27वाँ क्षेत्रीय अधिवेशन Jain मिलन शाखा चंदेरी का भव्य आयोजन
समाज एकता, तीर्थ सुरक्षा और भियादांत महामहोत्सव 2026 के लिए सहयोग का आह्वान
चंदेरी। भारतीय Jain मिलन का 27वाँ क्षेत्रीय अधिवेशन जैन मिलन शाखा चंदेरी के तत्वावधान में पावन तीर्थ श्री दिगंबर Jain अतिशय क्षेत्र खंदारगिरि में बड़े हर्षोल्लास और धार्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। यह अधिवेशन समाज के विभिन्न वर्गों, नगरों और शाखाओं के प्रतिनिधियों के लिए संवाद, संगठन सुदृढ़ीकरण और तीर्थ विकास का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।
इस अधिवेशन में गुना, अशोकनगर, देवास, चंदेरी, विदिशा, भोपाल, गंजबासौदा, मुंगावली सहित कई अन्य नगरों की 300 से अधिक शाखाओं के प्रतिनिधियों एवं वीर-वीरांगनाओं ने भाग लिया। उपस्थित समाजजन, साधु-साध्वियां और युवाओं ने मिलकर इस आयोजन को और भी जीवंत बनाया।
प्रमुख अतिथि और कार्यक्रम की अध्यक्षता
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे:
- राष्ट्रीय विशेष संरक्षक: अतिवीर विजय जैन (गुना)
- महामंत्री: अतिवीर अजय जैन (सहारनपुर)
- मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष: अतिवीर नरेशचंद्र जैन (देहरादून)
- कार्यकारी अध्यक्ष (दक्षिण क्षेत्र): अतिवीर नरेंद्र जैन
- राष्ट्रीय मंत्री: अतिवीर नरेश जैन (अशोकनगर)
कार्यक्रम की अध्यक्षता क्षेत्रीय अध्यक्ष अतिवीर प्रमोद जैन चौधरी ने की। इसके अलावा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अतिवीर विनय जैन (एडवोकेट, गुना) ने कार्यक्रम का संचालन किया और आभार व्यक्त किया क्षेत्रीय मंत्री वीर प्रणय जैन (गंजबासौदा) ने।
समाज की एकता और उत्थान पर जोर
अधिवेशन में राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री अतिवीर डॉ. प्रमोद Jain ने अपने संबोधन में समाज की एकता और उत्थान के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन समाज केवल धार्मिक आस्था का समूह नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सशक्त भागीदारी, सेवा और सहयोग के माध्यम से इसे सकारात्मक दिशा में विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने उपस्थित समाजजनों से निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया:
- Jain तीर्थ क्षेत्रों की सुरक्षा – तीर्थ स्थल हमारी आस्था और संस्कृति के प्रतीक हैं, और इनके संरक्षण में हर समाजजन की भागीदारी अनिवार्य है।
- साधु-साध्वियों के विहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था – साधु-साध्वियों के सुरक्षित आवागमन और तीर्थ यात्रा के लिए सड़क सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर ध्यान देना आवश्यक है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवा कार्य – आने वाले समय में समाज के विकास के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी जाए।
भियादांत महामहोत्सव 2026 का विमोचन
अधिवेशन का सबसे विशेष आकर्षण भियादांत महामहोत्सव 2026 का बैनर और पत्रिका का राष्ट्रीय पदाधिकारियों द्वारा विधिवत विमोचन था।
इस अवसर पर राष्ट्रीय मंत्री अतिवीर नरेश जैन ने समाजजनों से अपील की कि वे:
- आगामी महामहोत्सव में कलश लेकर सहभागी बनें।
- तन-मन-धन से सहयोग प्रदान करके क्षेत्र के विकास में योगदान करें।
उन्होंने जोर देकर कहा कि तीर्थ क्षेत्र हमारी आस्था और संस्कृति के केंद्र हैं। इनके संरक्षण और संवर्द्धन में समाज की सक्रिय भागीदारी ही इसे स्थायी और प्रभावशाली बना सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं, बल्कि सामाजिक सहयोग और तीर्थ स्थल पर स्वयंसेवी कार्यों में भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
क्षेत्रीय अधिवेशन का महत्व
भारतीय Jain मिलन का यह क्षेत्रीय अधिवेशन केवल एक सामाजिक या धार्मिक कार्यक्रम नहीं है। यह समाज की संगठनात्मक शक्ति, एकता और विकास की दिशा को तय करने वाला मंच है। इस अधिवेशन में भाग लेने वाले सभी शाखा प्रतिनिधियों का उद्देश्य है:
- समाज के नवयुवकों और युवतियों को सशक्त और जागरूक बनाना।
- संगठनात्मक रूप से मजबूत नेटवर्क तैयार करना।
- आगामी महामहोत्सव और अन्य धार्मिक आयोजनों में समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
समाज और युवा सहभागिता
अधिवेशन में उपस्थित युवा समाजजनों ने भी अपनी भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि युवा शक्ति को जोड़ना और उन्हें समाज की गतिविधियों में शामिल करना ही जैन समाज के भविष्य की सफलता की कुंजी है। अधिवेशन में युवाओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि समाजिक कार्यों में भागीदारी और तीर्थ क्षेत्र के संरक्षण में योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
साथ ही, महिलाओं की सहभागिता भी इस अधिवेशन का विशेष आकर्षण रही। महिला समाजजनों ने अपनी भागीदारी के माध्यम से यह संदेश दिया कि सर्वांगीण विकास और सेवा कार्यों में महिलाओं का योगदान समाज के उत्थान के लिए अनिवार्य है।
समापन और भविष्य के संकल्प
खंदारगिरि की पावन धरा पर संपन्न यह 27वाँ क्षेत्रीय अधिवेशन समाज एकता, संगठन सुदृढ़ीकरण और तीर्थ विकास के संकल्प के साथ समाप्त हुआ। उपस्थित समाजजनों ने सामूहिक रूप से आगामी आयोजनों को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया।
अधिवेशन के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट हुआ कि:
- तीर्थ क्षेत्र केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि संस्कृति और सामाजिक पहचान के केंद्र हैं।
- समाज के प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी है कि वे तीर्थ क्षेत्र और साधु-साध्वियों के सुरक्षा एवं विकास में योगदान दें।
- संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण और समाजिक सहभागिता ही आने वाले कार्यक्रमों और महामहोत्सवों की सफलता की गारंटी है।
इस अधिवेशन के बाद यह स्पष्ट है कि जैन समाज ने न केवल एकता और संगठनात्मक शक्ति दिखाई, बल्कि आने वाले भियादांत महामहोत्सव 2026 के लिए सामूहिक तत्परता और सहयोग का भी संकल्प लिया।
