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MP में मिसिंग पर्सन के मामले: देश में नंबर-1, 60 हजार लोग अभी भी लापता

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Published On: 6 February 2026
One in Three Missing in MP is a Woman or Child, Police Efficiency Questioned
— One in Three Missing in MP is a Woman or Child, Police Efficiency Questioned

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MP में मिसिंग पर्सन के मामले: देश में नंबर-1, 60 हजार लोग अब भी लापता

MP अब देश में मिसिंग पर्सन के मामलों में सबसे आगे है। संसद के मौजूदा सत्र में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2020 में प्रदेश में लगभग 48 हजार लोग लापता थे, जबकि 2023 तक यह संख्या बढ़कर 60 हजार तक पहुंच गई। इस बढ़ोतरी ने मध्य प्रदेश को पश्चिम बंगाल से आगे निकाल दिया, जो 2020 में 52 हजार मामलों के साथ पहले स्थान पर था।

विशेष रूप से यह आंकड़ा चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि इसमें महिलाओं और बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है। प्रदेश में लापता हुए लगभग 44 हजार लोग महिलाएं और बच्चे हैं। इसमें 39 हजार वयस्क महिलाएं, 3,725 नाबालिग लड़कियां और 1,110 नाबालिग लड़के शामिल हैं। यह स्पष्ट करता है कि प्रदेश में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर संकट है।

तीन साल में 1.53 लाख मामले दर्ज

सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, 2020 से 2023 के बीच प्रदेश में कुल 1.53 लाख मिसिंग पर्सन केस दर्ज किए गए। इन मामलों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है, भले ही प्रदेश पुलिस और सरकार ‘ऑपरेशन मुस्कान’ जैसी पहल कर रही हो। यह अभियान हर साल की शुरुआत में लापता लोगों को ढूंढने और जागरूकता बढ़ाने के लिए चलाया जाता है।

लेकिन आंकड़े बताते हैं कि अभियान के बावजूद मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

CAG रिपोर्ट ने खोली पोल

कैग (CAG) की हालिया रिपोर्ट में मध्य प्रदेश पुलिस के कार्यकुशलता पर कड़ी आपत्तियां उठाई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार पुलिस 25–30 प्रतिशत कम क्षमता पर काम कर रही है, और इसके चलते मिसिंग पर्सन के मामलों में कारगर कार्रवाई करना मुश्किल हो गया है।

मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • थानों में 35–40 प्रतिशत पद खाली हैं।
  • कर्मचारियों पर अत्यधिक और असहनीय कार्यभार है।
  • पुलिस के पास आधुनिक तकनीक और संसाधनों की भारी कमी है।
  • इन परिस्थितियों में गंभीर अपराधों और मिसिंग मामलों की प्रभावी जांच पर सवाल उठते हैं, जिससे आम जनता में सुरक्षा की भावना कमजोर हो रही है।

विशेषकर महिलाओं और बच्चों के मामलों में पुलिस की कार्यकुशलता पर चिंता बढ़ रही है। आंकड़े बताते हैं कि लापता लोगों में लगभग दो तिहाई महिलाएं और बच्चे हैं, जिन्हें खोजने में पुलिस असफल रही है।

नेता प्रतिपक्ष का हमला

MP  में लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकार की कानून-व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था पर सीधे सवाल खड़ा करती है।

सिंगार ने पूछा कि जब पुलिस संसाधनों और स्टाफ की कमी से जूझ रही है, तो महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि तुरंत अतिरिक्त पुलिस स्टाफ, आधुनिक तकनीकी उपकरण और सुरक्षा उपायों को लागू किया जाए ताकि लापता व्यक्तियों की संख्या में कमी लाई जा सके।

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर संकट

विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के मामले चिंताजनक हैं। लापता लोगों में लगभग 44 हजार महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। इसका मतलब है कि हर तीन लापता लोगों में से दो महिलाएं और बच्चे हैं।

सरकारी आंकड़ों से यह भी स्पष्ट है कि प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के लिए कोई ठोस सुरक्षा नेटवर्क नहीं है। कई बार माता-पिता या अभिभावक फ्रंटलाइन पुलिस से संपर्क करने पर भी परिणाम नहीं पा पाते। इसके चलते समाज में चिंता और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।

हाल के अभियानों की समीक्षा

मध्य प्रदेश पुलिस हर साल ‘ऑपरेशन मुस्कान’ अभियान चलाती है। इसका उद्देश्य है:

  • लापता बच्चों और महिलाओं को ढूंढना।
  • आम जनता में जागरूकता बढ़ाना।
  • अपराधियों पर नजर रखना।

हालांकि, पिछले तीन वर्षों में 1.53 लाख मामलों के बावजूद, अभियान का प्रभाव सीमित रहा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पुलिस स्टेशन में खाली पद और भारी काम का बोझ इस अभियान की सफलता में बाधा बन रहा है।

सरकारी और राजनीतिक कदम

हालांकि सरकार ने दावा किया है कि पुलिस की क्षमता बढ़ाई जा रही है, विशेषज्ञों और विपक्ष का कहना है कि अभी भी बहुत सुधार की जरूरत है।

  • पुलिस में नए अधिकारियों की भर्ती जरूरी है।
  • आधुनिक तकनीक जैसे CCTV नेटवर्क, मोबाइल ट्रैकिंग और डेटा एनालिटिक्स को तेज़ किया जाना चाहिए।
  • महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

MP में मिसिंग पर्सन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 60 हजार लोग अभी भी लापता हैं, जिसमें अधिकतर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। सरकारी आंकड़े और CAG की रिपोर्ट यह संकेत देती हैं कि पुलिस की कार्यकुशलता, संसाधनों की कमी और आधुनिक तकनीक का अभाव इन मामलों की जांच को कमजोर बना रहा है।

नेता प्रतिपक्ष और समाज के विभिन्न वर्ग इस पर सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि आम जनता में सुरक्षा की भावना कमजोर करने वाला कारक भी बन गई है।

अगर संकटपूर्ण स्थिति पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो मध्य प्रदेश में मिसिंग पर्सन के मामलों की संख्या और बढ़ सकती है। इसलिए सरकार और पुलिस प्रशासन को मिलकर तेज और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि महिलाओं, बच्चों और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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