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दलित दूल्हे ने Constitution की किताब के साथ घोड़ी पर बारात निकाली, समाज में समानता का संदेश

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Published On: 6 February 2026
Groom Rides Horse Holding Constitution, Sets New Tradition in Damoh
— Groom Rides Horse Holding Constitution, Sets New Tradition in Damoh

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हाथ में “भारत का Constitution ” लेकर घोड़ी पर सवार दूल्हा,

दमोह जिले में अनोखी घटना
मध्य प्रदेश के दमोह जिले के हटा थाना क्षेत्र के कुआंखेड़ा महदेला गांव में हाल ही में एक अनोखी और प्रेरक घटना देखने को मिली। नंदू बंसल नामक दूल्हा अपने हाथ में भारत का Constitution लेकर घोड़ी पर सवार होकर पूरे गांव में बारात निकालने निकला। यह दृश्य लोगों के लिए बेहद आश्चर्यजनक और प्रेरक था, क्योंकि इस गांव में दलित वर्ग के लोगों के लिए परंपरागत रूप से घोड़ी पर सवार होकर बारात निकालना मना था। दशकों से चली आ रही इस परंपरा को तोड़ते हुए नंदू बंसल ने समाज में समानता का संदेश देने की पहल की।

परंपरा तोड़ने की पहल

कुआंखेड़ा महदेला गांव में वर्षों से यह परंपरा रही कि दलित वर्ग के लोग शादी में घोड़ी पर सवार नहीं हो सकते। इस परंपरा को दशकों से सभी लोग मानते आए हैं। नंदू बंसल ने इस मिथक को तोड़ने का निर्णय लिया। उनकी ख्वाहिश थी कि वह भी घोड़ी पर सवार होकर बारात निकालें और अपने अधिकार को दिखाएं। उन्होंने अपने परिवार के साथ मिलकर एसपी और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा ताकि उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तहसीलदार और टीम को गांव में भेजा और सभी जातियों के लोगों से इस मामले पर राय ली।

समाज का समर्थन और प्रशासन की भूमिका

प्रशासन ने गांव के सभी लोगों से बातचीत के बाद सुनिश्चित किया कि इस बारात में किसी को कोई आपत्ति नहीं है। दलित वर्ग के अलावा अन्य जातियों के लोग भी इस पहल का समर्थन करने लगे। प्रशासन ने सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया ताकि बारात बिना किसी बाधा के निकाल सके। इस पहल ने समाज में एक नया संदेश दिया कि परंपराओं और रूढ़िवादिता के नाम पर किसी के अधिकार को सीमित नहीं किया जा सकता।

बारात की अनोखी झलक

पांच फरवरी को नंदू बंसल की बारात निकली। बड़ी संख्या में लोग बैंड-बाजों और डीजे के साथ नाचते हुए बारात में शामिल हुए। सबसे खास दृश्य था जब नंदू बंसल घोड़ी पर सवार थे और उनके हाथ में भारत का संविधान था। यह नजारा केवल एक शादी की घटना नहीं बल्कि समाज में समानता और अधिकार की जागरूकता का प्रतीक बन गया। लोगों ने देखा कि संविधान का आदर्श कितना महत्वपूर्ण है और यह परंपराओं से ऊपर उठकर समाज में समानता स्थापित करने का मार्ग दिखाता है।

संविधान का महत्व और संदेश

दलित समाज के लोग मानते हैं कि आजादी के बाद पहली बार किसी दलित दूल्हे ने घोड़ी पर सवार होकर बारात निकाली। उन्होंने संविधान में दिए गए समानता और समान अधिकार को इस पहल का आधार बताया। नंदू बंसल ने यह साबित किया कि संविधान न केवल कागज पर है, बल्कि इसका पालन करके समाज में वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है। इस पहल से यह स्पष्ट हुआ कि जाति और पुरानी परंपराओं के नाम पर लोगों को बांटना अब संभव नहीं है।

रूढ़िवादी सोच में बदलाव

यह घटना दर्शाती है कि समाज में बदलाव लाने की क्षमता युवा पीढ़ी में है। पुराने मिथक और परंपराओं की जकड़न को तोड़कर समाज में नई सोच लाई जा सकती है। इस पहल ने यह संदेश दिया कि समाज में हर व्यक्ति को समान अधिकार मिलना चाहिए और किसी भी वर्ग को नीचा दिखाने का अधिकार किसी को नहीं है। अब युवा और पुरानी पीढ़ी दोनों मिलकर संविधान के आदर्शों को मानते हुए रूढ़िवादी सोच को पीछे छोड़ सकते हैं।

समानता और भाईचारा बढ़ाने की प्रेरणा

इस पहल ने न केवल दलित समाज बल्कि पूरे गांव में भाईचारे और समानता का संदेश फैलाया। सभी समाजों के लोग इस बदलाव का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि परंपराओं और मिथकों के आधार पर समाज को बांटना गलत है। नंदू बंसल की इस पहल ने यह भी दिखाया कि जब लोग मिलकर संविधान और उसके मूल्यों का पालन करते हैं, तो समाज में सामंजस्य और आपसी भाईचारा बढ़ता है।

युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा

यह घटना युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन गई है। यह सिखाती है कि अगर साहस और सही सोच हो तो समाज में बदलाव लाना संभव है। संविधान की रक्षा और उसके आदर्शों का पालन करके समाज में समानता, अधिकार और भाईचारा बढ़ाया जा सकता है। युवा पीढ़ी अब यह समझ रही है कि परंपराओं और रूढ़िवादी सोच के नाम पर किसी को नीचा दिखाना सही नहीं है और बदलाव लाने का अधिकार उनके पास भी है।

निष्कर्ष

नंदू बंसल की यह पहल केवल एक शादी की घटना नहीं है। यह समाज में समानता और अधिकार की जागरूकता का प्रतीक बन गई है। संविधान में दिए गए समानता और समान अधिकार के सिद्धांतों को मानकर समाज में नई सोच और भाईचारे की भावना को बढ़ावा दिया जा सकता है। इस पहल ने साबित कर दिया कि परंपराओं और रूढ़िवादी सोच को तोड़कर समाज में बदलाव लाया जा सकता है। आने वाले वर्षों में इस तरह की पहल समाज में समानता और न्याय के लिए मार्गदर्शक बन सकती है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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