Indore : हुकमचंद मिल रजिस्ट्री में 26 करोड़ रुपए की स्टाम्प ड्यूटी चोरी, गृह निर्माण मंडल पर जुर्माना
Indore । हुकमचंद मिल की जमीन की रजिस्ट्री मामले में मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल (MP Housing Board) द्वारा 26 करोड़ रुपए की स्टाम्प ड्यूटी की चोरी का मामला सामने आया है। पंजीयन विभाग ने शिकायत के बाद इस मामले की जांच की और गृह निर्माण मंडल को दोषी ठहराते हुए उस पर दो प्रतिशत का जुर्माना भी लगाया। यह शायद पहला ऐसा मामला है जब एक सरकारी विभाग को दूसरे सरकारी विभाग पर स्टाम्प ड्यूटी चोरी का दोषी पाया गया है।
हुकमचंद मिल की जमीन का मालिक होने के कारण इंदौर नगर निगम ने इस जमीन पर विकास करने के लिए इसकी रजिस्ट्री मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल के नाम पर कराई। यह रजिस्ट्री करीब 218 करोड़ रुपए की की गई थी। इसके साथ ही इस मिल के मजदूरों के बकाया 421 करोड़ रुपए का भुगतान भी गृह निर्माण मंडल ने किया, जो मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार किया गया।
मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता प्रमोद द्विवेदी ने इस मामले में शिकायत की थी। उन्होंने कहा कि जमीन की कीमत में मजदूरों को भुगतान की गई राशि भी शामिल मानी जानी चाहिए थी। यदि इस राशि को कीमत में शामिल किया जाता, तो गृह निर्माण मंडल द्वारा 26 करोड़ रुपए की स्टाम्प ड्यूटी चोरी नहीं होती।
शिकायत और जांच प्रक्रिया
इस मामले की शिकायत वरिष्ठ जिला पंजीयन क्षेत्र 3 में दर्ज की गई। वरिष्ठ जिला पंजीयक समरथमल राठौर ने शिकायत प्राप्त होने के बाद गृह निर्माण मंडल और नगर निगम को नोटिस जारी किया और उनसे जवाब मांगा। जवाब देने में नगर निगम ने काफी समय लिया। इसके बाद दोनों विभागों ने अपने जवाब पेश किए।
शिकायतकर्ता प्रमोद द्विवेदी ने अपनी शिकायत के समर्थन में दस्तावेज भी प्रस्तुत किए, जिनमें रजिस्ट्री और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड शामिल थे। इन दस्तावेजों और जांच के आधार पर जिला पंजीयक ने निर्णय दिया कि गृह निर्माण मंडल इस मामले में स्टाम्प ड्यूटी चोरी का दोषी है। मंडल से 26 करोड़ रुपए की स्टाम्प ड्यूटी वसूल करने के साथ ही दो प्रतिशत का जुर्माना भी लगाया गया।
क्या है स्टाम्प ड्यूटी चोरी का मामला?
हुकमचंद मिल की जमीन की रजिस्ट्री 23 मार्च 2025 को नगर निगम द्वारा गृह निर्माण मंडल के नाम कराई गई। इस रजिस्ट्री में जमीन की कीमत 218 करोड़ रुपए बताई गई। इस आधार पर खरीदार, यानी गृह निर्माण मंडल ने करीब 32 करोड़ रुपए स्टाम्प ड्यूटी के रूप में जमा किए।
लेकिन इसमें मिल के मजदूरों को दिए गए बकाया भुगतान 421 करोड़ रुपए को कीमत में शामिल नहीं किया गया। इसके कारण स्टाम्प ड्यूटी में लगभग 26 करोड़ रुपए की चोरी हुई। यह मामला न केवल इंदौर के लिए, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के सरकारी कामकाज और पारदर्शिता के लिए चौंकाने वाला है।
विशेषज्ञों और राजनीतिक प्रतिक्रिया
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सरकारी विभागों के बीच पारदर्शिता और वित्तीय निगरानी की कमी को उजागर करता है। जब दो सरकारी विभागों के बीच आर्थिक लेन-देन हो, तो इसे पूरी तरह से रिकॉर्ड करना और सभी ड्यूटी का भुगतान करना अनिवार्य होता है।
मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता प्रमोद द्विवेदी ने कहा कि यदि मजदूरों को भुगतान की गई राशि को रजिस्ट्री की कीमत में शामिल किया गया होता, तो स्टाम्प ड्यूटी चोरी नहीं होती। उन्होंने सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला सरकारी विभागों की वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है। पहली बार एक सरकारी विभाग को दूसरे सरकारी विभाग पर स्टाम्प ड्यूटी चोरी का दोषी ठहराना इसे और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।
जुर्माने और भविष्य की कार्रवाई
जिला पंजीयक के फैसले के अनुसार, गृह निर्माण मंडल से 26 करोड़ रुपए की चोरी गई स्टाम्प ड्यूटी वसूल की जाएगी और उस पर दो प्रतिशत का जुर्माना भी लगाया जाएगा। इससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि सरकारी विभागों को भी वित्तीय नियमों और ड्यूटी के मामलों में जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि भविष्य में ऐसे मामलों से बचने के लिए:
- सभी सरकारी रजिस्ट्री और लेन-देन का पूर्ण ऑडिट होना चाहिए।
- स्टाम्प ड्यूटी और अन्य करों का हिसाब सही ढंग से रखा जाए।
- विभागों के बीच वित्तीय लेन-देन पूरी पारदर्शिता के साथ हो।
यदि इन नियमों का पालन नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसे मामले बढ़ सकते हैं और सरकारी धन की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
हुकमचंद मिल की पृष्ठभूमि
हुकमचंद मिल इंदौर के लिए एक महत्वपूर्ण औद्योगिक स्थल रहा है। इस मिल की जमीन पर नगर निगम द्वारा विकास कार्य किए जाने की योजना बनाई गई थी। मजदूरों के बकाया भुगतान, भूमि के अधिग्रहण और स्टाम्प ड्यूटी जैसे मामलों को सही तरीके से संभालना सरकार की जिम्मेदारी है।
लेकिन इस मामले में यह स्पष्ट हुआ कि वित्तीय लेन-देन और नियमों का पालन पूरी तरह नहीं हुआ। इससे सरकारी विभागों की जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
निष्कर्ष
हुकमचंद मिल की रजिस्ट्री में 26 करोड़ रुपए की स्टाम्प ड्यूटी चोरी का मामला मध्यप्रदेश के लिए गंभीर चेतावनी है। यह पहली बार हुआ है कि एक सरकारी विभाग को दूसरे सरकारी विभाग पर दोषी ठहराया गया और जुर्माना लगाया गया।
यह मामला न केवल वित्तीय पारदर्शिता और जिम्मेदारी की आवश्यकता को दर्शाता है, बल्कि भविष्य में सरकारी विभागों को अपने कामकाज में और अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता भी बताता है।
यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो ऐसे मामलों की संख्या बढ़ सकती है और जनता का विश्वास सरकारी विभागों पर कम हो सकता है।

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