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Kathel परिवार ने मृत्यु भोज छोड़ अनाथ बेटी का कन्यादान कर मानवता की मिसाल पेश की

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Published On: 20 February 2026
Kathel Family Sets Example of Humanity by Donating Orphaned Girl Instead of Hosting Death Feast
— Kathel Family Sets Example of Humanity by Donating Orphaned Girl Instead of Hosting Death Feast

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मृत्यु भोज की जगह अनाथ बेटी का कन्यादान: छतरपुर के Kathel परिवार ने पेश की मानवता की मिसाल

छतरपुर के नौगांव में एक प्रेरणादायक सामाजिक पहल सामने आई है, जिसने पारंपरिक रीति-रिवाजों पर नया दृष्टिकोण पेश किया है। आमतौर पर किसी परिजन के निधन के बाद परिवार मृत्यु भोज आयोजित करता है, जिसमें सामाजिक दबाव और दिखावे के कारण लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं। वहीं, स्वर्गीय गोपाल Kathel के परिवार ने इस परंपरा को त्यागते हुए मानवता को प्राथमिकता दी और मृत्यु भोज के स्थान पर अनाथ बेटी का कन्यादान करने का निर्णय लिया।

स्व. गोपाल कठेल के पुत्र कामाख्या उर्फ कान्हा कठेल और समाजसेविका तृप्ति कठेल ने यह संकल्प लेकर समाज को नई दिशा दी। इस पहल ने दिखाया कि परंपराओं में बदलाव और समाज सेवा के माध्यम से सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है।

कन्यादान की तैयारी और सामाजिक सहयोग

करीब दस वर्ष पहले माता-पिता को खो चुकी लक्ष्मी अनुरागी के विवाह के लिए कठेल परिवार ने न केवल आर्थिक सहयोग किया, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी का भी उदाहरण पेश किया। परिवार ने बेटी को विवाह में 75 प्रकार की सामग्री भेंट की, जिसमें 32 इंच एलसीडी, कूलर, अलमारी, सोने की कील, चांदी की चुटकी, 21,000 रुपये की एफडी और 5,100 रुपये नगद शामिल थे।

इस तरह का सहयोग केवल संपत्ति या वस्तुएं देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में एक सशक्त संदेश देने का माध्यम भी बना। परिवार ने दिखाया कि मृतक की स्मृति में दिखावे के बजाय वास्तविक समाज सेवा ही सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होती है।

सामाजिक और वैचारिक बदलाव का संदेश

Kathel परिवार का यह कदम पारंपरिक सोच में बदलाव का प्रतीक है। मृत्यु भोज वर्षों से सामाजिक दबाव और दिखावे का प्रतीक बन चुका था, लेकिन इस पहल ने स्पष्ट किया कि परंपराओं को सकारात्मक दिशा में मोड़ा जा सकता है।

यह पहल बताती है कि संसाधनों का सही उपयोग और जरूरतमंदों की मदद समाज को मजबूत बना सकती है। मृत्यु भोज के बजाय अनाथ बेटियों और गरीबों की सहायता करना वास्तव में समाज को प्रगति की ओर ले जाता है।

लक्ष्मी अनुरागी और परिवार की प्रतिक्रिया

विवाह के दौरान लक्ष्मी अनुरागी ने कठेल परिवार का आभार व्यक्त किया। भाई के निधन के बाद बहन की आंखों में भी आंसू छलक उठे। बेटी की मौसी और मौसा ने इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

स्थानीय लोग और समाजसेवी इस पहल को मानवता की मिसाल मान रहे हैं। कामाख्या उर्फ कान्हा कठेल और तृप्ति कठेल ने अपील की कि समाज के लोग मृत्यु भोज जैसे आयोजनों पर खर्च करने की बजाय निर्धन और अनाथ बेटियों की सहायता करें।

समुदाय पर प्रभाव

कठेल परिवार की इस पहल ने स्थानीय समुदाय में सकारात्मक बदलाव की लहर पैदा की है। कई लोग अब परंपराओं और रीति-रिवाजों पर फिर से सोचने लगे हैं। बच्चों और युवाओं में भी यह संदेश गया कि सच्ची श्रद्धांजलि और सामाजिक जिम्मेदारी दिखावे से नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की मदद से होती है।

इस पहल से यह भी स्पष्ट हुआ कि समाज में छोटे बदलाव भी बड़े प्रभाव डाल सकते हैं। यदि अन्य परिवार भी मृत्यु भोज जैसी परंपराओं को छोड़कर समाज सेवा पर ध्यान दें, तो कई अनाथ और गरीब बच्चों के जीवन में खुशियाँ लाई जा सकती हैं।

भविष्य के लिए संदेश

कठेल परिवार ने साबित किया कि मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का मार्ग अपनाना संभव है। उनकी पहल से समाज में यह संदेश गया कि पारंपरिक आयोजनों और दिखावे पर खर्च किए जाने वाले संसाधनों को वास्तविक जरूरतों में लगाया जा सकता है।

यदि समाज इस पहल को अपनाए, तो केवल आर्थिक संसाधनों का सही उपयोग ही नहीं होगा, बल्कि कई जरूरतमंद बेटियों के जीवन में स्थायी खुशियाँ भी आएंगी। परंपराओं में बदलाव का साहस ही समाज को आगे बढ़ाता है और कठेल परिवार ने यह साहस दिखाया।

निष्कर्ष

Kathel परिवार की यह पहल सिर्फ एक पारिवारिक कहानी नहीं है, बल्कि सामाजिक चेतना और मानवता की ओर उठाया गया एक बड़ा कदम है। उन्होंने दिखाया कि सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जो किसी जरूरतमंद के जीवन में स्थायी खुशियाँ ला सके।

समाज को चाहिए कि ऐसे उदाहरणों से प्रेरणा लेकर परंपराओं को सकारात्मक दिशा में मोड़े। मृत्यु भोज जैसी परंपराओं के बजाय अनाथ बेटियों की मदद करना समाज की वास्तविक सेवा है। कठेल परिवार ने मानवता की मिसाल पेश की और समाज को एक नई दिशा दी।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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