Mahashivratri 2026: श्री महाकालेश्वर में उमड़ा आस्था का सैलाब, दोपहर 2 बजे तक 2.50 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
Mahashivratri के पावन अवसर पर धर्मनगरी उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा महाकाल के दरबार में रविवार तड़के से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। दोपहर 2 बजे तक करीब 2.50 लाख भक्तों ने दर्शन कर लिए थे, जबकि शाम तक यह संख्या 5 लाख के पार पहुंचने की संभावना जताई गई।
44 घंटे तक खुले रहेंगे मंदिर के पट
Mahashivratri के विशेष पर्व पर मंदिर के पट तड़के 2:30 बजे विधि-विधान के साथ खोले गए। यह एकमात्र अवसर होता है जब बाबा महाकाल के पट लगातार लगभग 44 घंटे तक खुले रहते हैं। पूरे दिन और रात विशेष पूजन-अनुष्ठान, जलाभिषेक और श्रृंगार की भव्य परंपरा निभाई जाती है। श्रद्धालुओं को निर्बाध दर्शन कराने के लिए प्रशासन और मंदिर समिति ने व्यापक इंतजाम किए हैं।
मंत्रोच्चार के साथ प्रारंभ हुए अनुष्ठान
प्रातःकालीन बेला में प्रथम घंटाल बजाकर पूजन की शुरुआत की गई। गर्भगृह में स्थापित प्रतिमाओं का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन हुआ और ‘हरिओम’ का जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती, जलाभिषेक और पंचामृत से अभिषेक किया गया। पंचामृत में दूध, दही, घी, शक्कर और फलों का रस शामिल था।
अभिषेक के उपरांत भगवान महाकाल को भस्म रमाई गई। रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला तथा मोगरा और गुलाब की मालाओं से अलंकरण किया गया। भस्मार्ती में पासधारी श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया, साथ ही चलित भस्मार्ती के दर्शन की भी व्यवस्था रही। इसके बाद भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित कर बाबा को राजा स्वरूप में सजाया गया और पुष्पवर्षा की गई।
40 मिनट में दर्शन का दावा
जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं को लगभग 40 मिनट में दर्शन कराने का दावा किया था, जिस पर वह काफी हद तक खरा उतरता नजर आया। हालांकि अनुमानित संख्या की तुलना में भीड़ अपेक्षाकृत नियंत्रित रही, जिससे श्रद्धालुओं को निर्धारित समय में दर्शन मिलते रहे।
श्रद्धालु कर्कराज पार्किंग में वाहन खड़े कर चारधाम क्षेत्र तक पहुंचे, जहां से उन्हें लगभग 1.5 से 2 किलोमीटर पैदल चलकर मंदिर परिसर तक पहुंचना पड़ा। रास्ते भर ‘जय श्री महाकाल’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा।
आठ लेयर का जिगजैग मार्ग
भीड़ प्रबंधन के लिए चारधाम क्षेत्र में आठ लेयर का जिगजैग मार्ग बनाया गया। सामान्य दर्शनार्थी शक्तिपथ और त्रिवेणी संग्रहालय के पास से नंदी द्वार, श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन, फैसिलिटी सेंटर और टनल मार्ग से होते हुए गणेश मंडपम् तक पहुंचे। दर्शन के बाद आपातकालीन निर्गम द्वार से बाहर निकासी की व्यवस्था की गई, जिससे भीड़ का दबाव कम रहे।
मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। पुलिस बल, स्वयंसेवक और प्रशासनिक अधिकारी लगातार निगरानी में जुटे रहे।
विशेष आकर्षण: दोपहर की भस्मार्ती
Mahashivratri वर्ष का वह विशेष दिन है जब दोपहर 12 बजे भस्मार्ती आयोजित की जाती है। सामान्य दिनों में भस्मार्ती प्रातःकाल होती है, लेकिन इस पर्व पर दोपहर की आरती का विशेष महत्व है। 16 फरवरी की सुबह सप्तधान्य श्रृंगार और सेहरे के दर्शन होंगे। बताया गया कि करीब 3 क्विंटल फूलों से बना सेहरा भक्तों के बीच वितरित किया जाएगा।
जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति
Mahashivratri पर कई विशिष्ट हस्तियों ने भी बाबा महाकाल के दर्शन किए। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की धर्मपत्नी सीमा यादव ने सपरिवार मंदिर पहुंचकर पूजन-अर्चन किया। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से उनका स्वागत किया गया।
उज्जैन-आलोट क्षेत्र के सांसद अनिल फिरोजिया ने भी परिवार सहित दर्शन कर देश की समृद्धि और विकास की कामना की।
फिल्म अभिनेत्री रुचि गुर्जर ने बाबा महाकाल के दर्शन कर अपनी आगामी फिल्म ‘घूंघट’ की सफलता के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि महाकाल के दरबार में आकर उन्हें अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ।
इसके अतिरिक्त भृतहरि गुफा के महंत रामनाथ महाराज और समाजसेवी रवि सोलंकी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भी पूजन कर जनकल्याण की कामना की।
भावनाओं से भरा वातावरण
करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल यात्रा कर जब श्रद्धालु गर्भगृह के समीप पहुंचे, तो कई भक्तों की आंखें नम हो गईं। किसी के चेहरे पर संतोष झलक रहा था, तो कोई हाथ जोड़कर भाव-विभोर खड़ा था। मंदिर परिसर में घंटियों की ध्वनि, शंखनाद और हर-हर महादेव के उद्घोष ने वातावरण को पूर्णतः शिवमय बना दिया।
श्रद्धालुओं का कहना था कि लंबी प्रतीक्षा के बाद बाबा के दर्शन मात्र से ही सारी थकान दूर हो गई। कई परिवार रातभर यात्रा कर सुबह तड़के मंदिर पहुंचे थे, ताकि विशेष पर्व पर बाबा के दर्शन का पुण्य प्राप्त कर सकें।
निष्कर्ष
Mahashivratri 2026 पर उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर आस्था, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम बना। सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं और सतत अनुष्ठानों के बीच लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। भक्ति और श्रद्धा से सराबोर यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा का भी जीवंत उदाहरण है।
