चेक अनादरण फैसला नागदा में अदालत का कड़ा रुख। दो मामलों में संजय शर्मा पर 38.89 लाख रुपये प्रतिकर और सश्रम कारावास का आदेश।
चेक अनादरण फैसला नागदा: मामले का सार
चेक अनादरण फैसला नागदा क्षेत्र में एक मिसाल बनकर सामने आया है। नागदा न्यायालय ने चेक बाउंस के दो मामलों में अभियुक्त संजय शर्मा पिता सत्यनारायण, निवासी श्रीराम कॉलोनी, नागदा जंक्शन, जिला उज्जैन, के विरुद्ध सख़्त रुख अपनाते हुए कुल 38 लाख 89 हजार रुपये प्रतिकर अदा करने का आदेश पारित किया है।
न्यायालय ने साफ कहा कि यदि निर्धारित राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो अभियुक्त को प्रत्येक मामले में तीन-तीन माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
न्यायालय का सख़्त दृष्टिकोण
इस चेक अनादरण फैसला नागदा में अदालत ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि चेक बाउंस जैसे आर्थिक अपराधों को हल्के में नहीं लिया जाएगा। विचारण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि अभियुक्त द्वारा परिवादी को कोई भी भुगतान नहीं किया गया।
पहला मामला: एससी एनआईए 7/2023
इस प्रकरण में न्यायालय ने पाया कि:
- मूल चेक राशि: 10 लाख रुपये
- ब्याज: 9% वार्षिक
- कुल प्रतिकर: 12,84,000 रुपये
अदालत ने कहा कि चेक अनादरण के बाद भी अभियुक्त ने कोई राशि अदा नहीं की, जो उसके इरादे को स्पष्ट करता है।
दूसरा मामला: एससी एनआईए 6/2023
दूसरे प्रकरण में:
- चेक की बकाया राशि: 20 लाख रुपये
- ब्याज सहित कुल प्रतिकर: 26,05,000 रुपये
इस प्रकार दोनों मामलों को मिलाकर 38.89 लाख रुपये का प्रतिकर तय किया गया, जो इस चेक अनादरण फैसला नागदा को और भी महत्वपूर्ण बनाता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
न्यायालय ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के दो अहम निर्णयों का उल्लेख किया:
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सुखदीप सुरेश कुमार बनाम जगदीशन
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विजय बनाम सदानंद
इन फैसलों के आधार पर अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि प्रतिकर राशि का भुगतान नहीं होता है, तो अभियुक्त को हर प्रकरण में अलग-अलग सजा भुगतनी होगी।
जमानत निरस्तीकरण और जेल भेजने का आदेश
इस चेक अनादरण फैसला नागदा में एक और सख़्त कदम उठाते हुए:
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अभियुक्त की जमानत निरस्त की गई
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उसे अभिरक्षा में लिया गया
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सजा वारंट के साथ उपजेल खाचरौद भेजने के आदेश दिए गए
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकरण में कोई जब्तशुदा संपत्ति नहीं है।
परिवादी और अधिवक्ता की भूमिका
दोनों मामलों में परिवादी मारिया शेखावत की ओर से अधिवक्ता जगदीशचंद्र चावड़ा ने प्रभावी पैरवी की। उनकी सशक्त दलीलों ने इस चेक अनादरण फैसला नागदा को निर्णायक मोड़ तक पहुँचाया।
चेक अनादरण कानून की पृष्ठभूमि
भारत में चेक अनादरण से जुड़े मामले नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत आते हैं। यह कानून व्यापारिक और व्यक्तिगत लेन-देन में भरोसे की रीढ़ माना जाता है।
आम नागरिकों के लिए संदेश
यह चेक अनादरण फैसला नागदा आम लोगों और व्यापारियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि:
- बिना धनराशि के चेक जारी करना गंभीर अपराध है
- अदालतें अब ऐसे मामलों में सख़्ती बरत रही हैं
- समय पर भुगतान न करने पर जेल तक का रास्ता खुल सकता है
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, चेक अनादरण फैसला नागदा न सिर्फ़ एक कानूनी निर्णय है, बल्कि यह समाज के लिए चेतावनी भी है। संजय शर्मा के विरुद्ध आया यह फैसला बताता है कि कानून अब आर्थिक अपराधों पर कोई नरमी नहीं बरतेगा।
संवाददाता: जीवनलाल जैन, नागदा
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