MP कर्ज संकट: बजट 2026 से पहले सरकार ने लिया ₹5,600 करोड़ का नया कर्ज
भोपाल: MP सरकार ने राज्य का बजट 2026 पेश करने से केवल एक दिन पहले 5,600 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर सभी को चौंका दिया। यह कदम राज्य की आर्थिक स्थिति और वित्तीय नीतियों पर बहस का विषय बन गया है। इस नए कर्ज के बाद मध्य प्रदेश पर कुल कर्ज बढ़कर 4.90 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो 2025-26 के बजट के कुल आकार 4.21 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक है।
हालांकि, सरकार का कहना है कि राज्य की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में 8.04% की विकास दर के साथ अर्थव्यवस्था में मजबूती का संकेत दिया गया है। इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि राज्य सरकार का कर्ज नियंत्रण, वित्तीय अनुशासन और राजस्व संग्रह संतुलित ढंग से चल रहा है।
MP Budget से पहले लिया गया बड़ा कर्ज
Budget से केवल 24 घंटे पहले उठाया गया यह कदम वित्तीय विश्लेषकों और जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
- वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य द्वारा लिया गया कुल कर्ज 70,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
- इस नए 5,600 करोड़ के कर्ज को मिलाकर मध्य प्रदेश पर कुल कर्ज बढ़कर 4.90 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
- चालू वित्तीय वर्ष के खर्चों को पूरा करने के लिए अनुपूरक बजट भी विधानसभा में पारित किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम दिखाता है कि सरकार को वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्काल कर्ज लेने की आवश्यकता पड़ी।
आर्थिक सर्वेक्षण 2026: विकास दर और वित्तीय स्थिति
उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने मंगलवार को विधानसभा में मध्य प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण 2026 पेश किया। इसमें राज्य की वित्तीय स्थिति और आगामी बजट के अनुमान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
प्रमुख बिंदु:
- विकास दर का अनुमान – 8.04%
- कर्ज और सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का अनुपात:
- 2004-05: 39.5%
- 2023-24: 27.99%
- 2025-26 अनुमानित: 31.30%
- कर्ज का नियंत्रण: कोरोना महामारी 2019-20 के दौर को छोड़कर, वित्तीय घाटे पर नियंत्रण रखा गया।
- राजस्व संग्रह और केंद्रीय करों में वृद्धि की संभावना – जिससे वित्तीय स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद मिलेगी।
सर्वेक्षण में यह भी बताया गया कि राज्य द्वारा लिए गए कर्ज भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की निर्धारित सीमा के भीतर रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि कर्ज को अभी भी वित्तीय रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।
कर्ज पर औसत ब्याज दर में गिरावट
सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया कि मार्च 2024 में बकाया कर्ज पर औसत ब्याज दर 7.28% थी, जो मार्च 2025 तक घटकर 7.11% होने की संभावना है।
- यह गिरावट यह संकेत देती है कि राज्य पर कर्ज चुकाने का बोझ कम होगा।
- कम ब्याज दर के कारण राज्य को वित्तीय रूप से राहत मिलेगी और बजट में अन्य विकास योजनाओं के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल कर्ज 70,000 करोड़ से अधिक
मंगलवार को लिए गए 5,600 करोड़ रुपये के कर्ज को मिलाकर, वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य द्वारा लिया गया कुल कर्ज 70,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
- यह दिखाता है कि बजट 2026 के लिए सरकार ने वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कदम उठाए हैं।
- चालू वित्तीय वर्ष के खर्चों और विकास योजनाओं को पूरा करने के लिए अनुपूरक बजट भी पेश किया गया।
- विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम राज्य की आर्थिक मजबूती और विकास योजनाओं को जारी रखने के लिए जरूरी था।
राज्य की वित्तीय मजबूती और बजट प्रबंधन
हालांकि मध्य प्रदेश पर कर्ज बढ़ा है, सरकार का दावा है कि राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत है।
- राजस्व संग्रह में वृद्धि और केंद्रीय करों में राज्य के हिस्से में बढ़ोतरी की संभावना
- वित्तीय घाटा नियंत्रित और बजट संतुलित रखने की नीति
- कोविड महामारी के बावजूद वित्तीय अनुशासन का पालन
विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य की वित्तीय नीतियों ने मध्य प्रदेश को आर्थिक संकटों के दौरान भी संतुलित वित्तीय स्थिति बनाए रखने में मदद की है।
निवेशकों और जनता के लिए संदेश
- मध्य प्रदेश पर कर्ज बढ़ा है, लेकिन ब्याज दर कम होने से वित्तीय दबाव कम रहेगा।
- राज्य सरकार की वित्तीय योजनाएं और बजट प्रबंधन विकास कार्यों को निरंतर जारी रखने में सक्षम हैं।
- नए बजट और आर्थिक सर्वेक्षण से यह संकेत मिलता है कि राज्य की अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बजट से एक दिन पहले लिया गया ₹5,600 करोड़ का कर्ज दर्शाता है कि राज्य को वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्काल कदम उठाने पड़े। कुल कर्ज अब 4.90 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है, लेकिन औसत ब्याज दर में कमी और राजस्व संग्रह में वृद्धि की संभावना इसे संतुलित बनाती है।
आर्थिक सर्वेक्षण और बजट 2026 से यह स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश विकास दर, वित्तीय अनुशासन और बजट प्रबंधन में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
भले ही कर्ज बढ़ा हो, राज्य की आर्थिक मजबूती, विकास योजनाओं और बजट प्रबंधन से यह संकेत मिलता है कि मध्य प्रदेश अपनी वित्तीय चुनौतियों से निपटने और विकास को जारी रखने में सक्षम है।

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