाप्त करना और स्थायी शांति स्थापित करना था। प्रस्ताव में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया गया:

  • तुरंत युद्धविराम की अपील
  • यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता और सीमाओं का सम्मान
  • युद्धबंदियों की अदला-बदली
  • जबरन विस्थापित नागरिकों और बच्चों की सुरक्षित वापसी
  • नागरिक बुनियादी ढांचे, विशेषकर बिजली घरों और रिहायशी इलाकों पर हमलों पर चिंता

यूक्रेन का कहना है कि इन मानवीय और कानूनी आधारों पर ही स्थायी शांति का रास्ता निकाला जा सकता है। प्रस्ताव में रूस द्वारा नागरिक ठिकानों पर किए जा रहे हमलों की निंदा भी की गई।

Bharat ने क्यों नहीं किया मतदान?

Bharat का तटस्थ रहना कोई नया कदम नहीं है। रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से ही भारत ने संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई है। भारत ने बार-बार यह दोहराया है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और इसका अंत केवल संवाद और कूटनीति से ही संभव है।

मतदान से दूरी बनाकर भारत ने यह संकेत दिया है कि वह किसी एक पक्ष के समर्थन में खड़ा होने के बजाय शांति प्रक्रिया को बढ़ावा देना चाहता है। भारत की रणनीति तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित मानी जा सकती है:

  1. संवाद और कूटनीति पर जोर – भारत का मानना है कि प्रत्यक्ष बातचीत ही दीर्घकालिक समाधान का रास्ता है।
  2. रणनीतिक संतुलन – रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक और रक्षा संबंध हैं, जबकि अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ भी उसके मजबूत आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते हैं।
  3. राष्ट्रीय हित सर्वोपरि – ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा आपूर्ति और भू-राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए भारत ने तटस्थता बनाए रखना उचित समझा है।
चीन और ब्राजील का रुख

भारत की तरह चीन और ब्राजील ने भी मतदान से दूरी बनाई। ये देश भी वैश्विक मंच पर संवाद आधारित समाधान की वकालत करते रहे हैं। ब्राजील ने पहले भी शांति वार्ता के लिए एक बहुपक्षीय मंच बनाने का सुझाव दिया था, जबकि चीन ने राजनीतिक समाधान पर जोर दिया है।

वैश्विक राजनीति पर प्रभाव

इस वोटिंग ने साफ कर दिया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय पूरी तरह एकमत नहीं है। पश्चिमी देशों का बड़ा वर्ग यूक्रेन के समर्थन में है, जबकि कई विकासशील और एशियाई, अफ्रीकी तथा लैटिन अमेरिकी देश संतुलित रुख अपना रहे हैं।

भारत का तटस्थ रहना उसकी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की सोच को दर्शाता है। भारत खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है, जो किसी गुटबंदी का हिस्सा बनने के बजाय शांति और स्थिरता को प्राथमिकता देता है।

आगे की राह

रूस-यूक्रेन युद्ध के चार साल पूरे होने के बाद भी संघर्ष जारी है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र में लाए गए प्रस्ताव भले ही तत्काल समाधान न दे सकें, लेकिन वे वैश्विक दबाव और कूटनीतिक प्रयासों को दिशा जरूर देते हैं।

भारत का संदेश स्पष्ट है—संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान ही आगे का रास्ता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वैश्विक शक्तियां मिलकर इस संघर्ष का स्थायी समाधान निकाल पाती हैं या नहीं।

कुल मिलाकर, इस वोटिंग ने न सिर्फ वैश्विक राजनीतिक समीकरणों को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि भारत जैसे देश अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित कूटनीतिक रणनीति अपनाए हुए हैं।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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