Indore की नई रिंग रोड: 25 गांवों की जमीन अधिग्रहण में देरी, निर्माण शुरू नहीं हो पाया
Indore को नया बायपास मिलेगा
Indore शहर की नई Ring Road (पश्चिमी बायपास) का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। यह सड़क महू और पीथमपुर को इंदौर से जोड़ेगी, जिससे इन क्षेत्रों और देवास के ग्रामीण इलाकों का शहर से संपर्क और मजबूत होगा। नए बायपास के बनने से न केवल ग्रामीण इलाकों का विकास होगा, बल्कि इंदौर में ट्रैफिक दबाव कम होगा और रियल एस्टेट मार्केट को भी लाभ मिलेगा।
70 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण में चार हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें कुल 1131 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है, जिसमें 40 हेक्टेयर वन भूमि भी शामिल है।
अधिग्रहण में देरी, निर्माण को रोका
बायपास का निर्माण तीन साल पहले केंद्रीय परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मंजूरी के बावजूद शुरू नहीं हो सका है। रिंग रोड के लिए 25 गांवों की जमीन अधिग्रहण होना है, लेकिन प्रशासन अभी तक केवल पांच गांवों की जमीन ही अधिगृहित कर पाया है।
इस देरी का सबसे बड़ा असर यह है कि निर्माण का मुर्हूत नहीं निकल पा रहा है। खासकर इस सड़क का निर्माण सिंहस्थ के पहले होना आवश्यक था, ताकि उज्जैन जाने वाले दूसरे राज्यों के यातायात को परेशानी न हो।
मार्ग और इससे होने वाले लाभ
नई सड़क डकाच्या गांव से महू और पीथमपुर को जोड़ेगी। इस मार्ग से महू, पीथमपुर और देवास के ग्रामीण क्षेत्र इंदौर के और करीब आ जाएंगे। मार्ग के आसपास नवीन बसाहट और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स शुरू होंगे।
इस सड़क के बनने से कई फायदे होंगे:
- ट्रैफिक दबाव कम होगा और पूर्वी बायपास पर भी वाहन बेहतर तरीके से चल सकेंगे।
- सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, क्योंकि ट्रैफिक का बेहतर वितरण होगा।
- रियल एस्टेट मार्केट में तेजी आएगी, नए टाउनशिप और औद्योगिक क्षेत्र विकसित होंगे।
- ग्रामीण क्षेत्रों का व्यवस्थित विकास होगा, मास्टर प्लान के तहत आंतरिक सड़कें और सुविधाएं विकसित होंगी।
- दिल्ली और मुंबई की तरफ जाने वाले वाहनों को इंदौर शहर से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी; वे सीधे बायपास से देवास और मानपुर की तरफ जा सकेंगे।
पूर्वी बायपास का इतिहास
पूर्वी बायपास 38 गांवों से होकर गुजरेगा और इसे छह लेन सड़क बनाया जाएगा। लगभग दस साल पहले ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने पूर्वी बायपास का सर्वे किया था। लेकिन बाद में पुराने बायपास को ही चार लेन से छह लेन करने का काम शुरू कर दिया गया।
इसके चलते नए बायपास की योजना ठंडे बस्ते में चली गई, जिससे निर्माण में और देरी हुई।
विधायक और सांसदों की प्रतिक्रिया
सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि जो जमीन मिल चुकी है, वहां निर्माण कार्य शुरू करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि इस बायपास के बनने से देवास, महू और पीथमपुर के ग्रामीण क्षेत्रों को भी काफी फायदा होगा।
रियल एस्टेट और विकास पर असर
नई सड़क के निर्माण से न केवल यातायात और ट्रैफिक बेहतर होगा, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों में नए टाउनशिप, आवासीय और औद्योगिक परियोजनाओं का विकास होगा।
- इंदौर के बाहरी क्षेत्रों में व्यवस्थित शहरीकरण बढ़ेगा।
- सड़कों और मास्टर प्लान की आंतरिक संरचना विकसित होगी।
- रियल एस्टेट मार्केट को निवेशकों और नए प्रोजेक्ट्स के लिए आकर्षक बनाया जाएगा।
सड़क निर्माण की लागत और जमीनी विवरण
70 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर चार हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें कुल 1131 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित करनी है। इसके अलावा 40 हेक्टेयर वन भूमि भी सड़क निर्माण में शामिल होगी।
यह मार्ग महू, पीथमपुर और देवास के ग्रामीण क्षेत्रों को शहर से जोड़ने के साथ आसपास के इलाकों में बसाहट और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा।
ट्रैफिक और सुरक्षा पर असर
- दिल्ली और मुंबई की तरफ जाने वाले वाहनों को अब इंदौर शहर से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा।
- पूर्वी बायपास पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा।
- सड़क हादसों की संख्या में कमी आएगी।
- नई सड़क के बनने से ट्रक और भारी वाहनों के लिए बेहतर मार्ग उपलब्ध होगा।
निष्कर्ष
Indore की नई Ring Road और पश्चिमी बायपास का निर्माण शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। हालांकि अधिग्रहण में हो रही देरी ने निर्माण कार्य को रोका हुआ है, लेकिन जब यह सड़क बनकर तैयार होगी, तो इंदौर यातायात, रियल एस्टेट और ग्रामीण विकास के सभी मानकों में बेहतर स्थिति हासिल करेगा।
इस बायपास का निर्माण इंदौर को राष्ट्रीय राजमार्ग और पड़ोसी शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी देगा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को शहर के करीब लाएगा।

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