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सावधानता से बड़ा फैसला: MP निगम मंडल अध्यक्ष नियुक्ति टली, मोहन यादव सरकार ने बचाए 25 करोड़ रुपये

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Published On: 9 February 2026
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MP निगम मंडल अध्यक्ष नियुक्ति टालकर मोहन यादव सरकार ने 25 करोड़ रुपये बचाए। जानिए घाटे-फायदे में चल रहे निगम-मंडलों की पूरी रिपोर्ट।\

MP निगम मंडल अध्यक्ष नियुक्ति क्यों टली?

मध्य प्रदेश में MP निगम मंडल अध्यक्ष नियुक्ति को लगातार टालना अब सिर्फ राजनीतिक मामला नहीं, बल्कि आर्थिक समझदारी का उदाहरण बन गया है।
पिछले दो वर्षों से निगम-मंडल, बोर्ड, आयोग और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियाँ नहीं हो पाईं, लेकिन इसके बावजूद इन संस्थाओं के कामकाज पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फरवरी 2024 में सत्ता संभालने के चार महीने बाद 46 दर्जा प्राप्त मंत्रियों की नियुक्तियाँ रद्द कर दी थीं। यहीं से सरकार की सावधानता नीति साफ दिखाई देने लगी।

MP निगम मंडल अध्यक्ष नियुक्ति टलने से कैसे बचे 25 करोड़ रुपये?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक:

  • एक दर्जा प्राप्त मंत्री / राज्यमंत्री पर
    10–12 लाख रुपये सालाना खर्च

  • 50 से अधिक संस्थाओं में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष होते

  • दो साल में अनुमानित खर्च
    24–25 करोड़ रुपये

MP निगम मंडल अध्यक्ष नियुक्ति न होने से यह पूरा खर्च सरकारी खजाने में बच गया

घाटे में चल रहे MP के निगम-मंडल

कई निगम-मंडल पहले से ही घाटे में हैं और राजनीतिक नियुक्तियाँ होने पर ये सरकारी खजाने पर और बोझ बन जाते।

घाटे वाली प्रमुख संस्थाएं:

  • बीज एवं फार्म विकास निगम
  • लघु उद्योग निगम
  • स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन
  • पशु पालन कुक्कुट विकास निगम
  • स्टेट इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम

इन संस्थाओं में MP निगम मंडल अध्यक्ष नियुक्ति होने से प्रशासनिक खर्च और बढ़ता।


फायदे में चल रहे निगम-मंडल

हालांकि कुछ संस्थाएं मुनाफे में भी हैं:

लाभ में:

  • राज्य खनिज विकास निगम
  • राज्य वन विकास निगम
  • भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA)

प्राधिकरणों में लाभ-हानि का हिसाब योजनाओं पर निर्भर करता है।

अध्यक्ष-उपाध्यक्षों पर होने वाला खर्च (पूरा ब्रेक-अप)

अगर MP निगम मंडल अध्यक्ष नियुक्ति होती तो खर्च कुछ ऐसा होता:

  • मानदेय
  • प्रीमियम / मीडियम सेगमेंट गाड़ी
    ₹50–60 हजार प्रतिमाह
  • ड्राइवर, भृत्य, माली, सहायक
  • 2000–2500 KM ईंधन
  • आवास, मेडिकल
  • पीएसओ (अलग खर्च)

यही कारण है कि सरकार ने नियुक्तियाँ रोककर वित्तीय अनुशासन दिखाया।

प्रमुख निगम-मंडल, आयोग और बोर्ड (पूरी सूची)

निगम-मंडल (18)

  • राज्य खनिज विकास
  • स्टेट सिविल सप्लाई
  • लघु उद्योग
  • पर्यटन विकास
  • राज्य वन विकास
  • बीज एवं फार्म विकास
  • वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक
  • ऊर्जा विकास आदि

प्राधिकरण (13)

  • भोपाल, इंदौर, उज्जैन, कटनी
  • रतलाम, देवास, सिंगरौली
  • तीर्थ स्थान एवं मेला
  • रेरा
  • सहरिया-धारिया प्राधिकरण

आयोग (12)

  • राज्य नीति एवं योजना आयोग
  • मानव अधिकार आयोग
  • राज्य महिला आयोग
  • पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग
  • सामान्य वर्ग कल्याण आयोग
  • प्रवासी श्रमिक आयोग
  • योग आयोग

बोर्ड (19)

  • खादी एवं ग्रामोद्योग
  • कृषि विपणन बोर्ड
  • गोपालन पशु संवर्धन
  • कुश-मछुआ-मां शबरी
  • स्वर्णकार बोर्ड
  • महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड

विशेषज्ञों की राय

वित्तीय विशेषज्ञ मानते हैं कि

“घाटे में चल रहे संस्थानों में राजनीतिक नियुक्तियाँ रोकना एक स्ट्रॉन्ग गवर्नेंस सिग्नल है।”

आगे क्या होगा?

  • नियुक्तियों का फैसला हाईकमान स्तर पर लंबित
  • सत्ता-संगठन के नेता लगातार दिल्ली में बैठकें कर रहे
  • फिलहाल MP निगम मंडल अध्यक्ष नियुक्ति जल्द होती नहीं दिख रही

निष्कर्ष

MP निगम मंडल अध्यक्ष नियुक्ति टालना सिर्फ राजनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि
आर्थिक अनुशासन
सरकारी खजाने की सुरक्षा
सार्वजनिक जवाबदेही
का मजबूत उदाहरण है।

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