MP News: भोपाल के भौंरी में 3700 एकड़ में बनेगी AI सिटी, रिसर्च और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज के लिए बनेगा इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम
MP की राजधानी भोपाल के भौंरी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिटी विकसित की जाएगी। यह परियोजना केवल एक सामान्य टेक्नोलॉजी पार्क नहीं होगी, बल्कि यहाँ रिसर्च, स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज का एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा। इस एआई सिटी के विकास का पूरा रोडमैप इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) द्वारा तैयार किया जाएगा।
भौंरी में बनने वाली इस AI सिटी का क्षेत्रफल लगभग 3700 एकड़ होगा। यह परियोजना भारत की सबसे उन्नत और व्यापक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केंद्र के रूप में विकसित होगी। परियोजना का मुख्य उद्देश्य न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना है, बल्कि यहां विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों और ग्लोबल संस्थानों के बीच सहयोग और ज्ञान का आदान-प्रदान सुनिश्चित करना भी है।
ग्लोबल एजेंसियों की रुचि
AI सिटी के डेवलपमेंट के लिए अब तक 20 से ज्यादा ग्लोबल एजेंसियों ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) दाखिल किया है। अधिकारियों का अनुमान है कि इस महीने के अंत तक डेवलपमेंट एजेंसी का चयन हो जाएगा। इस प्रक्रिया में सभी एजेंसियों द्वारा प्रस्तावित योजनाओं, तकनीकी क्षमता, वित्तीय संरचना और परियोजना प्रबंधन के मॉडल को ध्यान में रखा जा रहा है।
इस परियोजना के लिए राष्ट्रीय स्तर की बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें नॉलेज और एआई सिटी के रोडमैप पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय संस्थानों के निदेशक, कुलपति और प्राचार्य शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि AI सिटी का निर्माण अत्याधुनिक तकनीकी और हरित विकास के मानकों के अनुरूप हो।
8 सदस्यीय कोर कमेटी और मास्टर प्लान
AI सिटी के विकास के लिए एक 8 सदस्यीय कोर कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में नगरीय विकास मंत्रालय, तकनीकी संस्थानों और शिक्षा के क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। कमेटी का कार्य पूरे प्रोजेक्ट का मास्टर प्लान तैयार करना है।
मास्टर प्लान में कई प्रमुख पहलुओं को शामिल किया जाएगा:
- ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट – सिटी का कैंपस और भवन हरित मानकों के अनुसार विकसित किए जाएंगे।
- ओपन स्पेस और ग्रीन जोन – पर्यावरण के अनुकूल और सार्वजनिक उपयोग के लिए बड़े पैमाने पर हरित क्षेत्र होंगे।
- स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम – इलेक्ट्रिक वाहन, सीएनजी और हाइड्रोजन आधारित परिवहन के विकल्प सिटी में उपलब्ध होंगे।
- PPP और जॉइंट वेंचर मॉडल – सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सहयोग से सिटी का संचालन और वित्तीय मॉडल तैयार किया जाएगा।
- इंटीग्रेटेड पार्टनरशिप – ग्लोबल यूनिवर्सिटीज और शोध संस्थानों के साथ साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।
इन पहलुओं से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि AI सिटी केवल एक शैक्षणिक या तकनीकी केंद्र न रहकर संपूर्ण इकोसिस्टम का उदाहरण बने।
रिसर्च और स्टार्टअप्स के लिए अवसर
भौंरी AI सिटी में रिसर्च और स्टार्टअप्स के लिए विशेष क्षेत्र तैयार किए जाएंगे। यहां शोधकर्ता और उद्यमी नई तकनीकों, मॉडल और AI समाधानों पर काम कर सकेंगे। स्टार्टअप्स को निवेश, संरचना और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
AI सिटी का डिज़ाइन इस प्रकार होगा कि शिक्षा, शोध और उद्योग के बीच तालमेल बना रहे। इंडस्ट्री और ग्लोबल विश्वविद्यालयों के सहयोग से यहाँ नवाचार और व्यवसायिक अवसर दोनों विकसित होंगे।
शिक्षा और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज की भागीदारी
AI सिटी में ग्लोबल यूनिवर्सिटीज और शोध संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। यह छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्लेटफॉर्म बनेगा। विश्वविद्यालयों की भागीदारी से AI सिटी में विश्व स्तरीय शिक्षा और अनुसंधान की सुविधा उपलब्ध होगी।
इसके अलावा, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट वर्क और स्टार्टअप इन्क्यूबेशन की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इससे युवा प्रतिभाओं को तकनीकी और उद्यमिता के क्षेत्र में अवसर मिलेंगे।
स्मार्ट और टिकाऊ शहर का मॉडल
AI सिटी का विकास केवल तकनीकी केंद्र के रूप में नहीं होगा, बल्कि यह स्मार्ट और टिकाऊ शहर का मॉडल भी प्रस्तुत करेगा। इसमें हरित निर्माण, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण के उपाय शामिल होंगे।
सिटी में ईवी, हाइड्रोजन और सीएनजी आधारित परिवहन, ऊर्जा बचत उपकरण और स्मार्ट शहर तकनीकों को लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य न केवल तकनीकी नवाचार बढ़ाना है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास के मानक भी स्थापित करना है।
भविष्य के लिए रणनीति
AI सिटी का रोडमैप तैयार करते समय यह सुनिश्चित किया गया है कि यह परियोजना स्थायी, लाभकारी और अंतरराष्ट्रीय स्तर की हो। नगरीय प्रशासन विभाग ने IISER को जिम्मेदारी दी है कि वे परियोजना का एक्शन प्लान और कार्यान्वयन रणनीति तैयार करें।
इस मास्टर प्लान के तहत सिटी में उद्योग, शिक्षा, शोध और नवाचार का पूर्ण संपूर्ण इकोसिस्टम तैयार होगा। इससे मध्य प्रदेश न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर AI और रिसर्च के क्षेत्र में एक अग्रणी केंद्र के रूप में उभर सकता है।
निष्कर्ष
भोपाल के भौंरी में 3700 एकड़ में बनने वाली AI सिटी तकनीकी, शैक्षणिक और आर्थिक दृष्टि से गेम-चेंजर साबित होगी। यहां रिसर्च, स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज का इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम तैयार होगा। 20 से अधिक ग्लोबल एजेंसियों की भागीदारी, 8 सदस्यीय कोर कमेटी और मास्टर प्लान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि AI सिटी भारत और दुनिया में AI और स्मार्ट शहरों का उत्कृष्ट उदाहरण बने।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद भोपाल, MP और भारत के लिए यह स्मार्ट और टिकाऊ टेक्नोलॉजी हब साबित होगा, जहां नवाचार, शिक्षा और उद्योग का पूर्ण संतुलन मिलेगा।
