CM मोहन यादव ने अफसरों को चेतावनी दी, कहा- काम नहीं हो पा रहा तो तुरंत बताएं
MP News – उज्जैन: मध्य प्रदेश के CM डॉ. मोहन यादव ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में लापरवाही को लेकर सख्त चेतावनी दी है। बुधवार देर शाम निगम मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि यदि कोई अधिकारी काम नहीं कर पा रहा है, तो तुरंत बताएं। ताकि जिम्मेदारी अन्य सक्षम अधिकारियों को सौंपी जा सके और सिंहस्थ कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरे किए जा सकें।
सिंहस्थ महापर्व, जिसे विश्व का एक अद्वितीय धार्मिक आयोजन माना जाता है, के लिए तैयारी अत्यंत महत्वपूर्ण और समयबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महापर्व पर पूरे विश्व की निगाहें होंगी, इसलिए कोई भी श्रद्धालु किसी असुविधा का सामना न करे।
समीक्षा बैठक और मौजूद अधिकारी
CM ने यह बैठक नगर निगम मुख्यालय में ली, जो संभवतः शहर के इतिहास में सिंहस्थ पर पहली बार मुख्यमंत्री स्तर की बैठक है। बैठक में प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल के साथ तीन अपर मुख्य सचिव – राजेश राजौरा, विवेक अग्रवाल और संजय दुबे मौजूद रहे।
इसके अलावा बैठक में महापौर मुकेश टटवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेडा, सतीश मालवीय, जितेन्द्र पंड्या, नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव, सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, एडीजी राकेश गुप्ता, और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह भी उपस्थित थे।
सिंहस्थ 2028: काम में तेजी और गुणवत्ता पर जोर
CM ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सिंहस्थ की तैयारी में किसी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने तीन प्रमुख बातें सामने रखीं:
-
24×7 सक्रियता: अधिकारियों और कर्मचारियों को दिन-रात, सातों दिन सक्रिय रहकर कार्यों की प्रगति सुनिश्चित करनी होगी।
-
गुणवत्ता के साथ समयबद्ध कार्य: कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरे होने चाहिए।
-
रिवर्स कैलेंडर बनाना: निर्माण कार्य और आयोजन से संबंधित सभी कार्यों की समय-सीमा तय करने के लिए रिवर्स कैलेंडर तैयार किया जाए।
डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि काम में असफलता या लापरवाही किसी भी अधिकारी के लिए बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई अधिकारी अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभा पा रहा है, तो उसे वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी होगी।
सिंहस्थ की महत्वता और विश्व दृष्टिकोण
सिंहस्थ 2028 केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि विश्व की नजरें उज्जैन पर केंद्रित होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोजन की सफलता न केवल श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को विश्व स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर भी है।
उन्होंने अधिकारियों को यह याद दिलाया कि सिंहस्थ में हर छोटी-छोटी असुविधा का असर आयोजनों की छवि पर पड़ सकता है। इसलिए सभी अधिकारी पूरी निष्ठा और तत्परता के साथ कार्य करें।
Read Also : Asha Malviya: साइकिल से 7,500 किलोमीटर का सफर, महिलाओं के लिए प्रेरणा
अधिकारियों को स्पष्ट संदेश
CM डॉ. मोहन यादव ने बैठक में दो टूक कहा कि:
“यदि किसी अधिकारी को लगता है कि वह काम नहीं कर पा रहा है, तो उसे तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करना चाहिए। जिम्मेदारी किसी और सक्षम अधिकारी को सौंप दी जाएगी।”
यह संदेश काम की गंभीरता, जिम्मेदारी और निष्पक्ष प्रशासन की ओर इशारा करता है। मुख्यमंत्री का यह रुख सिंहस्थ 2028 की तैयारी में तेजी और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
सिंहस्थ तैयारियों में प्रमुख बिंदु
मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष चर्चा हुई:
-
सड़क, पानी और स्वच्छता व्यवस्था: श्रद्धालुओं के लिए पवित्र स्थल तक सुरक्षित और स्वच्छ मार्ग।
-
सुरक्षा इंतजाम: भीड़ प्रबंधन, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की समन्वित तैयारी।
-
आवास और भोजन व्यवस्था: श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त ठहराव और खानपान की सुविधा।
-
आपातकालीन सेवाएं: मेडिकल और एंबुलेंस सेवाओं की पूरी तैयारी।
डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी विभाग 100 प्रतिशत तत्परता के साथ अपने कार्यों को पूर्ण करें, ताकि किसी भी तरह की कमी न रह जाए।
सिंहस्थ 2028 की तैयारी में तेजी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अब समय बहुत कम है, इसलिए सभी कार्य तीव्र गति से पूरे किए जाएं। इसके लिए उन्होंने रिवर्स कैलेंडर बनाने का सुझाव दिया, जिसमें प्रत्येक कार्य की समय-सीमा और जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि सिंहस्थ की सफलता केवल अधिकारियों की मेहनत से नहीं, बल्कि टीम वर्क और समर्पण से सुनिश्चित होगी।
निष्कर्ष
CM डॉ. मोहन यादव ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में जीरो टॉलरेंस रुख अपनाते हुए सभी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
सिंहस्थ जैसे विश्व प्रसिद्ध आयोजन की सफलता में समय, गुणवत्ता और अनुशासन की अहम भूमिका होती है। मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित किया कि श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के पवित्र अनुष्ठानों में भाग ले सकें और आयोजन भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत करे।

Comments are closed.