जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव इंदौर 2026 15 से 20 मार्च तक नरीमन सिटी में आयोजित होगा। पूज्य मुनिसंघ के सानिध्य में महापात्र, पात्र, इन्द्र-इन्द्राणी बनने का दुर्लभ अवसर।
धर्म समाज प्रचारक:
राजेश जैन ‘दद्दू’, इंदौर
जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव इंदौर 2026
मां अहिल्या की पुण्यभूमि इंदौर एक बार फिर ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन की साक्षी बनने जा रही है।
जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव इंदौर 2026 का भव्य आयोजन 15 मार्च (रविवार) से 20 मार्च (शुक्रवार) 2026 तक श्री दिगम्बर जैन मंदिर, नरीमन सिटी, इंदौर में सम्पन्न होगा।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन ‘दद्दू’ ने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मजागरण, संस्कार संवर्धन और श्रमण संस्कृति के गौरव का महापर्व है।
पंचकल्याणक का आध्यात्मिक महत्व
जैन परंपरा में पंचकल्याणक किसी भी तीर्थंकर के जीवन के पाँच परम मंगल प्रसंगों का प्रतीक है—
- गर्भ कल्याणक
- जन्म कल्याणक
- तप/दीक्षा कल्याणक
- केवलज्ञान कल्याणक
- मोक्ष कल्याणक
इन पाँच घटनाओं का स्मरण आत्मा को उसके शुद्ध स्वरूप की ओर जागृत करता है।
जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव इंदौर 2026 इसी आध्यात्मिक चेतना का जीवंत उत्सव है।
आयोजन का स्थान एवं तिथियाँ
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📍 स्थान: श्री सुपार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, नरीमन सिटी, इंदौर
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📆 तिथि: 15 मार्च से 20 मार्च 2026
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⏰ प्रारंभिक चयन बैठक: 22 फरवरी 2026, प्रातः 9:30 बजे
इस दौरान 1008 श्री भगवान नेमीनाथ एवं चौबीस जिनबिंबों की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा सम्पन्न होगी।
🙏 पूज्य मुनिसंघ का मंगल सानिध्य
यह महामहोत्सव श्रमण संस्कृति के महान संतों के आशीर्वाद से सम्पन्न होगा—
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चर्या शिरोमणि पट्टाचार्य
परम पूज्य 108 श्री विशुद्धसागरजी महामुनिराज
साथ ही पावन प्रेरणा एवं सानिध्य रहेगा—
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108 श्री आदित्यसागरजी महाराज
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108 श्री अप्रमितसागरजी महाराज
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108 श्री सहजसागरजी महाराज (ससंघ)
प्रतिष्ठाचार्य के रूप में
श्री पीयूष जी भैया जी निर्देशन प्रदान करेंगे।
महापात्र, पात्र, इन्द्र-इन्द्राणी बनने का दुर्लभ अवसर
जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव इंदौर 2026 में समाजजनों को केवल दर्शक नहीं, बल्कि सहभागी बनने का निमंत्रण है।
आप बन सकते हैं—
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महापात्र
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पात्र
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इन्द्र
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इन्द्राणी
यह केवल सम्मान नहीं, बल्कि कर्मनिर्जरा और पुण्यार्जन का अद्वितीय अवसर माना जाता है।
राजेश जैन दद्दू के अनुसार—
“प्रतिष्ठा के प्रति निष्ठा ही प्रभावना की पराकाष्ठा है।”
समाज के लिए क्यों विशेष है यह आयोजन
यह आयोजन तीन स्तरों पर समाज को जोड़ता है—
1️⃣ आध्यात्मिक जागरण
आत्मा की शुद्धि और संयममय जीवन की प्रेरणा।
2️⃣ सांस्कृतिक संरक्षण
श्रमण परंपरा और जैन संस्कारों का जीवंत संवहन।
3️⃣ सामाजिक एकता
समाज के सभी वर्गों की सामूहिक सहभागिता।
सहभागिता कैसे करें
समाज के सभी श्रद्धालुओं से विनम्र आग्रह है कि—
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त्रियोगपूर्वक (मन-वचन-काय) सहभागिता करें
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पात्र चयन हेतु 22 फरवरी की बैठक में उपस्थित रहें
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आयोजन अवधि में सेवा, भक्ति एवं साधना में जुड़ें
आध्यात्मिक संदेश
पंचकल्याणक केवल आयोजन नहीं — आत्मज्योति प्रकट करने की साधना है।
यह हमें याद दिलाता है कि—
“तीर्थंकर का जीवन इतिहास नहीं, आत्मा की संभावनाओं का मानचित्र है।”


