MP में बदलता मौसम: फरवरी में चौथी बार ओले और बारिश, किसानों की बढ़ी चिंता
MP के मौसम ने फरवरी में एक बार फिर अपना मिजाज बदल दिया है। पिछले दो दिनों में प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई, जिससे तैयार फसलें खासकर गेहूं और चने को नुकसान पहुंचा है। लगातार बदलते मौसम ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं और प्रशासन तथा मौसम विभाग सतर्कता के संकेत दे रहे हैं।
चक्रवाती परिसंचरण और द्रोणिका का असर
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदेश के ऊपरी हवा में बने चक्रवाती परिसंचरण और द्रोणिका के प्रभाव से मौसम अचानक बदल रहा है। मंगलवार को छिंदवाड़ा, सिवनी, बैतूल, रतलाम, उज्जैन, बालाघाट, खंडवा, सीहोर, रायसेन, इंदौर, अनूपपुर और डिंडौरी जिलों में अचानक तेज हवा के साथ बारिश हुई। कई इलाकों में ओले गिरने से खेतों में पानी भर गया और फसलों को नुकसान पहुँचा। इससे पहले 24 घंटों में श्योपुर, शिवपुरी, ग्वालियर, टीकमगढ़, छतरपुर, रीवा, सीधी और सिंगरौली में हल्की वर्षा दर्ज की गई थी।
विशेष रूप से शिवपुरी, टीकमगढ़, छतरपुर, सीधी और सिंगरौली में ओलावृष्टि से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में फसलों का सर्वे कराया और नुकसान की जानकारी जुटाई। लगातार हो रहे मौसम बदलाव ने प्रदेश के कृषि क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
फरवरी में चौथी बार बारिश और ओले
फरवरी माह की शुरुआत से अब तक मध्यप्रदेश में चार बार बारिश और ओलावृष्टि का दौर रहा है। पहले दो चरणों में फसलों को नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराया। 18 फरवरी से तीसरे चरण की बारिश शुरू हुई, जो 21 फरवरी तक चली। इसके बाद 23 और 24 फरवरी को फिर तेज बारिश और ओले गिरे। इस लगातार बदलते मौसम ने किसानों को तैयार फसलों को लेकर चिंतित कर दिया है और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को अब भी सतर्क रहने की जरूरत है।
नया पश्चिमी विक्षोभ 27 फरवरी से सक्रिय
मौसम विभाग के अनुसार, 27 फरवरी को पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। इसका असर मध्यप्रदेश में भी दिख सकता है। अनुमान है कि 1 और 2 मार्च को प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। हालांकि बुधवार को मौसम साफ रहने के संकेत हैं।
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसल की निगरानी करें और ओलावृष्टि या तेज हवा से होने वाले नुकसान से बचने के लिए उचित कदम उठाएं। यदि संभव हो तो संवेदनशील फसल क्षेत्रों में अस्थायी ढांचा या अन्य सुरक्षा उपाय अपनाए जा सकते हैं।
तापमान का पैटर्न
बारिश और ओले वाले जिलों में दिन का तापमान कुछ कम हुआ है, लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में पारा अभी भी 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है। रात में ठंड का असर कम हुआ है। पर्वतीय क्षेत्र पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 10.8 डिग्री दर्ज किया गया, जो पूरे प्रदेश में सबसे कम है। वहीं मंदसौर में 10.9 डिग्री, शाजापुर में 11.5 डिग्री, राजगढ़ में 12 डिग्री, खजुराहो में 12.2 डिग्री और दतिया में 12.3 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, दिन और रात के तापमान में अंतर कम होने से फसलों पर बढ़ती गर्मी और अचानक ठंड का मिश्रित असर पड़ सकता है। गेहूं और चने की फसल इस समय संवेदनशील अवस्था में हैं, इसलिए किसानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
किसानों की बढ़ी चिंता
बारिश और ओले से प्रभावित क्षेत्रों के किसानों की चिंता बढ़ गई है। गेहूं और चने की फसल पूरी तरह से तैयार हो रही है, लेकिन लगातार बदलते मौसम और तेज हवा से फसल क्षति का डर बना हुआ है। कई किसान अपनी फसल की निगरानी कर रहे हैं और कुछ ने तात्कालिक उपायों जैसे पौधों की सुरक्षा के लिए अस्थायी ढांचे बनाने शुरू कर दिए हैं।
कृषि विभाग ने प्रभावित जिलों में अधिकारियों को अलर्ट किया है और किसानों को फसल सुरक्षा के उपाय सुझाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत में मौसम में उतार-चढ़ाव हो सकता है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनी
MP में मौसम विभाग लगातार सतर्क है। उन्होंने लोगों और किसानों को चेतावनी दी है कि फरवरी के अंत तक मौसम में अस्थिरता बनी रह सकती है। किसानों को अपनी फसलों और खेतों की सुरक्षा के उपाय करने चाहिए। प्रशासन ने प्रभावित जिलों में आवश्यक संसाधन और मदद उपलब्ध कराने की योजना बनाई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी में लगातार चार बार हुई बारिश और ओलावृष्टि दुर्लभ घटनाओं में शामिल हैं। इसके कारण कृषि क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ी है और किसानों को तैयार फसल को नुकसान से बचाने के लिए पूरी तैयारी करनी होगी।
निष्कर्ष
MP में फरवरी माह में मौसम लगातार बदल रहा है। तेज हवा, बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। फरवरी में चौथी बार बारिश और ओले गिरने के बाद तैयार फसल पर खतरा मंडरा रहा है। 27 फरवरी से नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जो मार्च की शुरुआत में कुछ क्षेत्रों में फिर से बारिश ला सकता है।
किसानों को मौसम विभाग की चेतावनी पर ध्यान देना होगा और फसल की सुरक्षा के लिए कदम उठाने होंगे। तापमान में उतार-चढ़ाव, तेज हवा और अचानक ओले के कारण कृषि क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है। प्रशासन और मौसम विभाग की सतर्कता के बावजूद किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। यह मौसम किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, लेकिन समय पर उचित उपाय अपनाने से नुकसान को कम किया जा सकता है।
