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Jain धर्म और श्रंमण संस्कृति का संदेश: समाज में आध्यात्मिक जागरूकता

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Published On: 12 February 2026
Darshan at Shri Adinath Jain Panchayati Mandir: Grand Welcome and Rituals
— Darshan at Shri Adinath Jain Panchayati Mandir: Grand Welcome and Rituals

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श्रेष्ठ एवं ज्येष्ठ आर्यिका माताओं का भव्य मंगल मिलन

इंदौर, राजेश जैन दद्दू: अयोध्या में श्रेष्ठ गणनी आर्यिका ज्ञानमती माताजी, ज्येष्ठ आर्यिका गुरुमति माताजी और दृणमती माताजी का भव्य मंगल मिलन सम्पन्न हुआ। यह आयोजन श्रंमण संस्कृति और Jain धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक माना गया। इस अवसर पर आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के अनुयायी और संघ की 54 पिच्छीधारी आर्यिकाएं शामिल हुईं।

संघ की आयोध्या यात्रा

ज्येष्ठ श्रैष्ठ आर्यिका रत्न गुरुमती माताजी, ज्येष्ठ श्रैष्ठ आर्यिका दृणमती माताजी और आर्यिका गुणमती माताजी सहित आर्यिका संघ ने तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर जी से चातुर्मास उपरांत पंचतीर्थों की बंदना की। इसके बाद सभी संघस्थ पवित्र भूमि वनारस से पद यात्रा करते हुए भगवान ऋषभदेव आदिनाथ की जन्मस्थली, धर्मनगरी आयोध्या पहुँचे।

आयोध्या पहुंचने पर संघ का स्वागत स्थानीय समिति और समाज जनों ने भव्यता और श्रद्धा के साथ किया। संघस्थ आर्यिकाओं और संघस्थ बहनों एवं भाइयों ने मंगल अगवानी की और आर्यिका संघ का अभिनंदन किया।

श्री आदिनाथ पंचायती मंदिर में दर्शन

मंगल प्रवेश के बाद संघ ने श्री आदिनाथ दि. Jain पंचायती मंदिर में दर्शन किए। ज्येष्ठ श्रैष्ठ गणनी आर्यिका ज्ञानमती माताजी ने सभी संघस्थ आर्यिकाओं के साथ मंदिर में श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की। इस दौरान संघ ने एक-दूसरे का परिचय दिया और धर्म, साधना और Jain संस्कृति पर विस्तृत चर्चा की।

उपस्थित समाजजन ने भी इस विशाल संघ को देखकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की और आर्यिकाओं का अभिनंदन किया। इस भव्य और सौहार्दपूर्ण वातावरण ने आयोजनों को और अधिक गरिमामय बना दिया।

संघ की भव्य अगवानी

आयोजक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि संघस्थ चंदनामती माताजी, कर्मयोगी रविन्द्र कीर्ति जी तथा अन्य संघस्थ बहनों और भाइयों ने आर्यिका संघ का मंगल अगवानी की। उपस्थित सभी आर्यिकाओं और संघस्थों ने आपसी संवाद और धार्मिक विचारों का आदान-प्रदान किया।

इस अवसर पर गणनी आर्यिका ज्ञानमती माताजी ने आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागरजी महामुनिराज को याद किया और उनके साथ बिताए पलों को स्मरण करते हुए उनका सम्मान किया। आचार्य गुरुदेव के अनुशासन और शिक्षाओं को याद कर संघस्थों ने उनका आशीर्वाद लिया।

संघ की ऐतिहासिकता और महत्व

ज्येष्ठ आर्यिकाओं का यह भव्य मिलन श्रंमण संस्कृति के समाधि स्थलों से प्रेरित था। संघ की यात्रा और मंगल मिलन ने जैन धर्मावलंबियों को धर्म, साधना और सेवा के महत्व को पुनः याद दिलाया। 54 पिच्छीधारी आर्यिकाओं का यह समूह न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अद्वितीय था।

आयोध्या में संघ का यह प्रवेश, मंदिर दर्शन और समाज के बीच संवाद ने सभी उपस्थित लोगों में धार्मिक भाव और श्रद्धा का संचार किया। उपस्थित जनसमुदाय ने संघ का अभिनंदन किया और भव्य मंगल मिलन को यादगार अनुभव बताया।

धर्म, समाज और अनुशासन पर चर्चा

भव्य मिलन के दौरान आर्यिका संघ ने धर्म, समाज और साधना पर विस्तृत चर्चाएँ की। विभिन्न आर्यिकाओं ने अपने अनुभव साझा किए और जैन साधना की वर्तमान स्थिति पर विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर संघ ने युवा अनुयायियों को जैन धर्म और साधना में निरंतर योगदान देने का संदेश भी दिया।

इस भव्य आयोजन ने धार्मिक अनुशासन, सामाजिक एकता और सामूहिक साधना की महत्ता को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया।

संघ का भविष्य और संदेश

ज्येष्ठ आर्यिकाओं का यह मंगल मिलन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरूकता, समाज सेवा और धर्म प्रचार का संदेश भी था। संघस्थ आर्यिकाओं ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे जैन धर्म और श्रंमण संस्कृति को आगे बढ़ाने का कार्य निरंतर करती रहेंगी।

राजेश जैन दद्दू ने बताया कि संघस्थ आर्यिकाओं ने आयोध्या नगरी में 11 फरवरी, बुधवार को भव्य मंगल प्रवेश किया और वर्तमान में सभी संघस्थ आर्यिकाएं श्री आदिनाथ दि. जैन पंचायती मंदिर में विराजमान हैं।

निष्कर्ष

इस प्रकार, श्रेष्ठ एवं ज्येष्ठ आर्यिका माताओं का भव्य मंगल मिलन न केवल Jain धर्म के अनुयायियों के लिए ऐतिहासिक रहा, बल्कि समाज में धर्म, सेवा और साधना के आदर्शों को प्रस्तुत करने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर भी बन गया। संघ का यह आयोजन धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत प्रेरणादायक रहा।

भव्य वातावरण, सौहार्दपूर्ण स्वागत और धार्मिक अनुशासन ने इस आयोजन को यादगार बनाया। संघस्थ आर्यिकाओं की उपस्थिती ने आयोध्या नगरी और श्री आदिनाथ पंचायती मंदिर के वातावरण को गरिमामय बना दिया।

इस भव्य मंगल मिलन ने समाज और अनुयायियों के बीच धर्म, साधना और सेवा के संदेश को सशक्त किया और आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श प्रस्तुत किया।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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