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भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट खंडवा बैठक में 10 बड़े संकल्प, जागरूकता अभियान से गांव-गांव तक अधिकार पहुंचाने की मजबूत पहल

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Published On: 23 February 2026
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भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट खंडवा बैठक में कार्यकारिणी विस्तार, जन-जागरूकता अभियान, मानव अधिकार संरक्षण और गांव-गांव तक संगठन पहुंचाने का ऐतिहासिक निर्णय।

भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट खंडवा बैठक: अधिकार जागरूकता की दिशा में निर्णायक पहल

प्रस्तावना

भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट खंडवा बैठक ने जिले में मानव अधिकार जागरूकता को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। 22 फरवरी 2026 को हरसूद तहसील स्थित शर्मा भोजनालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित यह बैठक संगठनात्मक विस्तार, सामाजिक सहभागिता और जन-जागरूकता को केंद्र में रखकर संपन्न हुई।

बैठक केवल औपचारिक आयोजन नहीं थी, बल्कि यह समाज के अंतिम व्यक्ति तक अधिकारों की जानकारी पहुंचाने की एक ठोस रणनीतिक शुरुआत मानी जा रही है।


बैठक स्थल एवं सहभागिता

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कार्यकारिणी विस्तार पर विशेष जोर

भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट खंडवा बैठक में इंदौर संभाग अध्यक्ष महेश कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में संगठन की संरचना को मजबूत करने पर विशेष चर्चा हुई।

धार जिला अध्यक्ष योगेन्द्र तिवारी ने विशेष वक्ता के रूप में कहा कि—

संगठन तभी प्रभावी बनता है जब उसकी जड़ें गांव स्तर तक मजबूत हों।

उन्होंने कार्यकारिणी विस्तार को संगठन की प्राथमिक आवश्यकता बताते हुए सक्रिय पदाधिकारियों की भूमिका पर जोर दिया।

जन-जागरूकता अभियान की रणनीति

बैठक का मुख्य उद्देश्य केवल संगठनात्मक विस्तार नहीं, बल्कि समाज में मानव अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट खंडवा बैठक में निम्न प्रमुख रणनीतियां तय की गईं—

  • गांव-गांव जनसंवाद अभियान
  • अधिकार जागरूकता शिविर
  • प्रशासनिक समन्वय कार्यक्रम
  • जरूरतमंदों के लिए सहायता मार्गदर्शन
  • युवाओं की भागीदारी बढ़ाना

यह निर्णय लिया गया कि मानव अधिकार केवल कानूनी विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है।

पदाधिकारियों को सौंपे गए दायित्व

खंडवा जिला अध्यक्ष नारायण चौधरी के नेतृत्व में आयोजित भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट खंडवा बैठक में कई पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख थे—

  • जिला प्रभारी — नरेंद्र यादव
  • जिला सचिव — मुकेश खले
  • हरसूद तहसील अध्यक्ष — बालकृष्ण पाटिल
  • तहसील उपाध्यक्ष — पुरुषोत्तम गुर्जर

इस अवसर पर पदाधिकारियों को परिचय पत्र वितरित कर संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

मूंदी नगर में संगठनात्मक संवाद

बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडल ने मूंदी नगर पहुंचकर जिला उपाध्यक्ष लक्ष्मी नारायण शर्मा और जिला संरक्षक संदीप साकल्ये से भेंट की।यहां भी भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट खंडवा बैठक के निर्णयों की जानकारी देते हुए जन-जागरूकता कार्यक्रमों को निरंतर संचालित करने का आग्रह किया गया।

राष्ट्रीय नेतृत्व का संदेश

राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव ने अपने संदेश में कहा—

  • संगठन का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक अधिकारों की जानकारी पहुंचाना है।
  • सेवा, समर्पण और पारदर्शिता संगठन की पहचान होनी चाहिए।
  • जरूरतमंदों की सहायता ही वास्तविक मानव सेवा है।

उन्होंने भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट खंडवा बैठक को संगठन की सशक्त पहल बताया।

संगठन की भविष्य कार्ययोजना

बैठक में तय किया गया कि आने वाले समय में निम्न कार्य प्राथमिकता में रहेंगे—

1. मानव अधिकार पर ग्रामीण कार्यशालाएं

2. महिला और युवा नेतृत्व विकास कार्यक्रम

3. प्रशासन और समाज के बीच समन्वय मंच

4. नए सदस्यों का व्यापक अभियान

5. सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों में सहायता_professional सहायता मार्गदर्शन

समाज में मानव अधिकार जागरूकता की आवश्यकता

आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने मूल अधिकारों से अनभिज्ञ हैं।
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट खंडवा बैठक ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए अधिकार शिक्षा को सामाजिक आंदोलन बनाने का संकल्प लिया।

मानव अधिकार जागरूकता से—

  • शोषण कम होता है
  • सामाजिक न्याय मजबूत होता है
  • नागरिक सहभागिता बढ़ती है
  • लोकतंत्र जमीनी स्तर पर मजबूत होता है

सक्रिय कार्यकर्ताओं की भूमिका

संगठन के शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, डॉ. प्रेमकुमार वैध, युवराज सिंह राठौर, मनीष गुप्ता, जीवनलाल जैन सहित पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा—

संगठन की मजबूती सक्रिय कार्यकर्ताओं से ही संभव है।

उन्होंने नियमित बैठक, जनसंपर्क और सामाजिक अभियानों को निरंतर चलाने का संकल्प दोहराया।

निष्कर्ष

भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट खंडवा बैठक केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना को जागृत करने की दिशा में उठाया गया सशक्त कदम है।

यह बैठक इस बात का संकेत है कि जब समाज, संगठन और प्रशासन मिलकर कार्य करते हैं, तो मानव अधिकार केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि जीवन का हिस्सा बनते हैं।

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