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इंदौर BRTS हटाने पर मचा घमासान, ठेकेदारों की एंट्री से तेज हुई कार्रवाई, कोर्ट सख्त, शहर की ट्रैफिक तस्वीर बदलने की तैयारी

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Published On: 22 February 2026
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इंदौर BRTS हटाने की कार्रवाई में नया मोड़, ठेकेदारों ने दिखाया इंटरेस्ट, कोर्ट की फटकार के बाद नगर निगम ने तेज की प्रक्रिया।

इंदौर BRTS हटाने की कार्रवाई ने पकड़ी रफ्तार, कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम एक्टिव

इंदौर में इंदौर BRTS हटाने को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिख रहा है। बस स्टॉप और रैलिंग हटाने के काम में आई रुकावटों के बाद नगर निगम ने फिर से टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। सोमवार को संबंधित फाइलें बुलवाई गईं और एजेंसियों की एंट्री ने संकेत दे दिए हैं कि अब यह मामला ज्यादा लंबा नहीं खिंचेगा।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद प्रशासन पर कार्रवाई तेज करने का दबाव बढ़ गया है।

BRTS कॉरिडोर की मौजूदा स्थिति

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शहर के सबसे व्यस्त एबी रोड पर बना BRTS कॉरिडोर कभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मॉडल माना गया था, लेकिन समय के साथ यह ट्रैफिक बाधा का कारण बन गया।

  • कई बस स्टॉप वर्षों से उपयोग में नहीं थे
  • रैलिंग के कारण सड़क चौड़ी होने के बावजूद उपयोग सीमित रहा
  • दुर्घटनाओं और जाम की शिकायतें लगातार बढ़ती रहीं
  • पब्लिक और ट्रैफिक पुलिस ने इसे हटाने की मांग की

इसी वजह से इंदौर BRTS हटाने का निर्णय लिया गया था।

कोर्ट की फटकार के बाद बदली प्रशासन की गति

मामला अदालत तक पहुंचा तो नगर निगम की धीमी कार्यप्रणाली पर सवाल उठे।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि:

  • जब हटाने का निर्णय लिया जा चुका है, तो देरी क्यों?
  • आधा काम कर छोड़ देना शहर की योजना के साथ खिलवाड़ है
  • जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए

इसके बाद इंदौर BRTS हटाने की प्रक्रिया को प्रशासनिक प्राथमिकता में शामिल किया गया।

ठेकेदारों ने फिर दिखाई दिलचस्पी

पहले जिस काम को ठेकेदार ने बीच में छोड़ा था, अब उसी काम के लिए नई एजेंसियां सामने आई हैं।

नगर निगम ने:

  • दो अलग-अलग टेंडर जारी किए
  • तकनीकी परीक्षण फिर से शुरू किया
  • सोमवार को टेंडर फाइलों की समीक्षा की
  • नई कार्ययोजना तैयार की

यह संकेत है कि इंदौर BRTS हटाने अब कागज़ों से निकलकर जमीन पर तेजी से दिखेगा।

क्यों रुका था पहले काम?

सूत्रों के अनुसार काम रुकने के पीछे कई कारण थे:

तकनीकी बदलाव

डिजाइन हटाने के बाद सड़क री-डेवलपमेंट की नई योजना तैयार करनी पड़ी।

लागत का पुनर्मूल्यांकन

रैलिंग हटाना आसान था, लेकिन:

  • बस स्टॉप स्ट्रक्चर
  • डिवाइडर री-डिजाइन
  • ड्रेनेज और सिग्नल सिस्टम
    इन सबके कारण लागत बढ़ गई।

ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान का अभाव

काम शुरू हुआ, लेकिन वैकल्पिक ट्रैफिक प्लान तैयार नहीं था।

शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?

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विशेषज्ञों का मानना है कि इंदौर BRTS हटाने के बाद शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा।

संभावित फायदे:

सड़क की पूरी चौड़ाई उपलब्ध होगी
सिग्नल-फ्री मूवमेंट आसान होगा
दुर्घटनाओं में कमी आएगी
एंबुलेंस और इमरजेंसी रिस्पॉन्स तेज होगा
मिक्स ट्रैफिक मॉडल लागू किया जा सकेगा

BRTS क्यों हुआ अप्रासंगिक?

जब BRTS शुरू हुआ था, तब:

  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपयोग बढ़ाने का लक्ष्य था
  • बसों के लिए डेडिकेटेड लेन बनाई गई

लेकिन समय के साथ:

  • निजी वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ी
  • बस फ्रीक्वेंसी कम होती गई
  • कॉरिडोर खाली रहने लगा
  • शहरी विस्तार ने ट्रैफिक पैटर्न बदल दिया

यही कारण बना इंदौर BRTS हटाने के फैसले का।

अब क्या बनेगा यहां?

नगर निगम सूत्रों के अनुसार BRTS हटने के बाद:

  • स्मार्ट रोड मॉडल विकसित किया जाएगा
  • यूनिफाइड ट्रैफिक लेन बनाई जाएंगी
  • फुटपाथ और साइकिल ट्रैक का नया डिजाइन संभव
  • ग्रीन मोबिलिटी कॉरिडोर पर विचार
  • AI आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जा सकता है

प्रशासन की नई कार्ययोजना

इंदौर BRTS हटाने के लिए तीन चरण तय किए गए हैं:

Phase 1 – स्ट्रक्चर रिमूवल

  • बस स्टॉप
  • रैलिंग
  • डेडिकेटेड लेन बैरियर

Phase 2 – रोड री-इंजीनियरिंग

  • नई लेन मार्किंग
  • सिग्नल सिंक्रोनाइजेशन
  • ड्रेनेज सुधार

Phase 3 – अर्बन मोबिलिटी अपग्रेड

  • स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट री-रूटिंग
  • सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर

शहर के विकास मॉडल से जुड़ा बड़ा बदलाव

शहरी योजनाकार इसे सिर्फ हटाने की कार्रवाई नहीं मान रहे, बल्कि यह:

इंदौर के ट्रांसपोर्ट मॉडल का रीसेट है
BRTS से मल्टी-मोडल मोबिलिटी की ओर बदलाव
रोड फॉर ऑल” कॉन्सेप्ट की शुरुआत

निष्कर्ष

इंदौर BRTS हटाने का मामला अब प्रशासनिक निर्णय से आगे बढ़कर शहरी बदलाव की कहानी बन चुका है।
जहां एक दौर में यह प्रोजेक्ट आधुनिकता का प्रतीक था, वहीं आज इसे हटाना शहर की नई जरूरत माना जा रहा है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि:
क्या यह बदलाव सच में ट्रैफिक राहत देगा?
क्या इंदौर नया अर्बन मोबिलिटी मॉडल पेश करेगा?

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