Indore का MY अस्पताल: इलाज के साथ मरीजों को संक्रमण का खतरा
Indore का सबसे बड़ा एमवाय अस्पताल अब मरीजों को केवल इलाज नहीं दे रहा, बल्कि उन्हें संक्रमण का गंभीर खतरा भी पैदा कर रहा है। अस्पताल के विभिन्न वार्डों में मरीज जहां उपचार ले रहे हैं, वहीं दीवारों और उपकरणों पर रिसाव और फफूंदी नजर आ रही है। खासकर वे दीवारें जिन पर मल्टीपारा मॉनिटर, ऑक्सीजन लाइन और अन्य मेडिकल उपकरण लगे हैं, वहां शौचालयों का पानी रिस रहा है और फंगस भी जम गया है। यह स्थिति मरीजों के लिए हॉस्पिटल जनित संक्रमण का खतरा बढ़ा रही है।
वार्डों की स्थिति और गंभीर समस्याएं
MY के मेडिसिन और सर्जरी वार्ड में दीवारों पर टॉयलेट के पानी का रिसाव और फफूंदी साफ दिखाई दे रही है। न्यूरो सर्जरी वार्ड नंबर तीन में तो सीलन इतनी ज्यादा है कि दीवारों का प्लास्टर उखड़ रहा है। हड्डी रोग वार्ड और डिजिटल एक्स-रे कक्ष में भी यही हाल है।
अस्पताल में मेडिकल वेस्ट (संक्रमित कचरा) के लिए उचित व्यवस्था नहीं है। अधिकांश वार्डों में केवल काली प्लास्टिक बैग में कचरा डाला जा रहा है। सिरिंज, संक्रमित कपड़ा और सामान्य कचरा एक साथ रखे जाने से संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। हड्डी रोग विभाग में कार्डबोर्ड बक्से में इस्तेमाल हुई सलाइन की बोतलें और संक्रमित कपड़े रखे जाते हैं, वहीं पास में पार्टिशन पर्दे भी रखे हैं।
इस प्रकार इस्तेमाल होने वाले पर्दे और उपकरण मरीजों के लिए संक्रमण का माध्यम बन सकते हैं।
साफ-सफाई और रखरखाव में कमी
- वार्डों के गद्दे फटे हुए हैं और लंबे समय से बदले नहीं गए।
- मरीजों के लोहे के बेड गंदे हैं और रंग-रोगन नहीं हुआ।
- बेड के नीचे दवा के लिए रखे गए बाक्स साफ नहीं हैं।
- अस्पताल परिसर के पिछले हिस्से में मलबा और अनुपयोगी गद्दे फैले हुए हैं।
- डॉक्टर्स की पार्किंग के पास संक्रमित ग्लव्स खुले में रखे गए हैं।
मरीजों के परिजन बताते हैं कि चादर, तकिया और कंबल नहीं मिल रहे। कई लोग अपने घर से चादर और कंबल लेकर आते हैं।
विशेषज्ञों की चिंता
डॉ. संजय दीक्षित, पूर्व डीन एमजीएम मेडिकल कॉलेज, कहते हैं कि अस्पताल में स्वच्छता न होने के कारण मरीज में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। यदि किसी मरीज में पहले से दवा के प्रति प्रतिरोध है, तो दूषित वातावरण से यह प्रतिरोध और बढ़ सकता है। इसका सीधा असर मरीज के उपचार की गति और सुधार पर पड़ता है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
डॉ. अशोक यादव, अधीक्षक एमवाय अस्पताल, ने बताया कि अस्पताल में 40 से अधिक टॉयलेट्स से लीकेज की समस्याएं हैं। उन्होंने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को सुधार के लिए बार-बार कहा, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वार्ड के पुराने पलंग का रंगरोगन जल्द करवाया जाएगा।
संक्रमण के कारण और प्रभाव
सरकारी अस्पतालों में स्वच्छता की कमी से संक्रमण एक मरीज से दूसरे में तेजी से फैल सकता है। यदि किसी मरीज में पहले से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट बैक्टीरिया मौजूद हैं, तो दूषित वातावरण में यह और मजबूत हो सकते हैं। इससे मरीजों में उपचार में देरी और जटिलताएं बढ़ जाती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वच्छता और संक्रमित कचरे का उचित प्रबंधन न होने पर अस्पताल में सुपरबग जैसी खतरनाक स्थिति भी पैदा हो सकती है।
प्रमुख खामियां संक्षेप में
- दीवारों पर सीलन और फफूंदी।
- मेडिकल उपकरण के पास रिसाव और गंदगी।
- मेडिकल वेस्ट के लिए उचित बिन का अभाव।
- बेड, गद्दे और वार्ड की सफाई में कमी।
- संक्रमित उपकरण और पर्दों का गलत उपयोग।
- अस्पताल परिसर में मलबा और अनुपयोगी सामान फैला।
- मरीजों को चादर, तकिया और कंबल नहीं मिल रहे।
निष्कर्ष
Indore का MY अस्पताल, शहर का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान होने के बावजूद, संक्रमण फैलाने का केंद्र बनता जा रहा है। मरीज केवल इलाज नहीं, बल्कि संक्रमण और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट बीमारियों के खतरे का सामना कर रहे हैं।
स्वच्छता और रखरखाव में सुधार न होने पर अस्पताल में संक्रमण की आशंका और बढ़ेगी। विशेषज्ञ और प्रशासन दोनों मानते हैं कि संक्रमण को नियंत्रित करना और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अभी सबसे बड़ी चुनौती है।
