MP में कर्मचारियों का बढ़ा वेतन: 1 अप्रैल 2024 से लागू होगा नया वेतनमान, दो साल का एरियर भी मिलेगा
भोपाल: MP के लाखों श्रमिकों, आउटसोर्स कर्मियों और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य के श्रमायुक्त ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 1 अप्रैल 2024 से लागू बढ़े हुए न्यूनतम वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए और यदि किसी कर्मचारी को अब तक संशोधित वेतन नहीं मिला है तो उसका एरियर भी अदा किया जाए। इस फैसले से प्रदेश के 30 लाख से अधिक श्रमिकों और कर्मियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है।
अप्रैल 2024 से लागू हुआ था बढ़ा हुआ वेतन
न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड ने नवंबर 2019 में श्रमिकों के वेतन में 25 प्रतिशत वृद्धि की अनुशंसा की थी। इस अनुशंसा को मध्यप्रदेश सरकार ने स्वीकार करते हुए 1 अप्रैल 2024 से नया वेतनमान लागू कर दिया था। शुरुआत में कुछ कर्मचारियों को अप्रैल माह में बढ़ा हुआ वेतन भी मिला, लेकिन इसके बाद मामला कानूनी विवाद में फंस गया।
MP टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन ने वेतनवृद्धि की अधिसूचना को इंदौर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने इस पर स्टे ऑर्डर जारी कर दिया था, जिससे संशोधित वेतन के भुगतान की प्रक्रिया बाधित हो गई। लंबी सुनवाई के बाद 3 दिसंबर 2024 को कोर्ट ने स्टे हटा लिया, जिससे वेतन वृद्धि लागू करने का रास्ता साफ हो गया। इसके बावजूद कई विभागों और निजी संस्थानों में बढ़े हुए वेतन और एरियर का भुगतान नहीं किया गया।
श्रमायुक्त ने फिर दिए सख्त निर्देश
अब श्रमायुक्त ने दोबारा आदेश जारी कर सभी सरकारी विभागों, निगम-मंडलों और निजी संस्थानों को निर्देशित किया है कि वे श्रमिकों और आउटसोर्स कर्मियों को बढ़ा हुआ न्यूनतम वेतन तत्काल प्रभाव से दें। साथ ही यदि अप्रैल 2024 से अब तक का अंतर भुगतान (एरियर) बकाया है तो उसका भुगतान भी सुनिश्चित करें।
आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि कहीं भी अनुपालन नहीं हुआ तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। न्यूनतम वेतन बढ़ने से कर्मचारियों को प्रतिमाह लगभग 1625 रुपए से लेकर 2434 रुपए तक का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है, जो श्रेणी और कार्य के प्रकार पर निर्भर करेगा।
लाखों कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
MP कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडे के अनुसार, राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में लगभग डेढ़ लाख आउटसोर्स कर्मी कार्यरत हैं। इसके अलावा निगम-मंडलों में करीब 35 हजार कर्मचारी और 54 विभागों में लगभग 65 हजार दैनिक वेतनभोगी श्रमिक कार्य कर रहे हैं। इन सभी को बढ़ा हुआ न्यूनतम वेतन और एरियर मिलने का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है।
उन्होंने कहा कि यदि आदेश के बावजूद भुगतान में देरी की गई तो कर्मचारी संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। श्रमिक संगठनों का मानना है कि लंबे समय से वेतनवृद्धि का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए यह फैसला राहत लेकर आया है।
निजी क्षेत्र में पालन नहीं
अस्थाई, आउटसोर्स और अंशकालीन कर्मचारी मोर्चा के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा का कहना है कि सरकारी क्षेत्र में कुछ हद तक आदेश का पालन हुआ है, लेकिन निजी क्षेत्र में स्थिति बिल्कुल अलग है। उनका दावा है कि निजी सेक्टर में न तो वेतन वृद्धि लागू की गई है और न ही एरियर का भुगतान किया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में सीमेंट उद्योग, बिजली उत्पादन इकाइयों और कोयला खनन क्षेत्रों में 50 से 60 प्रतिशत तक श्रमिक ठेका प्रणाली के तहत काम करते हैं। इन श्रमिकों को अभी तक बढ़े हुए न्यूनतम वेतन का लाभ नहीं मिला है। शर्मा के अनुसार, श्रम विभाग पहले भी निर्देश जारी कर चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका प्रभावी पालन नहीं हो पा रहा है।
संविदा और ठेका कर्मियों की बड़ी संख्या
अनुमान है कि सरकारी क्षेत्र में लगभग 10 लाख आउटसोर्स और अस्थाई कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि निजी क्षेत्र में 25 से 30 लाख तक ठेका श्रमिक काम कर रहे हैं। यदि सभी को संशोधित वेतनमान और एरियर का भुगतान किया जाता है, तो यह राज्य के श्रमिक वर्ग के लिए बड़ी आर्थिक राहत साबित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ा हुआ न्यूनतम वेतन श्रमिकों की क्रय शक्ति को बढ़ाएगा और स्थानीय बाजारों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा। हालांकि यह भी आवश्यक है कि श्रम विभाग नियमित निगरानी करे और आदेश के पालन को सुनिश्चित बनाए।
आगे की राह
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकारी और निजी संस्थान श्रमायुक्त के आदेश का कितनी गंभीरता से पालन करते हैं। यदि समय पर वेतन और एरियर का भुगतान होता है, तो लाखों कर्मचारियों को दो साल का बकाया एक साथ मिलने से बड़ी राहत मिलेगी।
सरकार के इस कदम को श्रमिक हित में बड़ा निर्णय माना जा रहा है। हालांकि अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि आदेशों का क्रियान्वयन कितनी प्रभावी तरीके से होता है। फिलहाल कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों में उम्मीद जगी है कि अब लंबित भुगतान जल्द ही उनके खातों में पहुंचेगा।
