Bhopal का नया अजूबा: हाई वोल्टेज टावर के नीचे बनी कॉलोनी की सड़क
Bhopal , मध्य प्रदेश की राजधानी, एक बार फिर अपनी अनोखी सड़कों और अविश्वसनीय निर्माण के कारण चर्चा में है। हाल ही में शहर ने एक नया “अजूबा” देखा है—करोंद के विनायक कॉलोनी में सड़क के बीचों-बीच एक हाई वोल्टेज टावर खड़ा कर दिया गया है। इस टावर के कारण न केवल राहगीरों और स्थानीय निवासियों में डर का माहौल है, बल्कि यह सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही का भी प्रतीक बन गया है।
सड़क से गुजरते समय डर का अनुभव
स्थानीय निवासी बताते हैं कि बरसात के मौसम में इस टावर के नीचे से गुजरना और भी खतरनाक महसूस होता है।
- हाई वोल्टेज लाइन सीधे ऊपर से गुजर रही है।
- सड़क की चौड़ाई और टावर की ऊँचाई इतनी कम है कि बड़े वाहन आसानी से गुजर नहीं पाते।
- कई लोग कहते हैं कि बारिश में करंट का खतरा और बिजली का डर उन्हें टावर के नीचे से निकलने से रोकता है।
एक निवासी ने कहा, “सड़क पर टावर देखकर लगता है कि हर पल किसी अप्रिय घटना का खतरा है। बारिश में डर और बढ़ जाता है।”
Bhopal के अनोखे निर्माणों की बढ़ती लिस्ट
Bhopal पहले ही 90 डिग्री ब्रिज के लिए चर्चा में आ चुका है, जिसे देखकर लोगों ने इसे शहर का “इंजीनियरिंग अजूबा” कहा। लेकिन अब विनायक कॉलोनी में बनी यह सड़क और बीच में खड़ा हाई वोल्टेज टावर एक नया विषय बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में ऐसे निर्माण लगातार बढ़ रहे हैं और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
बिजली विभाग की लापरवाही
इस मामले में बिजली विभाग की लापरवाही साफ दिखती है।
- सड़क के बीचों-बीच टावर लगाया गया है।
- टावर की ऊँचाई और चौड़ाई इतनी कम है कि बड़े वाहनों के लिए सड़क पर गुजरना मुश्किल हो गया है।
- सुरक्षा उपायों में भी कमी है, खासकर बरसात के मौसम में।
हालांकि, बिजली विभाग के अधिकारी मानते हैं कि यह एक बड़ी लापरवाही है और इसकी जांच चल रही है। लेकिन फिलहाल स्थानीय निवासियों को दिन-प्रतिदिन डर के साथ जीवन जीना पड़ रहा है।
नागरिकों की शिकायतें और प्रशासनिक जवाब
स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन और बिजली विभाग को इस मुद्दे पर शिकायत भेजी, लेकिन इसका कोई ठोस असर नहीं हुआ।
- लोग डर के कारण टावर के नीचे से गुजरने से बचते हैं।
- बड़े वाहन और ट्रक सड़क पर गुजरने में परेशानी महसूस करते हैं।
- सुरक्षा के लिए कोई चेतावनी या संकेत नहीं लगाए गए हैं।
नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को तत्काल कदम उठाकर टावर की स्थिति सुधारनी चाहिए, या फिर सड़क का मार्ग बदलना चाहिए।
संभावित खतरों का विस्तृत विवरण
- करंट का खतरा: बारिश या नमी के दौरान करंट का रिस्क बढ़ जाता है।
- वाहनों के लिए बाधा: सड़क के बीच टावर होने के कारण बड़े वाहनों और ट्रकों को गुजरने में दिक्कत होती है।
- मानसिक तनाव: निवासियों में लगातार डर और तनाव का माहौल बना रहता है।
- आपात स्थिति में मदद पहुंचाने में कठिनाई: दुर्घटना या मेडिकल इमरजेंसी में यह सड़क रेस्क्यू को भी प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों की राय
सिविल इंजीनियर और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क के बीच में हाई वोल्टेज टावर बनाना सुरक्षा के लिहाज से बेहद जोखिम भरा है।
- प्रशासन को इस तरह की योजना बनाते समय सुरक्षा मानकों का पालन करना चाहिए।
- लोगों के दैनिक जीवन और वाहनों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- अगर तुरंत सुधार न किया गया, तो यह भविष्य में गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।
भोपाल में निर्माण और सुरक्षा के मुद्दे
भोपाल शहर में पिछले कुछ वर्षों में कई अनोखी और अजीब निर्माण योजनाएं सामने आई हैं।
- 90 डिग्री ब्रिज
- कम ऊंचाई वाले फ्लाईओवर
- बीच सड़क वाले टावर और अन्य निर्माण
इनसे साफ होता है कि योजना और सुरक्षा का संतुलन शहर में सही तरीके से नहीं बनाया जा रहा।
नागरिक क्या चाहते हैं?
स्थानीय निवासियों की मांग है:
- टावर के नीचे से गुजरने वाली सड़क को सुरक्षित बनाया जाए।
- जरूरी हो तो टावर की स्थिति बदलकर सड़क का मार्ग सुरक्षित किया जाए।
- बारिश या नमी में करंट का खतरा कम करने के लिए उपाय किए जाएं।
- प्रशासन को समय-समय पर सड़क और टावर की जांच करनी चाहिए।
निष्कर्ष
Bhopal का यह नया अजूबा—सड़क के बीच हाई वोल्टेज टावर—सिर्फ अनोखा नहीं बल्कि खतरनाक भी है।
- यह निवासियों और वाहन चालकों के लिए सुरक्षा खतरा पैदा करता है।
- प्रशासन और बिजली विभाग की लापरवाही इसे और गंभीर बनाती है।
- अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो यह भविष्य में गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।
स्थानीय नागरिकों की उम्मीद है कि प्रशासन और बिजली विभाग इस समस्या का तुरंत समाधान करेंगे ताकि भोपाल की सड़कें सुरक्षित और यात्रियों के लिए जोखिम मुक्त बनें।

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