इंदौर आईडीए ड्रीम प्रोजेक्ट संकट में 120 करोड़ के ISBT और स्नेह धाम खाली पड़े हैं। जानिए कारण, PPP मॉडल की विफलता और आगे का रास्ता।
इंदौर आईडीए ड्रीम प्रोजेक्ट संकट: विकास के बीच ठहराव की कहानी
इंदौर आईडीए ड्रीम प्रोजेक्ट संकट आज शहर की शहरी योजना पर बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर उभरा है।
जहाँ एक ओर इंदौर देश के सबसे स्वच्छ और तेज़ी से विकसित होते शहरों में गिना जाता है, वहीं दूसरी ओर 120 करोड़ रुपये की लागत से बने दो बड़े प्रोजेक्ट—आईएसबीटी (ISBT) और स्नेह धाम—अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
यह स्थिति केवल अधूरे संचालन की नहीं, बल्कि शहरी योजना, PPP मॉडल और मांग के वास्तविक आकलन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
इंदौर आईडीए ड्रीम प्रोजेक्ट संकट क्या है
इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) ने शहर के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दो महत्वाकांक्षी परियोजनाएँ तैयार की थीं—
- आधुनिक अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (ISBT)
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्नेह धाम आवासीय परिसर
लेकिन निर्माण के बाद संचालन व्यवस्था तय न होने से ये दोनों परियोजनाएँ “एसेट से ज्यादा लाइबिलिटी” बनती जा रही हैं।
100 करोड़ का ISBT क्यों बना खाली ढांचा
स्थान: ग्राम कुमेड़ी, इंदौर
क्षेत्रफल: लगभग 15 एकड़
लागत: लगभग 100 करोड़ रुपये
क्षमता: 1,440 बस प्रतिदिन
ISBT की वर्तमान स्थिति
निर्माण के एक वर्ष बाद भी:
- यहाँ एक भी बस नियमित रूप से संचालित नहीं हो रही
- 6 बार टेंडर जारी — संचालन एजेंसी नहीं मिली
- एयरपोर्ट जैसी सुविधाएँ — पर उपयोग शून्य
- लोकार्पण की प्रक्रिया भी अटकी
कारण
- शहर के मौजूदा बस ऑपरेटर स्थान परिवर्तन को तैयार नहीं
- बेस प्राइस अधिक रखा गया
- निजी कंपनियों को व्यावसायिक मॉडल व्यवहारिक नहीं लगा
- यात्री प्रवाह का गलत अनुमान
स्नेह धाम: बुजुर्गों के लिए बना, पर खाली क्यों
योजना क्रमांक 134
लागत: 20 करोड़ रुपये
संरचना: 6 मंजिला भवन
फ्लैट्स: 32 (22 BHK + 10 BHK)
वर्तमान वास्तविकता
- उद्घाटन: जून 2025
- वर्तमान निवासी: केवल 2 परिवार
- ठेकेदार ने घाटे के कारण संचालन छोड़ा
- 4–5 बुजुर्गों से मॉडल टिकाऊ नहीं रहा
क्यों नहीं आए निवासी?
- भारतीय सामाजिक ढाँचे में ओल्ड-एज होम स्वीकार्यता अभी कम
- किराया अपेक्षाकृत अधिक
- मेडिकल, केयर और एक्टिविटी इकोसिस्टम विकसित नहीं
- इसे “लाइफस्टाइल प्रोजेक्ट” बनाया गया, “केयर मॉडल” नहीं
PPP मॉडल की विफलता — सबसे बड़ा कारण
इंदौर आईडीए ड्रीम प्रोजेक्ट संकट का मूल कारण PPP (Public-Private Partnership) की गलत संरचना माना जा रहा है।
प्रमुख समस्याएँ:
| समस्या | प्रभाव |
|---|---|
| उच्च रिजर्व प्राइस | निजी निवेशक पीछे हटे |
| राजस्व मॉडल अस्पष्ट | दीर्घकालिक लाभ नहीं दिखा |
| डिमांड स्टडी कमजोर | उपयोगकर्ता नहीं मिले |
| ऑपरेशनल रिस्क निजी पक्ष पर | कंपनियों ने रुचि नहीं ली |
PPP केवल निर्माण नहीं, बल्कि संचालन-आधारित डिजाइन मांगता है — जो यहाँ नहीं हुआ।
आर्थिक प्रभाव: जनता का पैसा, उपयोग शून्य
120 करोड़ रुपये का निवेश वर्तमान में:
- मेंटेनेंस खर्च बढ़ा रहा
- एसेट डिप्रिसिएशन हो रहा
- उपयोग न होने से राजस्व शून्य
- भविष्य में पुनर्जीवन लागत और बढ़ेगी
यह स्थिति “Dead Infrastructure Cost” कहलाती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है:
“भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण तेज है, पर ऑपरेशन प्लानिंग कमजोर है।”
आवश्यक था:
- Demand-driven planning
- Stakeholder consultation
- Phased implementation
- Social adoption strategy
समाधान क्या हो सकते हैं?
इंदौर आईडीए ड्रीम प्रोजेक्ट संकट से बाहर निकलने के लिए संभावित रास्ते:
ISBT के लिए:
आंशिक संचालन से शुरुआत
निजी बस ऑपरेटरों को प्रोत्साहन
मल्टी-यूज़ ट्रांजिट हब मॉडल
लॉजिस्टिक्स + कमर्शियल उपयोग
स्नेह धाम के लिए:
Assisted living + medical care जोड़ना
CSR मॉडल से संचालन
किराया पुनर्निर्धारण
डे-केयर + एक्टिव एजिंग सेंटर बनाना
शहर के विकास पर असर
यदि ऐसे प्रोजेक्ट निष्क्रिय रहते हैं तो:
- भविष्य की परियोजनाओं में निवेशक विश्वास घटता है
- शहरी योजना की विश्वसनीयता प्रभावित होती है
- जनता में “घोषणा बनाम वास्तविकता” की धारणा बनती है
इंदौर जैसे तेजी से बढ़ते शहर के लिए यह चेतावनी संकेत है।
आगे की उम्मीद
अभी तीन NGOs ने संचालन में रुचि दिखाई है।
यदि नीति शर्तें लचीली की गईं तो:
स्नेह धाम सामाजिक मॉडल बन सकता है
ISBT क्षेत्रीय ट्रांसपोर्ट हब में बदला जा सकता है

