MP का बजट सत्र हंगामे के बीच शुरू
MP विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी 2026 को शोर-शराबे और राजनीतिक टकराव के बीच शुरू हुआ। सत्र की औपचारिक शुरुआत राज्यपाल मंगू भाई पटेल के अभिभाषण से हुई। हालांकि, विपक्ष के विरोध और नारेबाजी ने सदन का माहौल गरमाया। बजट सत्र का यह पहला दिन राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे का दृश्य पेश कर गया।
राज्यपाल के लगभग 26 मिनट के अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियों, विकास परियोजनाओं और आगामी लक्ष्यों का विवरण पेश किया गया। अभिभाषण के दौरान विपक्षी दलों ने कई बार हस्तक्षेप किया और नारेबाजी की, लेकिन राज्यपाल ने शांतिपूर्वक अपना अभिभाषण पूरा किया।
MP राज्यपाल का अभिभाषण: विकास और लक्ष्यों का खाका
राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने अपने अभिभाषण में कहा कि देश “अमृत काल” की दहलीज पर खड़ा है, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकल्पित किया है। उन्होंने प्रदेश में उद्योगों के अनुकूल वातावरण, भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, और वर्ष 2047 तक मध्य प्रदेश को 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का उल्लेख किया।
साथ ही उन्होंने 2026 को कृषि वर्ष घोषित करने और पीएम जनमन योजना के तहत 1.35 लाख आवासों के निर्माण पर भी प्रकाश डाला। उनके अभिभाषण में उज्जैन में शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के प्रयासों और नई शिक्षा नीति के तहत किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में बुनियादी ढांचे, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार और निवेश को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने व्यापार, उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की विभिन्न पहलों का भी जिक्र किया।
विपक्ष का विरोध और हंगामा
अभिभाषण के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हस्तक्षेप करते हुए आरोप लगाया कि नल-जल योजना और इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों जैसे गंभीर मुद्दों को भाषण में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद कांग्रेस के विधायक लगातार नारेबाजी करने लगे।
हंगामे के बावजूद राज्यपाल ने अपना अभिभाषण पूरा किया। राज्यपाल के प्रस्थान के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जो अंश पढ़ा नहीं जा सका, उसे पढ़ा हुआ माना जाएगा। इसके बाद सदन की कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित कर दी गई।
Budget सत्र में कर्ज पर सियासत
Budget सत्र के साथ ही प्रदेश के बढ़ते कर्ज को लेकर राजनीतिक सियासत भी तेज हो गई। कांग्रेस ने सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि बजट जनता केंद्रित होना चाहिए, न कि कर्ज आधारित।
वहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और विधायक पन्ना लाल शाक्य ने पलटवार किया। उनका कहना है कि लिया गया कर्ज विकास और जनकल्याण योजनाओं पर खर्च हो रहा है। शाक्य ने कहा, “जिसके पास घी है वह घी पी रहा है, जिसके पास पानी है वह पानी पिए।” उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बजट सत्र में कर्ज और वित्तीय योजनाओं को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच टकराव जारी रहेगा।
सत्र का एजेंडा और तैयारी
16 फरवरी से शुरू हुए बजट सत्र में कुल 3,478 प्रश्नों की सूचनाएं दी गई हैं। सत्र में 236 ध्यानाकर्षण प्रश्न, 10 स्थगन प्रस्ताव, 41 अशासकीय संकल्प और शून्यकाल में 83 प्रश्न सूचीबद्ध हैं।
कांग्रेस ने विधायक दल की बैठक में रणनीति तय की है, वहीं भाजपा भी समन्वय बैठक कर जवाबी तैयारी में जुटी हुई है। दोनों दल इस सत्र को जनता के मुद्दों पर अपनी सियासी पकड़ मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रहे हैं।
सत्र के दौरान कृषि, जल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा की उम्मीद है। वहीं बजट की प्राथमिकताओं, विकास योजनाओं और निवेश को लेकर राजनीतिक दलों की टकरावपूर्ण बहस जारी रहेगी।
MP प्रदेश के लिए विकास और लक्ष्यों की रूपरेखा
राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया:
- उद्योग और निवेश: भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से निवेश को बढ़ावा देना।
- कृषि विकास: वर्ष 2026 को ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा।
- आवास योजना: पीएम जनमन योजना के तहत 1.35 लाख आवासों का निर्माण।
- पर्यावरण संरक्षण: उज्जैन में शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के प्रयास।
- शिक्षा सुधार: नई शिक्षा नीति के तहत स्कूल और कॉलेज स्तर पर सुधार।
राज्यपाल ने कहा कि इन पहलों के जरिए मध्य प्रदेश को वर्ष 2047 तक 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
निष्कर्ष
MP का बजट सत्र शुरू होते ही हंगामे और राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया। राज्यपाल के अभिभाषण ने सरकार की उपलब्धियों और लक्ष्यों को स्पष्ट किया, जबकि विपक्ष ने कर्ज, जल संकट और जनकल्याण योजनाओं पर सवाल उठाए।
सत्र का पूरा ध्यान अब इस बात पर है कि राजनीतिक हंगामे से ऊपर उठकर जनता के मुद्दों पर गंभीर चर्चा और समाधान कितनी तेजी से हो पाता है। 6 मार्च तक चलने वाले इस सत्र में प्रदेश के विकास, बजट और वित्तीय प्रबंधन पर ठोस निर्णय लेने की उम्मीद है।
