विनय गुण से जीवन में शांति और सुख संभव: युवाचार्य श्री महेन्द्र ऋषि जी महाराज के सान्निध्य में धर्म Sabha
इन्दौर:
धार्मिक और सामाजिक जीवन में विनय का महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह विचार युवाचार्य श्री महेन्द्र ऋषि जी महाराज ने रतलाम कोठी जैन स्थानक पर आयोजित धर्म Sabha में उपस्थित श्रद्धालुओं के समक्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति नम्र और शालीन होता है, तभी वह अपने जीवन में सच्ची शांति और आनंद का अनुभव कर सकता है।
Sabha का शुभारंभ: नवकार मंत्र से आध्यात्मिक ऊर्जा
Sabha की शुरुआत हितेश ऋषि जी महाराज एवं विकसित मुनि द्वारा नवकार मंत्र के जाप से हुई। नवकार मंत्र का जाप न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है, बल्कि उपस्थित सभी भक्तों के मन को शांत और ध्यानपूर्वक बनाता है। इस मंत्रोच्चार के साथ ही सभा का आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हुआ।

युवाचार्य का संदेश: विनम्रता और शालीनता का महत्व
युवाचार्य श्री महेन्द्र ऋषि जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि विनय केवल व्यक्ति की व्यक्तिगत जीवन शैली का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक जीवन में भी सम्मान और मेलजोल का आधार है। जब कोई व्यक्ति नम्र और विनम्र स्वभाव का होता है, तो उसे न केवल अपने भीतर संतोष और शांति प्राप्त होती है, बल्कि समाज में भी उसका स्थान मान और आदर से भर जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि विनय और नम्रता के मार्ग पर चलने से व्यक्ति जीवन की कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना सहजता से कर सकता है। इतिहास और धर्मग्रंथों में भी विनय का विशेष महत्व रहा है, और जिन व्यक्तियों ने अपने जीवन में इस गुण को अपनाया, उन्होंने समाज में प्रेरणा और आदर्श प्रस्तुत किए।
उपस्थित श्रद्धालुओं की भागीदारी
Sabha में समाज के वरिष्ठ सदस्य और युवा वर्ग दोनों शामिल थे। विशेष रूप से उपस्थित रहे:
वीरेन्द्रकुमार रेखा जैन, जिनेश्वर जैन, अनिल चेलावत, प्रकाशचंद सूर्या, प्रतीक सूर्या, प्रकाश भटेवरा, ललित छल्लानी, नगीन नारेलिया, अनिल दुग्गड, गजेंद्र बोड़ाना, विजय सिंह नाहर, सुभाष विनायक्या, राहुल कीमती, सुमति सुनीता छजलानी, मधु मंडलीक, शशि बोथरा, अनुरिमा कीमती, आजाद नारेलिया, रमेश चोपड़ा, अशोक सुराणा, जितेन्द्र चोपड़ा, निशीथ चौधरी, अनिल जैन, हंसकुमार जैन, प्रवीण बम आदि।
Sabha के दौरान वीरेन्द्र जैन ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि विनम्रता और शालीनता केवल व्यक्तिगत जीवन के लिए नहीं, बल्कि समाज और समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। जब हम अपने व्यवहार में विनम्र और नम्र होते हैं, तो हमारी सोच और दृष्टिकोण सकारात्मक बनते हैं, और समाज में हमारी छवि भी सशक्त और सम्मानजनक बनती है।
सेवाभाव और आभार व्यक्त
इस अवसर पर सेवाभावी श्री अशोक मंडलीक ने युवाचार्य श्री महेन्द्र ऋषि जी महाराज के प्रति रतलाम कोठी संघ की ओर से अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि युवाचार्य जी के उपदेश समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देते हैं और युवाओं को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
समापन: मंगलपाठ और आशीर्वाद
धर्म Sabha का समापन मंगलपाठ के साथ हुआ। मंगलपाठ के दौरान सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने मिलकर प्रार्थना की और अपने जीवन में शांति, सुख और सामंजस्य के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। इस प्रकार यह धर्म सभा न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि समाज और युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत साबित हुई।
Sabha में उपस्थित लोगों ने युवाचार्य श्री महेन्द्र ऋषि जी महाराज के उपदेशों की सराहना की और उनके मार्गदर्शन को जीवन में अपनाने की प्रतिज्ञा ली। यह कार्यक्रम इस बात का प्रतीक था कि कैसे धार्मिक शिक्षाएँ और व्यक्तित्व विकास समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
