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Indore में श्वानों के काटने पर हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: ‘सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन तक नहीं हो रहा’

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Published On: 3 February 2026
High Court Slams Indore Administration: “Supreme Court Orders Still Not Followed on Stray Dogs”
— High Court Slams Indore Administration: “Supreme Court Orders Still Not Followed on Stray Dogs”

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Indore में श्वानों के काटने के मामलों पर हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: “

Indore , मध्य प्रदेश।
Indore शहर में लगातार बढ़ रहे आवारा श्वानों के काटने के मामलों ने प्रशासन और न्यायपालिका की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को हाई कोर्ट की Indore खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की कि Indore में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन तक नहीं हो रहा। शहर के निवासियों और जानवरों के अधिकारों से जुड़े कार्यों में देरी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जनहित याचिका और हाई कोर्ट की सुनवाई

यह मामला युवाओं के संगठन “डूइंग नीडफुल एसोसिएशन” द्वारा हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। अधिवक्ता गगन बजाड़ ने याचिका प्रस्तुत की, जिसमें आरोप लगाया गया कि नगर निगम दावा करता है कि अब तक ढाई लाख श्वानों की नसबंदी की जा चुकी है, लेकिन इसका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

हाई कोर्ट ने इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता पीयुष माथुर को न्याय मित्र नियुक्त किया। सुनवाई में अधिवक्ता बजाड़, मनीष यादव और पूर्व याचिकाकर्ता वंदना जैन ने भी अपनी बात रखी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि नगर निगम द्वारा नसबंदी के नाम पर श्वानों के कान काटने की घटनाएं सामने आई हैं, और वास्तविक नसबंदी की पुष्टि करना मुश्किल है।

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू करना प्राथमिकता होनी चाहिए, और शहर में इसके पालन में हुई देरी चिंताजनक है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और पालन की स्थिति

सुप्रीम कोर्ट ने लगभग दो महीने पहले सभी स्थानीय निकायों को आदेश दिया था कि सार्वजनिक स्थानों से आवारा श्वानों को हटाया जाए और उन्हें डॉग शेल्टर होम में रखा जाए। इसके तहत नगर निगम को जिम्मेदारी दी गई थी कि शेल्टर होम की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और श्वानों का उचित प्रबंधन किया जाए।

लेकिन Indore में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। शहर में केवल एक डॉग शेल्टर होम है, जो देवगुराडिया ट्रेंचिंग ग्राउंड में स्थित है और इसकी क्षमता केवल 200 श्वानों की है। इसके बावजूद शहर में अनुमानित 2 लाख से ज्यादा आवारा श्वान हैं, जो लगातार नागरिकों के लिए खतरा बने हुए हैं।

हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि “इंदौर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन तक नहीं होता। यह स्थिति गंभीर है और नगर निगम को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।”

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Indore में श्वानों की संख्या और खतरे

नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, Indore में अनुमानित दो लाख से अधिक आवारा श्वान हैं। रोजाना औसतन 200 लोग श्वानों के काटने का शिकार हो रहे हैं। इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके हैं densely populated residential areas, पार्क, और सार्वजनिक स्थान।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उम्मीद थी कि नगर निगम नया डॉग शेल्टर होम खोलेगा, जिससे श्वानों को सुरक्षित स्थान पर रखा जा सके। लेकिन अब तक केवल योजना स्तर पर चर्चा हुई है।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन के लिए हम स्थान तलाश रहे हैं। तीन-चार संभावित स्थान देखे जा चुके हैं। जैसे ही जगह तय होगी, डॉग शेल्टर होम का काम शुरू कर दिया जाएगा।”

नसबंदी और एजेंसी पर आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया कि नगर निगम द्वारा तय एजेंसी नसबंदी के नाम पर श्वानों के कान काट देती है, लेकिन वास्तविक नसबंदी के प्रमाण की जांच नहीं की जाती। याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की कि श्वानों की नसबंदी का रिकॉर्ड ऑनलाइन डैशबोर्ड पर आम जनता के लिए सार्वजनिक किया जाए।

हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित करे और यह सुनिश्चित करे कि नसबंदी पूरी तरह से humane और वैध तरीके से हो।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका की स्थिति

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए याचिका की सुनवाई की थी। कोर्ट ने सभी पक्षकारों को कहा था कि वे अपने तर्क लिखित में प्रस्तुत कर सकते हैं। सुनवाई पूरी हो चुकी है और अब हाई कोर्ट इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन की रिपोर्ट के आधार पर आगे सुनवाई करेगा।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि स्थानीय निकाय सार्वजनिक स्थानों से श्वानों को हटाएं और उन्हें डॉग शेल्टर होम में शिफ्ट करें, ताकि नागरिक और जानवर दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

प्रशासन की स्थिति और चुनौतियां

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि डॉग शेल्टर होम बनाने के लिए स्थान चुनना प्राथमिकता है, और संभावित स्थानों की तलाश चल रही है। यह भी बताया कि जैसे ही स्थान तय होगा, निर्माण कार्य तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।

हालांकि शहर में आवारा श्वानों की संख्या अधिक होने के कारण प्रशासन के सामने बड़ा logistical challenge है। वर्तमान शेल्टर होम की क्षमता केवल 200 श्वानों की है, जबकि शहर में अनुमानित 2 लाख श्वान हैं।

हाई कोर्ट ने प्रशासन से स्पष्ट कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना अब विलम्ब का विषय नहीं है।

नागरिकों पर प्रभाव

आवारा श्वानों के बढ़ते खतरे के कारण नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। रोजाना कई लोग श्वानों के काटने का शिकार हो रहे हैं, जिसमें बच्चे और वृद्ध भी शामिल हैं। इसके अलावा, इस स्थिति ने शहर की cleanliness और public health पर भी गंभीर प्रभाव डाला है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, श्वानों को humane तरीके से शेल्टर होम में रखा जाना चाहिए, ताकि उनका प्रबंधन और देखभाल सुनिश्चित हो सके।

निष्कर्ष

Indore में आवारा श्वानों के मामलों ने प्रशासन और न्यायपालिका की गंभीर चिंता बढ़ा दी है। हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी यह दर्शाती है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन अब प्राथमिकता बनाना आवश्यक है।

नगर निगम को तत्काल डॉग शेल्टर होम निर्माण और श्वानों की humane नसबंदी सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही सार्वजनिक स्थानों से श्वानों को हटाना और उनके रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाना आवश्यक है।

इंदौर के नागरिकों और प्रशासन के लिए यह चेतावनी है कि अगर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो श्वानों के काटने की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। हाई कोर्ट अब इस मामले की निगरानी जारी रखेगा और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन पर ही आगे की सुनवाई करेगा।

 

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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