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32 मौतों वाला Bhagirathpura जल प्रदूषण मामला राज्यसभा में, केंद्रीय मंत्री से जिम्मेदारी लेने की मांग

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Published On: 3 February 2026
Baghirthpura Water Contamination in Indore Echoes in Rajya Sabha, MPs Raise Questions on Water Quality
— Baghirthpura Water Contamination in Indore Echoes in Rajya Sabha, MPs Raise Questions on Water Quality

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राज्यसभा में गूंजा Indore का Bhagirathpura दूषित जल कांड, 

Bhagirathpura जल प्रदूषण: 32 मौतों का मामला

Indore के Bhagirathpura क्षेत्र में दूषित पानी के कारण 32 लोगों की मौत का मामला सोमवार को राज्यसभा में गूंजा। कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज पानी सबसे गंभीर समस्या बन चुका है और इसमें कोई संदेह नहीं कि जनता को जहरीला पानी सप्लाई किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जल आपूर्ति विभाग में भारी भ्रष्टाचार है और इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच होना आवश्यक है।

सांसदों ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप कर जिम्मेदारी लेने की मांग की। प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह विषय केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता से जुड़ा हुआ सवाल है। उन्होंने सवाल उठाया कि गुजरात के गांधीनगर में दूषित पानी पीने से कितने लोग बीमार हुए और इंदौर में अब तक कितनी मौतें हो चुकी हैं।

राज्यसभा में चर्चा और सांसदों के सवाल

महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इंदौर का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि इन मौतों की जिम्मेदारी किसकी तय की गई है। क्या केवल राज्य सरकार जिम्मेदार है या जल शक्ति मंत्रालय ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से कोई रिपोर्ट तलब की है या नहीं।

इससे पहले कांग्रेस सांसद डा. सैयद नासिर हुसैन ने राज्यसभा में इंदौर की सफाई व्यवस्था और पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि नागरिकों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया

केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री तोखन साहू ने लिखित प्रश्न का उत्तर देते हुए बताया कि केंद्र सरकार इंदौर के भागीरथपुरा में हुई जल प्रदूषण की घटना से अवगत है। उन्होंने कहा कि सरकार अमृत और अमृत 2.0 जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्यों को सहायता प्रदान कर रही है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रभावित क्षेत्र में पाइपलाइनें 1997 जितनी पुरानी हैं। नगर निगम ने जल आपूर्ति के लिए चार पैकेज निविदाएं जारी की हैं। पैकेज-1 का कार्य शुरू हो चुका है। इस परियोजना में जल स्रोत विकास से लेकर आधुनिक वितरण प्रणाली और दीर्घकालिक रखरखाव शामिल है।

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भविष्य में रोकथाम और सुधार

सांसदों ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों से ठोस कार्ययोजना की मांग की। प्रमोद तिवारी ने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रभावित क्षेत्रों में नियमित पानी की गुणवत्ता जांच और जनता के लिए पारदर्शी रिपोर्टिंग प्रणाली बनाई जाए।

इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि यह केवल स्थानीय प्रशासन का मुद्दा नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर मानव स्वास्थ्य और सुरक्षा का मामला है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे संकट बार-बार उत्पन्न होंगे।

भागीरथपुरा जल संकट का गंभीर प्रभाव

भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 32 मौतों के अलावा दर्जनों लोग गंभीर रूप से बीमार हुए। स्थानीय लोग लंबे समय से शिकायत कर रहे थे कि पानी की सप्लाई में गंदगी और दूषित तत्व मिल रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

नगरीय जल आपूर्ति प्रणाली में पुरानी पाइपलाइनें, सही निगरानी की कमी और भ्रष्टाचार के कारण यह समस्या बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही आधुनिक पाइपलाइन, जल शोधन प्रणाली और नियमित जांच प्रणाली लागू नहीं की गई, तो भविष्य में और भी अधिक लोग प्रभावित हो सकते हैं।

सांसदों की मांगें
  1. केंद्रीय हस्तक्षेप: केंद्र सरकार से प्रभावित क्षेत्र में तत्काल हस्तक्षेप।
  2. जिम्मेदारी तय करना: मौतों और प्रदूषण की जिम्मेदारी तय करना।
  3. भविष्य की रोकथाम: जल गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाना।
  4. पारदर्शी रिपोर्टिंग: जनता के लिए जल गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक करना।
  5. इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार: पुरानी पाइपलाइन बदलना और आधुनिक वितरण प्रणाली लागू करना।

निष्कर्ष

Bhagirathpura  जल कांड ने इंदौर और पूरे मध्य प्रदेश में नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति गंभीर चेतावनी दी है। राज्यसभा में सांसदों द्वारा उठाए गए सवाल और केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया इस ओर संकेत करती है कि अब सुधार की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है।

सांसदों ने इस मामले को केवल प्रशासनिक गलती नहीं बल्कि मानवता से जुड़े मुद्दे के रूप में देखा और केंद्र और राज्य दोनों से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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