7,000 करोड़ खर्च, लेकिन Smart City अधूरी: भोपाल समेत 7 जिलों में परियोजनाओं का काम रुका
MP में Smart City योजना के तहत अब तक 7,000 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कई परियोजनाएं अधूरी हैं। यह योजना 2015 में शुरू की गई थी, जिसमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, सागर, सतना और उज्जैन को शामिल किया गया था। केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने इस परियोजना के लिए पर्याप्त बजट जारी किया, लेकिन धरातल पर विकास अधूरा रह गया है।
स्मार्ट सिटी योजना का उद्देश्य आधुनिक बुनियादी ढांचा, बेहतर यातायात व्यवस्था, हरित क्षेत्र और नागरिकों के लिए उन्नत सुविधाएं उपलब्ध कराना था। लेकिन 11 साल बाद भी अधिकांश शहरों में परियोजनाएं अधूरी हैं और नागरिकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला।
Bhopal Smart City: अधूरे काम और उजड़ा एरिया
Bhopal स्मार्ट सिटी का सबसे प्रमुख इलाका टीटीनगर चुना गया था। इस क्षेत्र में सरकारी आवासों को हटाया गया और हरियाली को नष्ट किया गया। साउथ टीटी नगर में 333 एकड़ भूमि पर पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड के तहत विकास की योजना बनाई गई थी।
हालांकि अब स्थिति यह है कि यह पूरा एरिया वीरान और उजड़ा हुआ है। दुकानों और मल्टीलेयर मल्टीपरपज एरिया का विकास अधूरा है। योजना के अनुसार भूमि बेचकर 6,644 करोड़ रुपए की आमदनी होने की उम्मीद थी और विकास लागत 344 करोड़ रुपए अनुमानित थी, लेकिन जमीन का विकास अधूरा है।
इस वजह से नागरिकों को स्मार्ट सिटी का वास्तविक अनुभव नहीं मिल पा रहा है। यहां पर शुरू की गई कई परियोजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं।
बजट और खर्च की स्थिति
MP में स्मार्ट सिटी योजना के लिए केंद्र सरकार ने 3,430 करोड़ रुपए जारी किए। इसमें से 3,422 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
राज्य सरकार ने अपने हिस्से के लिए 3,500 करोड़ रुपए दिए, जिसमें से 3,491 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
हालांकि इन खर्चों के बावजूद परियोजनाएं अधूरी हैं। भोपाल, ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर में पूरा बजट खर्च हो गया है, लेकिन काम अधूरा पड़ा है। सागर, सतना और उज्जैन में लगभग 80% फंड खर्च हो चुका है।
| शहर | कुल बजट (करोड़) | खर्च (करोड़) | प्रोजेक्ट स्थिति |
|---|---|---|---|
| भोपाल | 3430 | 3422 | अधूरा, कई योजनाएं रुकी |
| इंदौर | 3500 | 3491 | अधूरा, विकास धीमा |
| जबलपुर | – | – | अधूरा |
| ग्वालियर | – | – | अधूरा |
| सागर | – | लगभग 80% | अधूरा |
| सतना | – | लगभग 80% | अधूरा |
| उज्जैन | – | लगभग 80% | अधूरा |
क्यों अधूरी रही परियोजनाएं?
- बजट वितरण में देरी: केंद्र से फंड आने के बावजूद राज्य सरकार का समय पर भुगतान न होना।
- अधूरे टेंडर और योजनाएं: कई टेंडर जारी किए गए, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ।
- स्थानीय प्रबंधन में कमजोरियां: परियोजनाओं के निष्पादन में समन्वय की कमी।
- भूमि और हरियाली पर असर: भोपाल जैसे शहरों में सरकारी आवास हटाने और हरियाली खत्म करने के बावजूद विकास अधूरा।
इस वजह से स्मार्ट सिटी योजना के मूल उद्देश्य पूरे नहीं हो पाए हैं।
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स्मार्ट सिटी के नागरिक अनुभव पर असर
स्मार्ट सिटी योजना का उद्देश्य नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार करना था। इसके तहत:
- बेहतर सड़कें और यातायात व्यवस्था।
- हरित क्षेत्र और पार्क।
- मल्टीपरपज एरिया और सामुदायिक सुविधा केंद्र।
लेकिन इन लक्ष्यों का अधिकांश हिस्सा अभी तक पूरा नहीं हुआ है। नागरिकों को न तो विकसित सड़कें मिली हैं, न पार्क और न ही मल्टीपरपज सुविधा।
भोपाल का टीटीनगर क्षेत्र इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां योजना शुरू होने के बाद इलाके में व्यवसायिक गतिविधियां भी रुकी हुई हैं और दुकानें बंद पड़ी हैं।
सात शहरों में स्मार्ट सिटी की वर्तमान स्थिति
- भोपाल: टीटीनगर क्षेत्र में अधूरा विकास, दुकानें बंद।
- इंदौर: परियोजनाएं अधूरी, कई टेंडर लंबित।
- जबलपुर: अधूरा विकास, नागरिक सुविधा सीमित।
- ग्वालियर: अधूरा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट।
- सागर, सतना, उज्जैन: लगभग 80% फंड खर्च, लेकिन परियोजनाएं अधूरी।
सात शहरों में कुल मिलाकर करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन योजना के मूल उद्देश्य पूरे नहीं हुए हैं।
निष्कर्ष: खर्च हुआ लाखों करोड़, लेकिन विकास अधूरा
7,000 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी स्मार्ट सिटी परियोजना मध्य प्रदेश में अधूरी ही रह गई है। यह स्थिति नागरिकों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि अपेक्षित सुविधाएं और आधुनिक बुनियादी ढांचा अब तक नहीं मिले हैं।
- भोपाल जैसे शहरों में भूमि अधिग्रहण और हरियाली का नुकसान हुआ।
- कई टेंडर अधूरे हैं और परियोजनाएं पूरी नहीं हुईं।
- केंद्र और राज्य सरकार का बजट खर्च हो गया, फिर भी काम अधूरा।
स्मार्ट सिटी का उद्देश्य बेहतर जीवन स्तर और आधुनिक शहर बनाना था, लेकिन अब तक यह केवल खर्च की गई रकम तक सीमित रह गया है।
सरकारों को अब मिलकर परियोजनाओं को प्राथमिकता से पूरा करना होगा। अन्यथा नागरिकों का भरोसा योजना पर टूट सकता है।
