भूकंप के झटकों से हिली Arunachal Pradesh की धरती, रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.1
Arunachal Pradesh की धरती एक बार फिर भूकंप के झटकों से हिल उठी। राज्य के पश्चिमी कामेंग जिले में रात 12 बजकर 58 मिनट पर हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.1 मापी गई। सौभाग्य से, इस भूकंप के कारण किसी तरह के जानमाल या संपत्ति को नुकसान नहीं हुआ।
भूकंप के समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। NCS ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि भूकंप का केंद्र 27.45° N अक्षांश और 92.11° E देशांतर पर, धरती की सतह से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में था। भूकंप की यह सतही गहराई इसे आसपास के क्षेत्रों में भी महसूस कराने का कारण बनी।
पिछले भूकंप की घटनाएँ
Arunachal Pradesh और इसके आसपास का क्षेत्र भूकंप-संवेदनशील माना जाता है। पिछले साल 28 जुलाई 2025 को भी अरुणाचल प्रदेश के तिरप जिले में भूकंप आया था। उस समय भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार शाम 6:36:23 बजे रिक्टर स्केल पर 3.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र 27.06° N अक्षांश और 95.42° E देशांतर पर, धरती की सतह से 7 किलोमीटर नीचे था।
इस भूकंप के झटके सिक्किम और आसपास के राज्यों में भी महसूस किए गए थे। 10 फरवरी 2026 की सुबह 5:38 मिनट पर सिक्किम के नामची क्षेत्र में भी हल्के झटके महसूस हुए, जिनकी गहराई लगभग 5 किलोमीटर थी।
भूकंप क्यों आता है?
धरती की संरचना मुख्य रूप से चार परतों से बनी है – इनर कोर, आउटर कोर, मैन्टल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को मिलाकर लिथोस्फेयर कहा जाता है, जो लगभग 50 किलोमीटर मोटी होती है। इस परत को टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है।
ये प्लेट्स लगातार हल्की गति से खिसकती रहती हैं। आम तौर पर ये सालाना 4-5 मिमी की गति से अपनी जगह बदलती हैं। कभी-कभी ये प्लेट्स आपस में टकरा जाती हैं या खिसक जाती हैं। इस प्रक्रिया में धरती की सतह पर तनाव उत्पन्न होता है। जब यह तनाव अचानक रिलीज़ होता है, तो भूकंप के झटके महसूस होते हैं।
अरुणाचल प्रदेश और हिमालयी क्षेत्र भूकंप-संवेदनशील क्षेत्र हैं, क्योंकि यहां इंडो-ऑसियाटिक प्लेट और यूरेशियन प्लेट की सीमाएं मौजूद हैं। इसलिए यहां हल्के और मध्यम भूकंप आम तौर पर आते रहते हैं।
भूकंप की तीव्रता और रिक्टर स्केल
भूकंप की तीव्रता मापने का मानक रिक्टर स्केल है। यह बताता है कि भूकंप के झटके कितनी ताकत से महसूस हुए और उसके केंद्र की गहराई कितनी थी।
- 3.0–3.9 – हल्के झटके, आमतौर पर कोई नुकसान नहीं।
- 4.0–4.9 – मध्यम झटके, पुराने भवनों में हल्का नुकसान संभव।
- 5.0–5.9 – मजबूत झटके, भवनों और जीवन को खतरा।
- 6.0 और उससे ऊपर – बहुत तीव्र झटके, गंभीर नुकसान और आपात स्थिति।
10 फरवरी 2026 का भूकंप 3.1 तीव्रता का था, इसलिए यह हल्का भूकंप माना गया और कोई नुकसान नहीं हुआ।
भूकंप के समय बचाव के उपाय
भूकंप आने पर सही प्रतिक्रिया बहुत महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों की सलाह है कि लोग इस दौरान घबराएँ नहीं और निम्नलिखित सावधानियाँ अपनाएँ:
- घर से बाहर सुरक्षित स्थान पर जाएँ – खुले मैदान, पार्क या सड़क जैसी जगह पर रहें।
- यदि घर में फंस गए हैं – मजबूत मेज़ या बिस्तर के नीचे खुद को सुरक्षित रखें।
- कोनों में खड़े रहना सुरक्षित है – घर की दीवार के कोनों में खड़ा होना भी बचाव का तरीका है।
- लिफ्ट का उपयोग न करें – भूकंप के दौरान लिफ्ट इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है।
- पेड़ और बिजली की लाइनों से दूरी बनाएँ – गिरने वाली वस्तुओं और विद्युत तारों से सुरक्षित रहें।
- बच्चों और बुजुर्गों की मदद करें – सबसे कमजोर वर्ग को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाएँ।
भूकंप के तुरंत बाद राहत और बचाव टीमों को सूचित करना भी आवश्यक है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
भूकंप विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेट्स की गतिविधि लगातार चलती रहती है। इसलिए हल्के और मध्यम भूकंप समय-समय पर आते रहते हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे हमेशा भूकंप के लिए तैयार रहें।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि भवन निर्माण के समय भूकंप-प्रतिरोधी डिजाइन अपनाना बहुत जरूरी है। इससे जानमाल का नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष
Arunachal Pradesh और इसके आसपास के क्षेत्र भूकंप-संवेदनशील हैं। 10 फरवरी 2026 का भूकंप हल्का था और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। फिर भी यह याद दिलाता है कि सतर्कता और तैयारी आवश्यक है।
भूकंप के समय अनुशासन, सही जानकारी और सावधानी ही सबसे बड़ा सुरक्षा उपाय है। प्रशासन और नागरिकों को मिलकर ऐसी आपात स्थितियों के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।
भूकंप सिर्फ प्राकृतिक घटना नहीं है, बल्कि यह लोगों के जीवन और जीवनशैली के लिए चेतावनी भी है। समय रहते सावधान रहकर हम अपने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
