वेदी प्रतिष्ठा पर निकली विशाल जिनवाणी पालकी यात्रा, सकल Jain समाज ने किया आत्मीय अभिनंदन आज तिलक महोत्सव
नितिन जैन
धर्मप्रचारक
जबलपुर
9893037930
जबलपुर: मध्य भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में Jain समाज का योगदान अत्यंत गौरवपूर्ण रहा है। इसी परंपरा को समर्पित होकर श्री तारण तरण दिगंबर जैन चैत्यालय में चल रहे रत्नत्राय महोत्सव के द्वितीय दिवस पर वेदी प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर सकल तारण तरण दिगंबर जैन समाज ने धर्म, भक्ति और श्रद्धा का अनुपम मिलन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में वेदी सूतन कर्ता रामडिम मूरी परिवार ने सभी अनुष्ठानों में भाग लेकर धर्माराधना का गौरव बढ़ाया।
मीडिया प्रभारी दीपक राज जैन ने बताया कि प्रातः काल की मंगल बेला में सभी ने मंत्र जाप के साथ दिन का शुभारंभ किया। इसके बाद मंदिर विधि के माध्यम से देव, शास्त्र, गुरु और भगवन्तों की आराधना की गई तथा दान प्रभावना की गई। इस दौरान गुरु भाइयों ने अपूर्व उत्साह दिखाते हुए स्वर्ण कलशों सहित ध्वजारोहण की बोली ली और अपने सामर्थ्य का सदुपयोग किया।
गणमान्य अतिथियों ने किया अभिनंदन
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में विधायक लखन घनघोरिया, अभिलाष पांडे, अशोक रोहानी, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू भाई, नगर निगम अध्यक्ष रिंकू विज, विनय सक्सेना सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। उन्होंने चैत्यालय के मार्ग को संत तारण तरण मार्ग तथा एक चौंक को तारण तरण चौंक के रूप में नामित करने की घोषणा की, जिसके लिए समाज ने उनका आत्मीय अभिनंदन किया।
अतिथियों ने वेदी प्रतिष्ठा और धार्मिक अनुष्ठानों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को धार्मिक मूल्यों और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ते हैं। उन्होंने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया कि वे कार्यक्रम की गरिमा बनाए रखें और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न होने दें।

चल समारोह में दिखा अपूर्व उत्साह
द्वितीय दिवस के प्रमुख आकर्षण चाल समारोह में विशाल रजत पालकी एवं रथ के माध्यम से मां जिनवाणी की शोभायात्रा निकाली गई। सौभाग्यशाली परिवारों ने बग्गियों में स्वर्ण कलश और धर्मध्वज सजाकर नगर भ्रमण किया। इस दौरान मंगलगान और भजन कीर्तन के साथ नगर में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण व्याप्त रहा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में Jain बंधु उपस्थित थे, जिनमें पूर्व विधायक शरद जैन, पंचायत सभा अध्यक्ष कैलाश Jain , अनिल जैन गुड्डा सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए। चल समारोह नगर भ्रमण करते हुए श्री तारण तरण चैत्यालय, शुक्रवारी बजरिया तक पहुंचा, जहां सौभाग्यशाली परिवारों ने कलशारोहण कर धर्मध्वजा फहराई।
वेदी और कलशों का महत्त्व
राजू Jain परासिया ने बताया कि मूल बेदी का मुख्य कलश नाथूराम, धन्य कुमार, शरद कुमार पुखराज परिवार ने चढ़ाया। एक नंबर बेदी का मुख्य कलश अरविंद कुमार और हेमंत कुमार समैया, दो नंबर बेदी का मुख्य कलश अनिल कुमार और मुकेश कुमार दिगंबर परिवार द्वारा चढ़ाया गया।
मुख्य शिखर का कलश नाथूराम धनकुमार पुखराज परिवार ने समर्पित किया, जबकि एक नंबर शिखर का कलश विकास कुमार और आकाश कुमार सुमैया खुरई परिवार ने, और दो नंबर शिखर का कलश राकेशकुमार, मनोज मंटू, स्वतंत्र जैन बाबू साहब कुंडा वाला परिवार ने चढ़ाया। मंदिर के शिखर पर स्वर्ण पॉलिश युक्त धर्मध्वज जिनेंद्र कुमार, आशीष कुमार, जतिन और केतन समैया भगतजी परिवार ने समर्पित किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भजन संध्या
रात्रि में मंदिर प्रांगण में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ाया। दिल्ली से आए प्रसिद्ध जैन भजन गायक संजीव जैन ने अपने सुमधुर भजनों से समवशरण मंडप को गुंजायमान कर दिया। श्रद्धालुओं ने भक्ति और नृत्यगान के माध्यम से आनंद उत्सव मनाया।
आज तिलक महोत्सव
महोत्सव के तृतीय दिवस, रविवार, 15 फरवरी 2026 को तिलक महोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर सम्यक चारित्र महोत्सव का आयोजन होगा, जिसमें मंत्र जाप, प्रभात फेरी, मंगल प्रवचन और रामडिम मूरी परिवार के श्रावक-श्राविकाओं द्वारा वेदी सूतन किया जाएगा। पूरे समाज द्वारा तिलक की बृहद मंदिर विधि संपन्न कराई जाएगी।
शरद Jain पुखराज और नितिन जैन ने बताया कि तिलक महोत्सव धार्मिक भावनाओं का प्रतीक है और समाज को एकजुट करने, धार्मिक संस्कारों को बढ़ावा देने और युवाओं को अपनी जैन परंपरा से जोड़ने का एक अनूठा अवसर है। इस महोत्सव में समाज के हर वर्ग के सदस्य सक्रिय रूप से भाग लेंगे और वेदी प्रतिष्ठा का महत्व, धार्मिक शिक्षा और भक्ति की भावना को अनुभव करेंगे।
निष्कर्ष:
श्री तारण तरण दिगंबर जैन Jain चैत्यालय में वेदी प्रतिष्ठा एवं चल समारोह ने जबलपुर नगर में धार्मिक उल्लास और सांस्कृतिक उत्सव का माहौल उत्पन्न कर दिया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन है, बल्कि जैन समाज के सामाजिक एकता, संस्कृति और परंपरा के प्रति समर्पण को भी उजागर करता है। तिलक महोत्सव के माध्यम से समाज के सदस्य इस भव्य आयोजन को और भी प्रभावशाली बनाएंगे, जिससे धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का सम्मान एवं संवर्धन होगा।
