Jaipur मेट्रो फेज-2 को लेकर हलचल, 28 फरवरी को शिलान्यास संभव
Jaipur में मेट्रो विस्तार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। संभावना जताई जा रही है कि PM नरेंद्र मोदी अपने प्रस्तावित अजमेर दौरे के दौरान जयपुर मेट्रो फेज-2 का शिलान्यास कर सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन मेट्रो प्रशासन और राज्य स्तर पर तैयारियों की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है।
सूत्रों के अनुसार, PM का 28 फरवरी को अजमेर दौरा प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इसी अवसर पर जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण की आधारशिला रखी जा सकती है। फिलहाल फेज-2 की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को केंद्र सरकार की कैबिनेट से अंतिम मंजूरी मिलना शेष है। अधिकारियों को उम्मीद है कि 28 फरवरी से पहले इसे स्वीकृति मिल सकती है, जिससे शिलान्यास का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।
Jaipur मेट्रो फेज-2: क्या है प्रस्तावित योजना?
Jaipur मेट्रो का दूसरा चरण शहर की परिवहन संरचना को व्यापक रूप से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस चरण में मेट्रो लाइन टोंक रोड स्थित रिंग रोड से शुरू होकर विद्याधर नगर के टोड़ी मोड़ तक जाएगी।
परियोजना की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- कुल लंबाई: 42.80 किलोमीटर
- कुल प्रस्तावित स्टेशन: 36
- भूमिगत स्टेशन: 2
- भूमिगत कॉरिडोर की लंबाई: लगभग 3 किलोमीटर
इस रूट से शहर के पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा। इससे रोजाना हजारों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और निजी वाहनों की संख्या को देखते हुए यह विस्तार अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।
प्रहलादपुरा से होगी शुरुआत
दूसरे चरण के अंतर्गत प्रहलादपुरा में जयपुर मेट्रो का पहला स्टेशन विकसित किया जाएगा। पहले पैकेज में प्रहलादपुरा रिंग रोड से पिंजरापोल गौशाला तक परिचालन प्रस्तावित है। इस हिस्से के लिए करीब 918 करोड़ रुपए का कार्यादेश जारी किया जा चुका है।
यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और रिंग रोड से जुड़ाव के कारण भविष्य में आवागमन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। मेट्रो स्टेशन बनने से आसपास के रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रहलादपुरा से शुरुआत करने का निर्णय रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र शहर के बाहरी हिस्से को मुख्य शहरी नेटवर्क से जोड़ने में सहायक होगा।
शहरी यातायात पर पड़ेगा असर
Jaipur में पिछले कुछ वर्षों में वाहन संख्या में तेज वृद्धि हुई है। प्रमुख मार्गों पर सुबह और शाम के समय लंबा जाम आम बात हो गई है। ऐसे में मेट्रो फेज-2 के शुरू होने से सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो सकती है।
मेट्रो का विस्तार न केवल यात्रा समय कम करेगा, बल्कि प्रदूषण स्तर में कमी लाने में भी सहायक होगा। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बड़ी संख्या में लोग मेट्रो को प्राथमिक परिवहन साधन के रूप में अपनाते हैं, तो कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है।
इसके अलावा, मेट्रो स्टेशनों के आसपास ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) की संभावनाएँ भी बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय व्यापार, आवास और रोजगार के अवसरों को गति मिलेगी।
मंजूरी पर टिकी निगाहें
हालांकि तैयारियां जारी हैं, लेकिन अंतिम निर्णय केंद्र सरकार की कैबिनेट से डीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद ही होगा। परियोजना की लागत, वित्तीय साझेदारी और तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है।
यदि 28 फरवरी से पहले मंजूरी मिल जाती है, तो प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे के दौरान शिलान्यास संभव है। अन्यथा कार्यक्रम की तारीख आगे भी बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर संभावित आयोजन को लेकर रूपरेखा तैयार की जा रही है।
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी मिलेगा बढ़ावा
मेट्रो परियोजना के समानांतर सड़क अवसंरचना को भी मजबूत किया जा रहा है। इसी क्रम में Manoharpur–Dausa Highway को फोरलेन किए जाने की योजना है।
यह परियोजना 818.46 करोड़ रुपए की लागत से पूरी होगी। 18 फरवरी को इसके टेंडर जारी किए जाने प्रस्तावित हैं। इस हाईवे के विस्तार के तहत:
- 9 नई पुलियाओं का निर्माण
- 2 अंडरपास का निर्माण
हाईवे के चौड़ीकरण से जयपुर और आसपास के जिलों के बीच यातायात सुगम होगा। औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी इससे बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि मेट्रो और हाईवे जैसी परियोजनाएं मिलकर क्षेत्र के समग्र विकास की आधारशिला तैयार करती हैं। शहरी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार से निवेश आकर्षित होता है और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
Jaipur मेट्रो फेज-2 केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्य के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा, स्टेशनों के आसपास व्यावसायिक गतिविधियों में वृद्धि होगी।
रियल एस्टेट क्षेत्र में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। मेट्रो कनेक्टिविटी वाले इलाकों में संपत्तियों की मांग और कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना रहती है।
सामाजिक रूप से देखें तो मेट्रो सुरक्षित, सुलभ और समयबद्ध परिवहन विकल्प प्रदान करती है। छात्र, नौकरीपेशा लोग, महिलाएं और बुजुर्ग—सभी के लिए यह एक सुविधाजनक साधन बन सकता है।
आगे की राह
फिलहाल सबकी निगाहें 28 फरवरी पर टिकी हैं। यदि प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान शिलान्यास होता है, तो यह जयपुर के बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा।
राजधानी के नागरिक लंबे समय से मेट्रो नेटवर्क के विस्तार की मांग कर रहे थे। फेज-2 के क्रियान्वयन से शहर की परिवहन व्यवस्था में व्यापक बदलाव की उम्मीद है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र की मंजूरी कब मिलती है और परियोजना का कार्य किस गति से आगे बढ़ता है। यदि योजनानुसार काम होता है, तो आने वाले वर्षों में जयपुर का यातायात परिदृश्य पूरी तरह बदल सकता है—जहां तेज, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन शहर की पहचान बनेगा।
