अतिवृष्टि से फसल नुकसान मुआवजा की मांग को लेकर नागदा में भारतीय किसान यूनियन मंच का प्रदर्शन, सर्वे, बीमा भुगतान और राहत की मांग तेज।
जीवन लाल जैन रिपोर्ट
अतिवृष्टि से फसल नुकसान मुआवजा की मांग ने पकड़ा जोर
नागदा क्षेत्र में लगातार हो रही असमय बारिश और अतिवृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। अतिवृष्टि से फसल नुकसान मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन मंच ने प्रदेश अध्यक्ष देवसिंह गुर्जर के नेतृत्व में महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन एसडीएम को दिया गया, जिसमें फसल सर्वे, बीमा भुगतान और राहत पैकेज की तत्काल घोषणा की मांग की गई।
अतिवृष्टि से किसानों की बढ़ी परेशानी
लगातार हो रही बारिश के कारण खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई है। सोयाबीन, गेहूं और अन्य खड़ी फसलें जलदाग, सड़न और कीट संक्रमण से बर्बाद हो चुकी हैं। कई किसानों का कहना है कि उत्पादन शून्य हो गया है।
किसानों के सामने दोहरी मार है—
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फसल नष्ट
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बाजार में उचित दाम नहीं
इस स्थिति में अतिवृष्टि से फसल नुकसान मुआवजा ही किसानों के लिए एकमात्र सहारा बन गया है।
ज्ञापन के माध्यम से उठाई गई प्रमुख मांगें
भारतीय किसान यूनियन मंच ने प्रशासन के सामने निम्न मांगें रखीं:
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अतिवृष्टि से हुए नुकसान का तत्काल वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए
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प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए
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लंबित बीमा क्लेम का शीघ्र भुगतान किया जाए
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बीमा कंपनियों को किसानों को तकनीकी शर्तों में उलझाने से रोका जाए
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राहत पैकेज घोषित कर किसानों को आर्थिक सहारा दिया जाए
किसान नेताओं ने कहा कि जब तक अतिवृष्टि से फसल नुकसान मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक किसान आर्थिक रूप से खड़ा नहीं हो पाएगा।
फसल सर्वे को बताया खानापूर्ति
किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अमला क्षेत्र में सर्वे तो कर रहा है, लेकिन वह केवल औपचारिकता बनकर रह गया है।
पूर्व में भी ऐसे सर्वे हुए थे, परंतु किसानों को वास्तविक राहत नहीं मिली।
इससे किसानों में अविश्वास बढ़ा है और वे आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई चाहते हैं।
बीमा कंपनियों की भूमिका पर उठे सवाल
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि बीमा कंपनियां अक्सर क्लेम प्रक्रिया को जटिल बनाकर भुगतान टाल देती हैं।
किसानों की मांग है कि:
नुकसान के अनुपात में सीधे भुगतान हो
क्लेम प्रक्रिया सरल बनाई जाए
समय सीमा तय की जाए
किसानों की आर्थिक स्थिति हुई गंभीर
प्रदेश का किसान आज कर्ज, नुकसान और अनिश्चितता से जूझ रहा है।
बारिश ने खेती की पूरी लागत डुबो दी—
- बीज का खर्च
- खाद और दवा
- मजदूरी
- सिंचाई लागत
जब उत्पादन ही नहीं हुआ, तो आय का कोई स्रोत नहीं बचा।
कई किसान परिवारों की आजीविका संकट में है।
प्रशासन से तत्काल राहत की अपेक्षा
किसानों ने महामहिम राज्यपाल से आग्रह किया कि शासन-प्रशासन को निर्देशित कर तत्काल राहत दिलाई जाए।
किसानों का कहना है कि:
“यदि अभी सहायता नहीं मिली, तो किसान आत्मनिर्भर नहीं बल्कि आत्महत्या की ओर धकेला जाएगा।”
किसान नेताओं की मौजूदगी
ज्ञापन का वाचन यूनियन के जिला अध्यक्ष व जनपद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि ने किया।
इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख लोग:
- ब्लॉक अध्यक्ष राधेश्याम चंद्रवंशी
- मोहम्मद रंगरेज (युवक कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष)
- रवि शर्मा
- डॉ. मुकेश पांचाल
- राकेश गुर्जर
- मंगूसिंह पिपलोदा
- बाबूलाल, अर्जुन, विक्रम, कैलाश, मोहन, मंगेश यादव
- बड़ी संख्या में किसान साथी
समाधान क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार स्थिति सुधारने के लिए सरकार को:
वास्तविक समय फसल आकलन प्रणाली लागू करनी चाहिए
मौसम आधारित बीमा मॉडल मजबूत करना चाहिए
आपदा राहत को कृषि से जोड़ना चाहिए
जिला स्तर पर त्वरित भुगतान तंत्र बनाना चाहिए
जब तक अतिवृष्टि से फसल नुकसान मुआवजा समय पर नहीं मिलेगा, तब तक कृषि अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहेगा।
निष्कर्ष
नागदा में किसानों का यह आंदोलन केवल मुआवजे की मांग नहीं, बल्कि खेती बचाने की लड़ाई है।
अतिवृष्टि ने खेत उजाड़े हैं, अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह भरोसा लौटाए।
यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो यह मुद्दा पूरे प्रदेश में व्यापक किसान आंदोलन का रूप ले सकता है।

