अभिभाषक संघ ने संजय कुमार सक्सेना की हत्या के विरोध में प्रतिवाद दिवस मनाया, लागू करने की मांग की “एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट”
नागदा, उज्जैन, MP ।
MP : करेरा, जिला शिवपुरी के वरिष्ठ और प्रतिष्ठित अभिभाषक संजय कुमार सक्सेना की हत्या के खिलाफ पूरे मध्यप्रदेश के अभिभाषक संगठनों में गहरी चिंता और आक्रोश व्याप्त है। इस घटना के विरोध में राज्य अधिवक्ता परिषद, जबलपुर के आव्हान पर अभिभाषक संघ नागदा, जिला उज्जैन ने सोमवार, 16 फरवरी 2026 को प्रतिवाद दिवस मनाया। इस दिन सभी अभिभाषकों ने न्यायालयीन कार्य से विरत रहते हुए अपने विरोध और सुरक्षा की मांग को सार्वजनिक रूप से व्यक्त किया।
प्रतिवाद दिवस का मुख्य उद्देश्य राज्य और केंद्र सरकार के ध्यान को इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करना था। संघ ने अपने ज्ञापन के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि प्रदेश में अभिभाषकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि हाल की घटनाओं ने कानून के कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ज्ञापन सौंपा गया
प्रतिवाद दिवस के दौरान, अभिभाषक संघ के अध्यक्ष विजय वर्मा एडवोकेट के नेतृत्व में संघ की सभी निर्वाचित कार्यकारिणी और सदस्य उपस्थित थे। इस मौके पर तहसीलदार मधु नायक को PM और MP के CM के नाम से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में प्रमुख रूप से मध्यप्रदेश में “एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट” लागू करने की मांग की गई।
ज्ञापन में संघ ने यह भी कहा कि दोषियों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले चलाए जाएँ। साथ ही, यदि दोषी दोषसिद्ध होता है, तो उसे कड़ी से कड़ी सजा, जैसे फाँसी की सजा, दी जानी चाहिए। संघ ने यह भी उल्लेख किया कि प्रदेश के CM मोहन यादव, जो स्वयं एक अनुभवी अधिवक्ता हैं और उज्जैन जिला अभिभाषक संघ के सदस्य भी रह चुके हैं, इस मांग से पूर्व से परिचित हैं। उन्होंने उनसे आग्रह किया कि वे अपने पद और प्रभाव का उपयोग करते हुए राज्य में तत्काल एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू कर अभिभाषकों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करें।
ज्ञापन का वाचन संघ के सचिव जयेश जोशी एडवोकेट ने किया। इस दौरान उपस्थित सभी सदस्यगणों ने इस मांग का समर्थन करते हुए अपना सहयोग और समर्थन जताया।

संघ का विरोध और चिंता
अभिभाषक संघ ने इस अवसर पर कहा कि यदि सरकार ने अभिभाषकों की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी, तो इसका प्रभाव न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर पड़ेगा। संघ के नेताओं ने कहा कि हाल की घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि यदि अभिभाषक सुरक्षित नहीं होंगे, तो वे स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से न्यायालयीन कार्य नहीं कर पाएंगे। संघ ने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र कदम नहीं उठाए, तो अभिभाषक और संगठन अधिक कठोर आंदोलनों के लिए मजबूर होंगे।
संघ ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा कि यह सिर्फ एक मांग नहीं, बल्कि वर्षो पुरानी समस्या का समाधान है। MP के अभिभाषक कई वर्षों से एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग कर रहे हैं। संघ ने स्पष्ट किया कि यह अधिनियम केवल अधिवक्ताओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे न्यायिक ढांचे और समाज के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने का जरिया है।
संघ की अन्य गतिविधियाँ
प्रतिवाद दिवस के दौरान संघ ने यह भी घोषणा की कि वे पूरे प्रदेश में इस प्रकार के विरोध और जागरूकता कार्यक्रम जारी रखेंगे। संघ ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न्यायपालिका और सरकार के प्रति उनके विश्वास को बनाए रखने का माध्यम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संघ अब केंद्र और राज्य सरकार के साथ मिलकर कानूनी सुरक्षा के लिए आवश्यक सुझाव और मसौदा तैयार कर रहा है।
संघ के नेताओं ने मीडिया और नागरिकों से भी अपील की कि वे इस मांग में उनके साथ खड़े हों और अभिभाषकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहयोग करें। संघ के अनुसार, यह आंदोलन केवल एक संगठन का नहीं, बल्कि पूरे न्यायिक समाज का आंदोलन है।

भविष्य की रणनीति
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि अब वे केवल ज्ञापन देने तक ही सीमित नहीं रहेंगे। यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होती है, तो वे न्यायालयीन कार्य से विरत रहकर और सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन कर सकते हैं। संघ ने यह भी कहा कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी समान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि सरकार पर दबाव बढ़ाया जा सके और एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जा सके।
निष्कर्ष
अभिभाषक संघ नागदा ने इस मौके पर यह साबित कर दिया कि वे न केवल अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं, बल्कि वे न्यायपालिका और समाज के हित के लिए भी तत्पर हैं। संघ का यह कदम MP में न्याय व्यवस्था की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
नागदा से संवाददाता जीवनलाल जैन की रिपोर्ट अनुसार, यह आयोजन अभिभाषकों की सुरक्षा के मुद्दे को राज्य और केंद्र सरकार के सामने प्रमुख रूप से लाने में सफल रहा। संघ ने स्पष्ट किया कि उनका प्रयास रहेगा कि जल्द से जल्द एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू हो और प्रदेश के सभी अधिवक्ताओं को कानूनी सुरक्षा मिले।
