Bhopal में इलाज के नाम पर ठगी करने वाला फर्जी Dr गिरफ्तार, मरीजों के परिजनों से लेता था 5-5 हजार रुपये
MP News: Bhopal में हमीदिया अस्पताल में फर्जी Dr बनकर मरीजों और उनके परिजनों से ठगी करने वाला आरोपी गिरफ्तार किया गया है। आरोपी ने खुद को डॉक्टर बताकर बेहतर इलाज और सुरक्षित ऑपरेशन का झांसा देकर मरीजों के परिजनों से 5000 रुपये प्रति व्यक्ति ठगी की। तीन दिन की ट्रेसिंग और पुलिस की सतर्कता के बाद आरोपी को इंदौर से पकड़कर भोपाल में लाया गया। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने कई मरीजों और उनके परिजनों से पैसों की ठगी की थी और अस्पताल के कुछ स्टाफ की मिलीभगत के साथ यह नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
क्या है पूरा मामला?
मामला हमीदिया अस्पताल का है, जो भोपाल और प्रदेश के लिए एक प्रमुख और पुराना चिकित्सा संस्थान है। आरोपी ने अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को फोन किया और खुद को डॉक्टर बताकर उनसे पैसों की मांग की। उसने उन्हें भरोसा दिलाया कि ऑपरेशन या बेहतर इलाज के लिए भुगतान करना अनिवार्य है। इसके बाद आरोपी ने QR कोड भेजकर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करवाए।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी जितेंद्र खाकरे ने कई मरीजों के परिजनों से 5000 रुपये ठगी के तौर पर लिए। अब तक चार लोगों ने आरोपी से ठगी का मामला स्वीकार किया है। वहीं, 10 से ज्यादा मरीजों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
जितेंद्र खाकरे बैतूल का निवासी है। पुलिस ने तीन दिन की सतर्कता और ट्रेसिंग के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया। क्राइम ब्रांच और कोहेफिजा पुलिस ने मिलकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की।
अस्पताल स्टाफ की मिलीभगत की आशंका
हमीदिया अस्पताल में यह मामला इसलिए भी गंभीर हो गया क्योंकि पता चला कि कुछ अस्पताल स्टाफ की मिलीभगत से आरोपी ने यह ठगी नेटवर्क ऑपरेट किया। मरीजों और उनके परिजनों को फोन करके ऑपरेशन के नाम पर पैसे लेने का यह मामला पिछले कुछ दिनों से लगातार सामने आ रहा था। अस्पताल प्रबंधन ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और आरोपी के अन्य अपराधों के सबूत जुटाए। साइबर सेल की मदद से आरोपी की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और टावर लोकेशन का विश्लेषण किया गया। इससे पता चला कि आरोपी उज्जैन, इंदौर, देवास और अन्य शहरों के सरकारी अस्पतालों के आसपास सक्रिय था।
गिरफ्तारी और जांच
साइबर सेल और पुलिस की संयुक्त जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने केवल भोपाल में ही नहीं, बल्कि अन्य शहरों में भी इसी प्रकार की ठगी की है। आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके सहयोगियों की पहचान की जा रही है। पुलिस का मानना है कि इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।
कोहेफिजा पुलिस के अधिकारी ने बताया कि आरोपी जितेंद्र खाकरे ने मरीजों के परिजनों से 5000-5000 रुपये लिए। आरोपी ने खुद को डॉक्टर बताकर फोन पर पैसों की मांग करता था। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने कई सरकारी अस्पतालों के आस-पास भी सक्रियता दिखाई। पुलिस की टीम अब अस्पताल स्टाफ की मिलीभगत की भी जांच कर रही है।
अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया
हमीदिया अस्पताल के प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। अस्पताल प्रशासन ने पुलिस के साथ पूरा सहयोग करने का आश्वासन दिया। प्रशासन ने कहा कि मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा और विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अस्पताल प्रशासन ने आगे कहा कि मरीजों और उनके परिजनों से पैसे लेने वाले किसी भी असामाजिक तत्व को बख्शा नहीं जाएगा। अस्पताल में निगरानी और सुरक्षा बढ़ाई जाएगी।
मीडिया रिपोर्ट और जागरूकता
इस मामले में मीडिया की भूमिका भी अहम रही। लगातार शिकायतें मिलने पर खबरों के माध्यम से प्रशासन और पुलिस की सतर्कता बढ़ी। मरीजों और उनके परिजनों को जागरूक किया गया कि कोई भी डॉक्टर या अस्पताल के बाहर से पैसे की मांग करे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि अस्पताल के भीतर भी असामाजिक तत्व सक्रिय हो सकते हैं और ऐसे मामलों में प्रशासन और पुलिस का त्वरित हस्तक्षेप बेहद जरूरी है।
पुलिस की चेतावनी
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जितेंद्र खाकरे और उसके सहयोगियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आरोपी के अन्य अपराधों और अन्य शहरों में की गई ठगी की जांच जारी है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी फर्जी डॉक्टर या ठग से सतर्क रहें और किसी भी संदेहास्पद गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
निष्कर्ष
Bhopal में इलाज के नाम पर हुई यह ठगी घटना यह दर्शाती है कि अस्पताल परिसर और मेडिकल नेटवर्क में सुरक्षा की आवश्यकता कितनी महत्वपूर्ण है। मरीज और उनके परिवार अस्पताल में इलाज के दौरान संवेदनशील स्थिति में होते हैं और ऐसे शातिर ठगों द्वारा उनका शोषण किया जा सकता है।
इस मामले में पुलिस की तत्परता, साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की जांच ने आरोपी को गिरफ्तार कर ठगी नेटवर्क को तोड़ने में सफलता प्राप्त की। वहीं, अस्पताल प्रशासन की सतर्कता और सहयोग से यह सुनिश्चित किया गया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
यह घटना अन्य अस्पतालों और शहरों के लिए भी चेतावनी है कि फर्जी Drऔर ठग मरीजों के विश्वास का दुरुपयोग कर सकते हैं। इस प्रकार की घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस, अस्पताल प्रशासन और आम नागरिकों की जागरूकता बेहद जरूरी है।
