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खंडवा में सनसनीखेज खुलासा: सूदखोरी से टूटे बीजेपी नेता जितेंद्र चौधरी ने कांग्रेस नेता गणेश सकरगाये के सामने खाया जहर

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Published On: 10 February 2026
khandwa news

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खंडवा बीजेपी नेता आत्महत्या मामला: सूदखोरी, राजनीतिक प्रताड़ना और धमकियों से परेशान बीजेपी नेता जितेंद्र चौधरी की मौत, कांग्रेस नेता पर गंभीर आरोप।

खंडवा बीजेपी नेता आत्महत्या मामला: क्या है पूरा घटनाक्रम

खंडवा बीजेपी नेता आत्महत्या मामला मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए एक गहरी चेतावनी बनकर सामने आया है। खंडवा जिले के लवकुश नगर क्षेत्र में रहने वाले जितेंद्र चौधरी उर्फ जीतू ने सूदखोरी और कथित राजनीतिक प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या कर ली।

मंगलवार सुबह जीतू चौधरी बड़गांव भीला रोड स्थित कांग्रेस के पूर्व पार्षद गणेश सकरगाये के घर हिसाब-किताब करने पहुँचे थे। लेकिन यह मुलाकात उनके जीवन की आख़िरी मुलाकात बन गई।

सूदखोरी का जाल और 50 लाख का लेन-देन

खंडवा बीजेपी नेता आत्महत्या मामला की जड़ में 50 लाख रुपये का लेन-देन बताया जा रहा है। मृतक के अनुसार यह रकम व्यवसाय और निजी जरूरतों के लिए ली गई थी, लेकिन समय के साथ ब्याज इतना बढ़ गया कि चुकाना असंभव हो गया।

सूदखोरी के इस दबाव ने जीतू चौधरी को आर्थिक रूप से तोड़ दिया। उनके अनुसार, ब्याज की रकम मूलधन से कई गुना अधिक हो चुकी थी।

कांग्रेस नेता गणेश सकरगाये पर गंभीर आरोप

मृत्यु पूर्व बयान में जीतू चौधरी ने साफ कहा कि कांग्रेस नेता गणेश सकरगाये ने उन्हें:

  • लगातार धमकियाँ दीं
  • घर बिकवाने का दबाव बनाया
  • जान से मारने की धमकी दी
  • राजनीतिक दुश्मनी निकाली

यही नहीं, आरोप है कि सूदखोरी के कारण उनकी बेटी का विवाह तक तुड़वा दिया गया।

मौके पर जहर खाने की खौफनाक घटना

तनाव, अपमान और धमकियों से टूट चुके जीतू चौधरी ने गणेश सकरगाये के घर के सामने ही जहरीला पदार्थ निगल लिया। यह दृश्य वहाँ मौजूद लोगों के लिए भी स्तब्ध कर देने वाला था।

उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से खंडवा जिला अस्पताल रेफर किया गया।

इलाज के दौरान मौत और समर्थकों का आक्रोश

शाम होते-होते उनकी हालत बिगड़ गई। ICU में भर्ती करने के बावजूद डॉक्टर उन्हें नहीं बचा सके। जैसे ही मौत की खबर फैली, बड़ी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता और समर्थक अस्पताल पहुँच गए।

खंडवा बीजेपी नेता आत्महत्या मामला अब एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि सार्वजनिक आक्रोश का कारण बन चुका है।

बेटी की शादी तुड़वाने का आरोप

यह मामला तब और गंभीर हो गया जब जीतू चौधरी ने अपने बयान में कहा कि:

“ब्याज न दे पाने पर मेरी बेटी की शादी तुड़वा दी गई।”

यह आरोप सूदखोरी को सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक अपराध भी बनाता है।

राजनीतिक रंजिश या आर्थिक शोषण?

इस केस में बड़ा सवाल यह है कि क्या:

  • यह सिर्फ सूदखोरी का मामला है?
  • या राजनीतिक बदले की भावना से की गई प्रताड़ना?

एक बीजेपी नेता का कांग्रेस नेता पर सीधे आरोप लगाना, इस मामले को और संवेदनशील बना देता है।

मोघट पुलिस जांच में क्या-क्या बिंदु

मोघट थाना पुलिस ने:

  • मृत्यु पूर्व बयान दर्ज किया
  • लेन-देन के दस्तावेज़ तलाशने शुरू किए
  • गवाहों के बयान लिए जा रहे हैं

डीआईजी मनोज कुमार राय ने कहा कि जांच निष्पक्ष होगी और सूदखोरी सिद्ध होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कानून क्या कहता है सूदखोरी पर

भारत में सूदखोरी:

  • IPC
  • मध्य प्रदेश ऋण अधिनियम
  • आपराधिक धमकी धाराओं

के तहत दंडनीय अपराध है।

सवाल जो पूरे सिस्टम पर खड़े होते हैं

  • क्या सूदखोरी पर प्रशासन की पकड़ कमजोर है?
  • क्या राजनीतिक रसूख कानून से बड़ा हो गया है?
  • कब तक आम आदमी और जनप्रतिनिधि इसी तरह टूटते रहेंगे?

खंडवा बीजेपी नेता आत्महत्या मामला इन सभी सवालों का आईना है।

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