MP सरकार ने वित्तीय वर्ष में एक हफ्ते में दूसरी बार लिया 5,000 करोड़ का कर्ज, कुल कर्ज 67,300 करोड़ रुपए तक पहुंचा
भोपाल: MP की मोहन सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र से पहले बाजार से 5,000 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया है। यह पिछले एक सप्ताह में सरकार द्वारा लिया गया दूसरा कर्ज है। इससे पहले 4 फरवरी को ही सरकार ने 5,300 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। सरकार यह कर्ज भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से तीन किस्तों में ले रही है।
इस वित्तीय वर्ष में अब तक सरकार द्वारा लिए गए कुल कर्ज की राशि 67,300 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। यह कर्ज मुख्य रूप से विभिन्न विकास और स्थायी परियोजनाओं के लिए लिया गया है। बता दें कि मध्य प्रदेश का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू हो रहा है और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा 18 फरवरी को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे।
एक हफ्ते में दूसरी बार कर्ज
सरकार ने जो कर्ज 11 फरवरी को लिया, वह तीन किस्तों में वितरित किया गया। इसका भुगतान सरकार को उसी दिन यानी बुधवार को करना था। इस कर्ज के बाद, चालू वित्त वर्ष में लिए गए कर्ज की संख्या कुल 36 तक पहुंच गई है।
सरकार ने जनवरी 2026 तक कुल 30 कर्ज लिए थे। फरवरी के पहले 10 दिनों में 6 नए कर्ज लिए गए, जिससे यह संख्या 36 तक पहुंच गई। 3 फरवरी को तीन कर्ज लिए जाने के बाद कुल कर्ज 33 था और अब फिर से तीन नई किस्तों में कर्ज लिया गया।
कर्ज की अवधि और ब्याज
10 फरवरी को लिए गए दो कर्ज 2,000-2,000 करोड़ रुपए के हैं, जिनकी अवधि क्रमशः 21 और 16 साल है। तीसरा कर्ज 1,000 करोड़ रुपए का है, जिसकी अवधि 8 साल की है और इसे छमाही (सिक्स-मंथली) ब्याज के रूप में चुकाया जाएगा। यह कर्ज विशेष रूप से कृषि योजनाओं, सिंचाई और पावर प्रोजेक्ट्स, तथा कम्युनिटी डेवलपमेंट परियोजनाओं के स्थायी निर्माण के लिए लिया गया है।
वित्तीय वर्ष में कर्ज का ट्रैक रिकॉर्ड
MP सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगातार कर्ज लेने की प्रवृत्ति बनाए रखी है। साल के विभिन्न महीनों में सरकार ने कई बड़ी रकम में कर्ज लिया है।
- मई में सरकार ने दो बार कर्ज लिया, जिसमें प्रत्येक बार ढाई-ढाई हजार करोड़ रुपए शामिल थे।
- जून में 2,000 करोड़ और 2,500 करोड़ के दो कर्ज लिए गए।
- जुलाई में पहली बार 2,500 और 2,300 करोड़ तथा दूसरी बार 2,000 और 2,300 करोड़ रुपए के कुल चार कर्ज लिए गए।
- अगस्त में 1,600 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया।
इस तरह वित्तीय वर्ष की शुरुआत से लेकर अब तक सरकार ने लगातार कर्ज लेने की नीति अपनाई है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में चल रही विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना और बड़े-बड़े निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करना है।
कर्ज लेने की वजहें और बजट सत्र
MP सरकार ने यह कर्ज विशेष रूप से कृषि, सिंचाई, पावर, और ग्रामीण विकास परियोजनाओं के स्थायी निर्माण के लिए लिया है। सरकार ने फरवरी के पहले सप्ताह में बजट सत्र से पहले कैबिनेट को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित बजट की जानकारी दी। 18 फरवरी को वित्त मंत्री इसे विधानसभा में पेश करेंगे।
सरकार की योजना है कि इस बजट में कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित की जाए। इसके अलावा, सिंचाई परियोजनाओं और पॉवर सेक्टर में स्थायी निवेश सुनिश्चित करने के लिए भी यह कर्ज लिया गया है।
कर्ज लेने की प्रक्रिया
सरकार ने यह कर्ज भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से लिया है। इसे तीन किस्तों में वितरित किया गया। पहली किस्त 2,000 करोड़ रुपए, दूसरी 2,000 करोड़ रुपए और तीसरी 1,000 करोड़ रुपए की थी। सरकार ने इसका भुगतान भी समय पर करना सुनिश्चित किया है।
इस वित्तीय वर्ष में कुल 36 कर्ज लेने के साथ, सरकार का कर्ज आंकड़ा अब 67,300 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। वित्तीय वर्ष के दौरान यह आंकड़ा और बढ़ सकता है, क्योंकि राज्य सरकार विभिन्न नई परियोजनाओं और योजनाओं को वित्त पोषण के लिए बाजार से अतिरिक्त कर्ज लेने की संभावना रखती है।
राज्य के विकास और निवेश की प्राथमिकताएँ
MP सरकार ने अपने बजट और कर्ज लेने की नीति को इस प्रकार तैयार किया है कि राज्य के दीर्घकालिक विकास और निवेश योजनाओं को सुचारू रूप से चलाया जा सके। कृषि क्षेत्र में नई योजनाओं, सिंचाई नेटवर्क के विस्तार, बिजली और पावर सेक्टर के स्थायी प्रोजेक्ट्स और सामुदायिक विकास परियोजनाओं पर जोर दिया गया है।
इस वित्तीय वर्ष में सरकार ने बजट सत्र से पहले ही कर्ज लेने का निर्णय लिया, ताकि बजट में प्रस्तावित सभी योजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकें। यह नीति यह सुनिश्चित करती है कि योजनाओं की समय पर पूर्ति हो और राज्य के विकास लक्ष्यों को प्रभावित नहीं किया जाए।
निष्कर्ष
MP सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगातार बाजार से कर्ज लेने की रणनीति अपनाई है। एक सप्ताह में दो बार कर्ज लेना इस नीति का हिस्सा है। सरकार ने अब तक कुल 67,300 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है, जो मुख्य रूप से कृषि, सिंचाई, पावर और सामुदायिक विकास परियोजनाओं के स्थायी निर्माण के लिए उपयोग किया जाएगा। आगामी बजट सत्र में वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट में इन परियोजनाओं और कर्ज की स्थिति को भी स्पष्ट किया जाएगा।
यह कदम राज्य की वित्तीय योजनाओं को स्थिर रखने और विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की दिशा में एक रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है।
